Varalakshmi Vratam महिला व् पुरुष करे माँ लक्ष्मी को इस प्रकार प्रशन धन-सम्पति

Varalakshmi Vratam 2018

varalakshmi vratam जीवन को जीने के लिए और सुख शांति के लिए धन, वैभव, संपन्नता, समृद्धि, सुख, संपत्ति और अखंड होना बहुत जरुरी होता है| बिना धना के जीवन की कल्पना भी नही की जा सकती| आज कल धन ही सब कुछ है और धन ही न हो तो गुस्सा आता है कम में मन नही लगता और उसके बाद उससे जुडी समस्या भी होना सुरु हो जाती है| धन, लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए शास्त्रों पुस्तकों में एक व्रत का उल्लेख पढने को मिला। यह व्रत है वरलक्ष्मी व्रत। इसके नाम से ही पता चलता है की यह ख़ास लक्ष्मी प्राप्ति के लिए बताया गया हो| “वरलक्ष्मी “व्रत इस में  “वर” का अर्थ है “वरदान” और “लक्ष्मी” का अर्थ है “धन-वैभव”। जो भी व्यक्ति वरलक्ष्मी व्रत का का व्रत करता है उसके परिवार को समस्त सुख और संपन्नता की प्राप्ति सहज ही हो जाती है।

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Varalakshmi Vratam 2018

वरलक्ष्मी व्रत कथा| Varalakshmi Vratam Vrat Katha

ज्योतिष अनुसार एक बार मगध राज्य में कुंडी नामक एक नगर था। varalakshmi vratam कुंडी नगर का निर्माण स्वर्ग से हुआ था। इस गाव  में एक ब्राह्मणी नारी चारुमति अपने परिवार के साथ रहती थी। चारुमति एक बहुत ही अच्छी नारी थी जो अपने सास, ससुर एवं पति की सेवा और मां लक्ष्मी जी की पूजा-अर्चना कर एक आदर्श नारी का जीवन व्यतीत कर रही थी| एक दिन रात  में चारुमति को मां लक्ष्मी स्वप्न में आकर बोली, चारुमति हर शुक्रवार को मेरे निमित्त मात्र varalakshmi vratam वरलक्ष्मी व्रत को किया करो। इस व्रत के प्रभाव से तुम्हे मनचाहा फल प्राप्त होगा।
वरलक्ष्मी व्रत कथा| Varalakshmi Vratam Vrat Kath

चारुमति ki katha| importance of varalakshmi

अगले सुबह चारुमति ने मां लक्ष्मी द्वारा बताये गए varalakshmi vratam वर लक्ष्मी व्रत को समाज के अन्य नारियों के साथ विधिवत पूजन किया। पूजन के संपन्न होने पर सभी नारियां कलश की परिक्रमा करने लगीं, परिक्रमा करते समय समस्त नारियों के शरीर विभिन्न स्वर्ण आभूषणों से सज गए। उनके घर भी स्वर्ण के बन गए तथा उनके यहां घोड़े, हाथी, गाय आदि पशु भी आ गए। सभी नारियां चारुमति की प्रशंसा करने लगें। क्योंकि चारुमति ने ही उन सबको इस व्रत विधि के बारे में बताई थी। कालांतर में यह कथा भगवान शिव जी ने माता पार्वती को कहा था। इस व्रत को सुनने मात्र से लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

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चारुमति ki katha| importance of varalakshmi

पूजा का मुहूर्त तिथि| Pooja Mahurat 2018

वरलक्ष्मी varalakshmi vratam पूजा का दिन, धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी को समर्पित दिनों में से एक है। वर लक्ष्मी varalakshmi vratam देवी, स्वयं महालक्ष्मी का ही एक रूप हैं।  वरलक्ष्मी व्रत दिनाक 24 august friday को है इस की पूजा स्थिर लग्न में करना शुभ माना जाता है। इस का शुभ महूरत वैसे तो पूरा दिन होता है लेकिन कुछ शुभ काम  करने के लिए कुछ शुभ महूरत होता है अगर वह काम शुभ महूरत में किया जाए तो हमेशा के लिए लाभ की प्राप्ति होती है| लेकिन हम उसके लिए भी आपको राशि के अनुशार बताएगे सुबह 7.13 से 9.21 तक वृश्चिक लग्न: दोपहर 1.39 से 3.53 तक कुंभ लग्न: सायं 7.49 से 9.25 तक वृषभ लग्न: मध्यरात्रि 12.43 से 2.43 तक|

पूजा का मुहूर्त तिथि| Pooja Mahurat 2018

 Varalakshmi vrat vidhi वरलक्ष्मी व्रत

वरलक्ष्मी व्रत varalakshmi vratam राखी और श्रवण पूर्णिमा से  पहले वाले शुक्रवार को किया जाता है। इस साल यह व्रत 24 august friday को मनाया जाएगा| यह व्रत केवल विवाहित महिलाएं ही कर सकती हैं। कुंवारी कन्याओं के लिए यह व्रत करना वर्जित है। परिवार के सुख और संपन्नता के लिए विवाहित पुरुष भी यह व्रत कर सकते हैं। यदि पति-पत्नी दोनों साथ में यह व्रत रखें तो सोने पर सुहागा मतलब दुगना फायदा मिलता है| इस  व्रत को करने से  जीवन के समस्त अभाव दुख कलेश दूर हो जाते हैं। आर्थिक संकट दूर हो जाते हैं और व्रती के जीवन में धन का आगमन आसान हो जाता है। वरलक्ष्मी व्रत varalakshmi vratam से आठ प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं।

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Varalakshmi vrat vidhi वरलक्ष्मी व्रत

कैसे करें पूजा?

