Somvati amavasya बदल सकती है आपकी किस्मत इस अमावस्या, 22 साल बाद…

Somvati amavasya

Somvati amavasya जो अमावस्या सोमवार को आती है उसे सोमवती अमावस्या कहते है। वैसे तो हर अमावस्या के कुछ न कुछ नियम और फायदे होते है लकिन यह अमावस्या हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखती है. हिन्दू धर्म में इस दिन सुहागिन महिला अपने पति के लिए व्रत रखती है और उन के लिए कुछ न कुछ मांगती है. पुराणों में वर्णित है इस दिन मौन व्रत रहने से सहस्र गोदान का फल प्राप्त होता है. सोमवार को भगवान शिवजी का दिन माना जाता है। इस ही कारण सोमवार को सोमवती अमावस्या पर शिवजी की आराधना, पूजन पाठ किया जाता है. यह व्रत खास उन्हें ही को समर्पित किया जाता है। इसीलिए सुहागन महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना करते हुए पीपल के वृक्ष में शिवजी का वास मानकर उसकी पूजा और परिक्रमा करती हैं।
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जानिए सोमवती अमावस्या सूर्य ग्रहण अद्भुत संयोग हल्दी की एक गांठ जिंदगी में लाएंगी ठाठ

somvati amavasya dates in 2018

सोमवती अमावस्या इस बार इस 16 अप्रैल को है. हर साल यह सोमवार को आती है इसलिए सोमवार को अमावस्य के पड़ने से ये सोमवती अमावस्य के नाम से जानी जाती है. ये अमावस्य साल में केवल एक या दो बार ही आती है. इस साल 16 अप्रैल को पड़ने वाली सोमवती अमावस्या पर खास योग पर बन रहा है. जो की यह योग्य करीब 27 साल बाद आया है. सोमवार को अश्विन नक्षत्र सूर्य और चंद्रमा एक साथ आ रहे है. ऐसा मेल बहुत कम देखने को  और सुनने को मिलता है. इसी के साथ कालसर्प दोष से परेशान लोगों के लिए ये राहत का अवसर साबित हो सकता है.
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somvati amavasya 2018 in hindi

सोमवती अमावस्या पर पुराणों के अनुसार स्नान-दान करने की परंपरा है. इस दिन गंगा-स्नान का विशिष्ट शुभ माना गया है, परंतु जो लोग गंगा स्नान करने नहीं जा पाते, वे किसी भी नदी या सरोवर तट आदि में स्नान कर सकते हैं. या घर में पड़ा गंगा से भी छिडकाव कर सकते है.  और  शिव-पार्वती और तुलसीजी का पूजन कर सोमवती अमावस्या का लाभ उठा सकते हैं।
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Somvati Amavasya Vrat Katha, Vrat Vidhi, Pujan Vidhi, Hindi

अमावस्या के दिन सुबह उठ शुद्ध होने के बाद मंदिर जा कर पूजा करे फर  पीपल के पेड़ की पूजा करे  पूजन से सौभाग्य की वृद्धि होती है।और ऐसा करने के बाद पीपल की परिक्रमा करे और उसके बाद गरीबों को भोजन कराया जाता हैं। इस दिन पितरों को जल देने से उन्हें तृप्ति मिलती है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या पर तीर्थस्थलों पर पिंडदान करने का विशेष महत्व है। सोमवती अमावस्या के दिन 108 बार तुलसी परिक्रमा करें। पुष्प, माला, अक्षत, चंदन, कलश, दीपक, घी, धूप, रोली, भोग, धागा, सिंदूर, चूड़ी/ बिंदी/सुपारी/पान के पत्ते/मूंगफली  सोमवती अमावस्या के दिन सूर्य नारायण को जल देने से दरिद्रता दूर होती है।

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करे इच्छा पूरी अमावस्या की शाम पीपल के नीचे जलाएं एक दिया होगी मुँह मांगी इच्छा पूरी

इस दिन का महत्व somvati amavasya importance in hindi

माना जाता है कि इस दिन तड़के स्नान और फिर सारे दिन पूजा-पाठ और दान-दक्षिणा करने से पुण्यलाभ होता है. आज के दिन पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है इसलिए इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत भी कहा जाता है. गंगा स्नान का सोमवती अमावस्या के रोज विशेष महत्व है. आज के दिन पूजा से स्वास्थ्य और सौभाग्य लाभ होता है. इस दिन विवाहित स्त्रियां पति की लंबी आयु की कामना करती हैं.

