Category: Puja

गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरू पूर्णिमा कहते हैं. यह दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिन भी है वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे और उन्होंने …

चतुरमास प्रारंभ – क्या करें, क्या न करें

आज देवशयनी एकादशी है और आज से ही चतुरमास का प्रारंभ माना जाता है। पौराणिक कथानुसार कहा जाता है कि इस दौरान भगवान विष्णु चार माह के लिए निद्रासन …

सत्संग और कथा-प्रवचन सुनने का महत्त्व क्यों ?

हमारे देश क पौराणिक और धार्मिक कथा साहित्य बढ़ा समृद्धिशाली हैं, ऋषि- मुनियों ने भारतीय ज्ञान, नीति,सत्य प्रेम न्याय संयम धर्म तथा उच्च कोटि के नैतिक सिद्धांतों को जनता …

मूर्तीपूजा की सार्थकथा क्यों ?

मनोवैज्ञानिकों का कहना हैं के आस्था एवं भावना को उभरने के लिए व्यक्ति मूर्ति चित्र प्रतीक के लिए चाहिए, आराधिया की मूर्ती की पूजा करके मनुष्य उसके साथ मनोवेिगियनिक …

हिन्दू धर्म में अनेक देवी देवताओ का पूजन क्यों ?

गुण,कर्म,स्वभाव में उत्कृष्ट दिव्यस्वरूप और निश्चित फल देने की सामर्थ्य जिसके पास हैं उसे देवता कहते हैं. कहा जाता हैं कि हिन्दू धर्म में अनगिनत देवी देवता हैं. बृहदारण्यक …

शुभकार्यों में नवग्र्हों का पूजन क्यों होता है ?

मान्यता यह की आकाश में विध्यमान नवगृह सूर्य चन्द्र ब्र्ह्स्प्ति शुक्र केतु मंगल बुध शनि और राहु मिलकर संसार और मनुष्य के सम्पूर्ण जीवन को नियंत्रित करते हैं इसलिए …

पूजा पाठ और कर्मकांडों में संकल्प अनिवार्य क्यों ?

इसमें कोई संदेह नहीं की आज तक जितने भी कार्य सिद्ध हुए हैं, उनमे व्यक्ति की साधना और संकल्प शक्ति का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा हैं, संकल्पवान व्यक्ति ही किसी …

जानिये आखिर क्यों कुंभ मेला प्रयाग , हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में ही लगता है

इन चार मुख्य तीर्थस्थानों पर 11-12 वर्षो के अंतर् से लगने वाले कुम्भ पर्व में स्नान और दान का गृहयोग बनता हैं, इस अवसर पर न केवल भारतवर्ष के …

जानिए मनुष्य जीवन को 84 लाख योनियों में क्यों दुर्लभ माना गया है

प्राचीनकाल से हमारे ऋषि -मुनियों ,विचारकों मर्मज्ञों ने इस बात का समर्थन किया ह की मनुष्य -जीवन अपने आप में अद्भुत एवं महान ह, ईस्वर ने पृथ्वी पर 84 …

आखिर मकान की नीव में सर्प ओर कलश क्यों गाड़ा जाता है ?

श्रीमद्भागवत महापुराण के पांचवे स्कन्द में लिखा है की पृथ्वी के नीचे पाताललोक है ओर इसके स्वामी शेषनाग है. श्रीशुकदेव के मतानुसार पाताल से तीस हजार योजन दूर शेषजी …