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shani dosh ke lakshan – शनि देव के प्रकोप से बचने का ख़ास तरीका

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जब भी शनि देव की बात आती है या उन्हें का नाम आता है तो मन काप सा जाता है| शनिदेव बहुत ही बलवान और बुद्धि मान थे| उन्हें का खोफ पुरे संसार में है| जब भी शनि देव का नाम आता है व्यक्ति चिंता में पढ़ जाता है लेकिन दोस्तों शनि देव बहुत ही दयालु है| जो व्यक्ति सच के रास्ते पर चलता है दुसरो को दुःख नही देता और जो व्यक्ति हमेशा दुसरो का भला करता है शनि देव उन पर कृपा करते है| लेकिन वही जो व्यक्ति दुसरो को दुख देता है गलत काम करता है वो उन्हें चैन से नही रहेने देते| उन्हें का जीवन नरग से भी बेकार हो जाता है| आइये अब जानते है की शनि देव कौन थे|

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शनिदेव जी महाराज आइये जानते है शनि देव कौन थे| एक समय की बात है राजा दक्ष की कन्या संज्ञा का विवाह सूर्यदेवता के साथ हुआ। कन्या संज्ञा बहुत ही सुंदर थी पुरे लोक में उन्हें के जैसा सुंदर कोई नही था| सूर्यदेवता का तेज बहुत अधिक था जिसे लेकर संज्ञा परेशान रहती थी। वह सोचा करती कि किसी तरह तपादि से सूर्यदेव की अग्नि को कम करना होगा| संज्ञा अब भी सूर्यदेव के तेज से घबराती थी|

फिर एक दिन उन्होंने निर्णय लिया कि वे तपस्या कर सूर्यदेव के तेज को कम करेंगी लेकिन बच्चों के पालन और सूर्यदेव को इसकी भनक न लगे इसके लिये उन्होंने एक रास्ता निकला की वो अपने तप से अपनी हमशक्ल को पैदा करेगी और उन्हों ने ऐसा ही किया और उसका नाम संवर्णा रखा। संज्ञा ने बच्चों और सूर्यदेव की जिम्मेदारी अपनी छाया संवर्णा को दी और कहा कि अब से मेरी जगह तुम सूर्यदेव की सेवा और बच्चों का पालन करोगी| लेकिन यह राज सिर्फ मेरे और तुम्हारे बीच ही बना रहना चाहिये। छाया शिव की भक्तिन थी।

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जब शनिदेव छाया के गर्भ में थे तब छाया ने भगवान शिव की बहुत ज्यादा तपस्या कि थी| वे भक्ति में न तो खाती थी न पीती थी उन्हें खाने-पीने की सुध तक न थी| भूख-प्यास, धूप-गर्मी सहने के कारण उसका प्रभाव छाया के गर्भ मे पल रही संतान यानि शनि पर भी पड़ा और उनका रंग काला हो गया। जब शनिदेव का जन्म हुआ तो सूर्य देव ने शनिं का रंग देखकर छाया पर संदेह किया और उन्हें अपमानित करते हुए कह दिया कि यह मेरा पुत्र नहीं हो सकता।

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मां के तप की शक्ति शनिदेव में भी आ गई थी उन्होंने क्रोधित होकर अपने पिता सूर्यदेव को देखा तो सूर्यदेव बिल्कुल काले हो गये| परेशान होकर सूर्यदेव को भगवान शिव की शरण लेनी पड़ी इसके बाद भगवान शिव ने सूर्यदेव को उनकी गलती का अहसास करवाया। सूर्यदेव अपने किये का शर्मिंदा हुए और अपनी गलती के लिये माफ़ी मांगने लगे| लेकिन पिता पुत्र का संबंध जो एक बार खराब हुआ फिर न सुधरा आज भी शनिदेव को अपने पिता सूर्य का विद्रोही माना जाता है।