इस दिन का महत्व somvati amavasya importance in hindi

कालसर्प दोष और पितृ दोष से मुक्ति somvati amavasya benefits

कालसर्प दोष और पितृ दोष से मुक्ति के लिए सोमवती अमावस्या के दिन किसी ऐसे शिवलिंग पर तांबे या अष्टधातु का नाग लगवाएं जहां अब तक कोई नाग नहीं लगा हुआ है। नाग लगवाने के बाद विधि-विधान से उसकी पूजा करें और महामृत्यंुजय मंत्र का जाप करते हुए कच्चे दूध से अभिषेक करें।लगातार धन की हानि हो रही है। बिजनेस अच्छा नहीं चल रहा है। नौकरी में तरक्की नहीं हो रही है तो सोमवती अमावस्या के दिन शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे आटे के सात दीपक बनाकर उनमें सरसों का तेल भरकर जलाएं। पीपल की 21 पदक्षिणा करें और बिना पीछे देखे चुपचाप घर चले आएं। शीघ्र शुभ समाचार मिलने लगेंगे।
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दांपत्य जीवन में परेशानी आ रही है somvati amavasya ke upay in hindi

दांपत्य जीवन में परेशानी आ रही है। पति-पत्नी में विवाद होते रहते हों, गृह क्लेश बना हुआ है तो पीपल में मीठा दूध अर्पित करें। किसी बगीचे में खुशबूदार फूलों के पौधे लगाएं। इससे आपसी संबंधों में प्रेम बढ़ेगा। घर-परिवार में कोई बीमार चल रहा हो तो सोमवती अमावस्या के दिन रोगी के सिर के उपर से एक नारियल घड़ी की उल्टी दिशा में 21 बार उसारकर बहते जल में प्रवाहित करें। इससे रोगी शीघ्र ठीक होने लगेगा।
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जानिए क्या महत्व है सोमवती अमावस्या का !

सोमवती अमावस्या कथा

एक बार की बात है एक गरीब का ब्रह्मण परिवार था, जिसमे पति, पत्नी के अलावा एक पुत्री भी थी। पुत्री धीरे धीरे बड़ी होने लगी। उस लड़की में समय के साथ सभी स्त्रियोचित गुणों का विकास हो रहा था। लड़की सुन्दर, संस्कारवान एवं गुणवान भी थी, लेकिन गरीब होने के कारण उसका विवाह नहीं हो पा रहा था। एक दिन ब्रह्मण के घर एक साधू पधारे, जो कि कन्या के सेवाभाव से काफी प्रसन्न हुए। कन्या को लम्बी आयु का आशीर्वाद देते हुए साधू ने कहा की कन्या के हथेली में विवाह योग्य रेखा नहीं है।

सोमवती अमावस्या कथा

ब्राह्मण दम्पति ने साधू से उपाय पूछा कि कन्या ऐसा क्या करे की उसके हाथ में विवाह योग बन जाए. साधू ने कुछ देर विचार करने के बाद अपनी अंतर्दृष्टि से ध्यान करके बताया कि कुछ दूरी पर एक गाँव में सोना नाम की धूबी जाती की एक महिला अपने बेटे और बहू के साथ रहती है, जो की बहुत ही आचार- विचार और संस्कार संपन्न तथा पति परायण है. यदि यह कन्या उसकी सेवा करे और वह महिला इसकी शादी में अपने मांग का सिन्दूर लगा दे, उसके बाद इस कन्या का विवाह हो तो इस कन्या का वैधव्य योग मिट सकता है. साधू ने यह भी बताया कि वह महिला कहीं आती जाती नहीं है. यह बात सुनकर ब्रह्मणि ने अपनी बेटी से धोबिन कि सेवा करने कि बात कही.
सोमवती अमावस्या कथा

is somvati amavasya auspicious

कन्या तडके ही उठ कर सोना धोबिन के घर जाकर, सफाई और अन्य सारे करके अपने घर वापस आ जाती. सोना धोबिन अपनी बहू से पूछती है कि तुम तो तडके ही उठकर सारे काम कर लेती हो और पता भी नहीं चलता. बहू ने कहा कि माँजी मैंने तो सोचा कि आप ही सुबह उठकर सारे काम ख़ुद ही ख़तम कर लेती हैं. मैं तो देर से उठती हूँ. इस पर दोनों सास बहू निगरानी करने करने लगी कि कौन है जो तडके ही घर का सारा काम करके चला जाता है. कई दिनों के बाद धोबिन ने देखा कि एक एक कन्या मुँह अंधेरे घर में आती है और सारे काम करने के बाद चली जाती है.

सोमवती अमवस्या की आगे की कहानी

जब वह जाने लगी तो सोना धोबिन उसके पैरों पर गिर पड़ी, पूछने लगी कि आप कौन है और इस तरह छुपकर मेरे घर की चाकरी क्यों करती हैं. तब कन्या ने साधू द्बारा कही गई साड़ी बात बताई. सोना धोबिन पति परायण थी, उसमें तेज था. वह तैयार हो गई. सोना धोबिन के पति थोड़ा अस्वस्थ थे. उसमे अपनी बहू से अपने लौट आने तक घर पर ही रहने को कहा. सोना धोबिन ने जैसे ही अपने मांग का सिन्दूर कन्या की मांग में लगाया, उसके पति गया. उसे इस बात का पता चल गया.

कैसे किया कन्या ने व्रत

वह घर से निराजल ही चली थी, यह सोचकर की रास्ते में कहीं पीपल का पेड़ मिलेगा तो उसे भँवरी देकर और उसकी परिक्रमा करके ही जल ग्रहण करेगी। उस दिन सोमवती अमावस्या थी. ब्रह्मण के घर मिले पूए- पकवान की जगह उसने ईंट के टुकडों से 108 बार भँवरी देकर 108 बार पीपल के पेड़ की परिक्रमा की और उसके बाद जल ग्रहण किया। ऐसा करते ही उसके पति के मुर्दा शरीर में कम्पन होने लगा।

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