Shri Krishna की मृत्यु का अनसुना राज जो अब तक छुपा हुआ था आज आया सामने ..

Shri krishna janam katha in hindi| कृष्ण लीला कथा

भगवन श्री कृष्ण Shri krishna की लीला और कथा का कोई अंत नही है| कोई भी ऐसा मनुष्य नही है जो भगवन श्रीकृष्ण की लीला का वर्णन कर सके लेकिन बहुत से ज्योतिष और भक्त के अनुसार श्रीकृष्ण Shri krishna जैसा सच्चा दोस्त मित्र न तो हुआ है न होगा|  श्रीकृष्ण Shri krishna ने कभी भी अपनी अमिरी पर घमंड नही किया और दूसरी और अपनी मित्रता निभाने में कोई कसर नही छोड़ी|  श्रीकृष्ण Shri krishna के जन्म से ले कर उन के मृत्यु और परमधाम गमन तक की लीला का वर्णन हमारे गुरुदेव दुवारा|
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Shri krishna janam katha in hindi| कृष्ण लीला कथा

Shri krishna leela in hindi| श्री कृष्ण का जीवन परिचय

भगवान Shri krishna ने विशेष रूप से तीन जगह लीला की हैं। जिनमे गोकुल लीला, मथुरा लीला और फिर द्वारिका, श्रीधाम वृन्दावन और कुरुक्षेत्र लीला की थी| कहते है जब जब धरती पर पाप पुण्य से अधिक और राक्षस पैदा होते है जब जब उस का नाश करने के लिए भगवन को मनुष्य के रूप में जन्म लेना पढ़ता है| एक न एक दिन सब को पाप का फाल बरना पढता है|भगवन श्री कृष्ण की लीला का कोई अंत नही है श्रीकृष्ण Shri krishna ने खुद पाप का अंत करने के लिए बच्चे के रूप में जन्म लिया|
Shri krishna leela in hindi| श्री कृष्ण का जीवन परिचय

Lord krishna life story in hindi| कृष्ण जन्म कथा

शास्त्रों के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण Shri krishna का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था| भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को होने के कारण इसको कृष्णजन्माष्टमी कहते हैं. इस दिन वृष राशि में चंद्रमा व सिंह राशि में सूर्य था. इसलिए श्री कृष्ण Shri krishna के जन्म का उत्सव भी इसी काल में ही मनाया जाता है| लोग रातभर भगवन श्री कृष्ण के जन्म पर मंगल गीत गाते हैं और भगवान कृष्ण का जन्मदिन मनाते हैं और व्रत भी रखते है| इस बार कृष्ण अष्टमी 14 अगस्त को सायं 07.45 पर आरम्भ होगी और यह 15 अगस्त को सायं 05.40 पर समाप्त होगी| रात्रि में अष्टमी तिथि 14 अगस्त को होगी. इसलिए इस बार जन्माष्टमी 14 अगस्त को शुभ है|
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Lord krishna life story in hindi| कृष्ण जन्म कथा

Short story of lord krishna in hindi| कृष्ण कथाएं

कहा जाता है जो लोग इस दिन भगवन कृष्ण Shri krishna की सच्चे मन से से पूजा करते है व्रत रखते है अगर उन के संतान नही है तो इस दिन श्रीकृष्ण Shri krishna की पूजा करने से संतान प्राप्ति ,आयु तथा समृद्धि की प्राप्ति भी होती है. श्रीकृष्ण Shri krishna जन्माष्टमी का पर्व मनाकर हर मनोकामना पूरी की जा सकती है| और जिन लोगों का चंद्रमा कमजोर हो वे इस दिन जरुर विशेष रूप से पूजा कर के लाभ पा सकते हैं| पुरानो के अनुसार ,मथुरा में एक राजा था को पुरे मथुरा पर राज करता था ,कंस एक बुरा राक्षस था, जो की प्रजा पर अत्याचार करता रहता था| विरोधियों करना जैसे उसकी आदत बन चुकी थी और यही उसकी फितरत थी|
Short story of lord krishna in hindi| कृष्ण कथाएं

Shree krishan sampurn katha| कृष्ण भगवान की सम्पूर्ण जीवन गाथा|

Shri krishna सत्ता हासिल करने के लिए उसने अपने पिता को बंधी बनाया था| फिर एक बार आकाशवाणी में हुए एक भविष्यवाणी के अनुसार देवकी की आठवीं संतान उसकी मृत्यु का कारण बनने वाली थी इसलिए उसने अपनी बहन जिसे वो बहुत प्रेम करता था, उसे और उसके पति को अपनी कैद में रखा. उसे अपने जीवन से बहुत प्रेम था वो मरना नही चाहता था अजर अमर होना चाहता था लेकिन जब पाप अधिक हो जाता है तो वो वीनस का कारण जरुर बनता है| कंस को अपनी अमरता और शक्ति पर बहुत घमंड था और उस का नाश करने के लिए श्री कृष्ण ने देवकी के बच्चे के रूप में जन्म लिया |
Shree krishan sampurn katha| कृष्ण भगवान की सम्पूर्ण जीवन गाथा|