हिंदू धर्म में वरलक्ष्मी व्रत varalakshmi vratam को बहुत पवित्र व्रत माना जाता है। लक्ष्मी की उत्पत्ति क्षीरसागर से हुई है। गौर वर्ण की यह देवी दूध के समान श्वेत वस्त्र धारण करती है। मान्यता है कि वरलक्ष्मी व्रत करने से अष्टलक्ष्मी की पूजा के समान फल मिलता है। लक्ष्मी की पूजा ठीक उसी प्रकार की जाती है, जैसे की दीपावली पर लक्ष्मी पूजा किया जाता है। वरलक्ष्मी को विभिन्न प्रकार के सुगंधित पुष्प, मिठाई अर्पित की जाती हैं। यह माना जाता है कि देवी वरलक्ष्मी का रूप वरदान देने वाला होता है और वो अपने भक्तों की सभी इच्छाओं को पूरा करती है। इसलिए देवी के इस रूप को “वर” और “लक्ष्मी” के रूप में जाना जाता है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत शादीशुदा जोड़ों को संतान प्राप्ति का सुख प्रदान करता है।

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कैसे करें पूजा?

कौन रख सकता है ‘वरलक्ष्मी-व्रत’

varalakshmi vratam व्रती को इस दिन प्रातः काल जगना चाहिए, घर की साफ-सफाई कर स्नान-ध्यान से निवृत होकर पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र कर लेना चाहिए। तत्पश्चात ही व्रत का संकल्प करना चाहिए। नारीत्व का व्रत होने के कारण सुहागिन स्त्रियां अति उत्साह से ये व्रत रखती हैं। इस व्रत को करने से व्रती को सुख, सम्पति, वैभव की प्राप्ति होती है। वरलक्ष्मी व्रत को रखने से अष्टलक्ष्मी पूजन के बराबर फल की प्राप्ति होती है। अगर पत्नी के साथ उनके पति भी इस व्रत को रखा जाए तो इसका महत्व कई गुना तक बढ़ जाता है। यह व्रत कर्नाटक तथा तमिलनाडु राज्य में बड़े ही उत्साह से मनाया जाता है।

कौन रख सकता है ‘वरलक्ष्मी-व्रत’

व्रत पूजा की विधि और सामग्री

वरलक्ष्मी व्रत पूजा के लिए आवश्यक वस्तुओं को पहले से एकत्र करना चाहिए। इस सूची में दैनिक पूजा वस्तुओं को शामिल नहीं किया गया है लेकिन यह केवल उन वस्तुओं को सूचीबद्ध करता है जो विशेष रूप से वरलक्ष्मी व्रत पूजा के लिए आवश्यक हैं। देवी लक्ष्मी जी की प्रतिमा फूल माला कुमकुम हल्दी चंदन चूर्ण पाउडर विभूति शीशा कंघी आम पत्र फूल पान के पत्तों पंचामृत दही केला दूध पानी अगरबत्ती मोली धूप कर्पुर छोटा पूजा घंटी प्रसाद तेल दीपक पूजन सामग्री|

ज्योतिष द्वारा साक्षात् माँ लक्ष्मी बस्ती है इसमें घर में रखकर तो देखे 24 घंटे के अंदर दिखता है असर

व्रत पूजा की विधि और सामग्री

पूजा की विधि| pooja vidhi

मां लक्ष्मी की मूर्ति को नए कपड़ों, जेवर और कुमकुम से सजाएं, ऐसा करने के बाद एक गद्दी/ सिंगासन पर गणपति जी की मूर्ति के साथ मां लक्ष्मी की मूर्ति को पूर्व दिशा में स्थित करें और पूजा स्थल पर थोड़ा सा तांदूल फैलाएं। एक कलश में जल भरकर उसे तांदूल पर रखें। तत्पश्चात कलश के चारों तरफ चन्दन लगाएं। कलश के पास पान, सुपारी, सिक्का, आम के पत्ते आदि डालें। तदोपरांत एक नारियल पर चंदन, हल्दी, कुमकुम लगाकर उस कलश पर रखें। एक थाली में लाल वस्त्र, अक्षत, फल, फूल, दूर्वा, दीप, धुप आदि से मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। मां की मूर्ति के समक्ष दीया जलाएं और साथ ही वरलक्ष्मी व्रत की कथा पढ़ें, पूजा समाप्त होने के बाद प्रसाद महिलाओं को बांटें।
पूजा की विधि| pooja vidhi