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शनि दोष अगर आपकी kundli में है तो आज ही जाने इस दोष को ख़त्म करने के उपाय| शनि दोष को शान्त करने के लिए आपको हर शनि वार शनि देव के मंदिर जाना चाइये और पीपल के पेड़ के निचे तिल व् तेल का दिया जलना चाइये| और शनि देव की मूर्ति पर तेल व् तिल चढ़ाना चाइये| और उस ही दिन हनुमान जी व् सूर्य देव के भी दर्शन करना अच्छा होता है ऐसा करने से भगवान शनि ख़ुश होते है और आपका दोष आशानी से कट जाता है|

shani shanti puja benefits शनि शान्ति के उपाय

शनि शांति के लिए आपको हर महीने एक शनि पाठ करना चाइये और यह पाठ शनिवार के दिन ही होता है क्यों की शनिवार को ही शनि देव का दिन होता है इस दिन जो भी व्यक्ति शनि देव को ख़ुश करता है वो उन की कृपा पता है| शनि देव को प्रसन करने के लिए अपने यह उपाय तो करना ही है साथ ही आपको शनि यन्त्र घर लाना है या आप शनि लॉकेट भी ला सकते है| और उससे इस्तमाल करने से पहले आपको उसकी पूजा करनी होगी और साथ साथ वो अभिमंत्रित होने चाइये|

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shani shanti mantra शनि शांति मंत्र

शनि शांति मंत्र और शनिं चालीसा का पता होना बहुत ही जरुरी है यह मन्त्र और चालीसा आपको रोज घर से बहार जाने से पहले पढना है और घर आते ही शनि चालीसा पढना है| और हर शनिवार आपको चालीसा 7 बार पढना है वैसे रोज 1 बार ही पढना है| ऊं नमो अर्हते भगवते श्रीमते मुनिसुव्रत तीर्थंकराय वरूण यक्ष बहुरूपिणी | यक्षी सहिताय ऊं आं क्रों ह्रीं ह्र: शनि महाग्रह मम दुष्‍टग्रह, रोग कष्‍ट निवारणं सर्व शान्तिं च कुरू कुरू हूं फट् |

shani dosh ke lakshan

शनि दोष आपकी kundli में है यह कैसे पता चलता है आइये जानते है जब भी आपके साथ कुछ बुरा हो रहा हो और ख़ास शनिवार के दिन आपका कोई कम नही बन रहा हो तो ध्यान देने वाली बात है आपकी kundli में शनि ग्रह का वाश हो चूका है शनि दोष को जल्दी ही ख़त्म करना जरुरी है वर्ना यह आपका पूरा जीवन नरग बना सकता है| जब भी कोई काम न बन रहा हो, पढाई में मन न लगना, मेहनत के बाद भी सफ़ल न होना, बार बार बीमार होना, घर में लड़ाई होना, आदि

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शनि दोष को शान्त करने के लिए आपको कुछ नियम और उपाय करने होगे जिसमे सब से पहले आपको शनि यन्त्र घर ले कर आना होगा और साथ ही शनि लॉकेट का होना भी जरुरी है| शनिं यंत्र को तो आपने अपने घर पूजा कर के तिजोरी में रखना है उसके बाद अपने लॉकेट को घर के बहार प्रथम गेट पर लटकाना है जिससे आपके घर में जो भी बुरी शक्ति है वो बहार निकल जाए और आपको हर दोष से मुक्ति मिल जाए |

Shani Mangal Dosha

शनि और मंगल ग्रह दोनों की गिनती पाप ग्रहों में होती हैं. ऐसा भी कहा जाता है कि शनि की दृष्टि अगर किसी के जीवन में साढ़े सात साती लग जाए तो उसको बहुत मुश्किल हो जाती है। क्योंकि शनि और मंगल दोनों की गिनती पाप ग्रहों में होती है। कुंडली में इनकी अशुभ स्थिति भाव फल का नाश कर व्यक्ति को परेशानियों में डाल सकती है, वहीं शुभ होने पर वे व्यक्ति को सारे सुख दे डालते हैं।

शनि व मंगल परस्पर शत्रुता रखते हैं। इसीलिए यदि किसी कुंडली में ये दोनों ग्रह साथ-साथ हों, चाहे शुभ भावों के स्थायी क्यों न हो, जीवन को कष्टकार बनाते ही हैं। ये ग्रह जिस भी भाव में साथ-साथ हो (युति में) या सम सप्तम हो (प्रतियुति) भावजन्य फलों की हानि ही करते हैं।

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