Story of lord krishna from birth to death in hindi| श्रीकृष्ण की मृत्यु

महाभारत, जो की श्री कृष्ण Shri krishna की पूरी कथा है और इस में युद्ध जो की कौरवों और पांडवों के बीच में हुआ था| जिसने कुरुक्षेत्र की मिट्टी तक लाल कर दिया था| युद के दोरान एक तरफ 100 कौरव भाई और दूसरी तरफ 5 पांडव थे लेकिन कहते है न जहा सचाई होती है वहा इन्शान नही सच कम आता है वही हुआ जब भगवन स्वयं ही पांडव के रक्षक थे| उस ही दोरान कृष्ण से लेकर भीष्म पितामह, द्रोण,शिखंडी आदि. सभी बड़े-बड़े धुरंधरों ने इस युद्ध में भाग लिया। भगवान् श्रीकृष्ण Shri krishna की मृत्यु और द्वारका के नदी में समा जाने की घटना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Story of lord krishna from birth to death in hindi| श्रीकृष्ण की मृत्यु

Shri krishna katha in hindi download

यह घटना कुरुक्षेत्र के युद्ध के 35 साल बाद की है। कृष्ण Shri krishna की द्वारका नगरी बहुत शांत और खुशहाल थी वहा लोगो में प्रेम और इन्सानियता थी सचाई थी और वे सभी भोग-विलास में लिप्त रहते थे।एक बार कृष्ण के पुत्र सांब को एक शरारत सूझी। स्त्री का वेश लेकर वह अपने दोस्तों के साथ ऋषि विश्वामित्र, दुर्वासा, वशिष्ठ और नारद से मिलने गया। वे सभी भगवान् श्रीकृष्ण Shri krishna के साथ एक औपचारिक बैठक में शामिल होने के लिए द्वारका आए थे। स्त्री के वेश में सांब ने ऋषियों से कहा कि वो गर्भवती है। वे उसे ये बताएं कि उसके गर्भ में बच्चे का लिंग क्या है। उनमें से एक ऋषि ने इस खेल को समझ लिया और क्रोधित होकर सांब को श्राप दिया कि वो लोहे के तीर को जन्म देगा, जिससे उनके कुल और साम्राज्य का विनाश होगा।
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भगवान श्रीकृष्ण की मृत्यु कैसे हुई| kaise hue shri krishna ki mrityu

सांब ने ये सारी घटना उग्रसेन को बताई, उग्रसेन ने सांब से कहा कि वे तांबे के तीर का चूर्ण बनाकर प्रभास नदी में प्रवाहित कर दे, इस तरह उन्हें उस श्राप से छुटकारा मिल जाएगा। सांबा ने सब कुछ उग्रसेन के कहे अनुसार ही किया। साथ ही उग्रसेन ने ये भी आदेश दिया कि यादव राज्य में किसी भी प्रकार की नशीली सामग्रियों का ना तो उत्पादन किया जाएगा और ना ही वितरण इस घटना के बाद द्वारका के लोगों ने विभिन्न अशुभ संकेतों का अनुभव किया। सुदर्शन चक्र कृष्ण के शंख, उनके रथ और बलराम के हल का अदृश्य हो जाना, अपराधों और पापों में बढ़ोत्तरी होना, लाज-शर्म जैसी चीजों का समाप्त हो जाना।
भगवान श्रीकृष्ण की मृत्यु कैसे हुई| kaise hue shri krishna ki mrityu

हुआ कुछ ऐसा ..

स्त्रियों द्वारा अपने पतियों और पुरुषों द्वारा अपनी पत्नियों के साथ विश्वासघात करना, आदि बेहद सामान्य घटनाक्रम हो गया था। चारों ओर अपराध, अमानवीयता और पाप का साया था। बुजुर्गों और गुरुओं का असम्मान, निंदा, द्वेष जैसी भावनाओं में उल्लेखनीय बढ़त आदि सब द्वारका के लोगों का जीवन बन गया था। ये सब देखकर भगवान कृष्ण Shri krishna परेशान हो गए और उन्होंने अपनी प्रजा से प्रभास नदी के तट पर जाकर तीर्थ यात्रा कर अपने पापों से मुक्ति पाने को कहा। सभी ने ऐसा ही किया। परंतु जब सभी यादव प्रभास नदी के किनारे पहुंचे तो वहां जाकर सभी मदिरा के नशे में चूर होकर, भोग-विलास में लिप्त हो गए।
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हुआ कुछ ऐसा ..

 कृष्ण  गाथा | krishan story

वे नाचते-गाते और मदिरा का सेवन करते। मदिरा के नशे में चूर सात्याकि कृतवर्मा के पास पहुंचा और अश्वत्थामा को मारने की साजिश रचने और पांडव सेना के सोते हुए सिपाहियों की हत्या करने के लिए उसकी आलोचना करने लगा। वही कृतवर्मा ने भी सात्याकि पर आरोप मढ़ने शुरू कर दिए। बहस बढ़ती गई और इसी दौरान सत्याकि के हाथ से कृतवर्मा की हत्या हो गई। कृतवर्मा की हत्या करने के अपराध में अन्य यादवों ने मिलकर सात्यकि को मौत के घाट उतार दिया। जब कृष्ण को इस बात का पता चला तो वे वहां पर प्रकट हुए और एरका घास को हाथ में उठा लिया।
 कृष्ण  गाथा | krishan story

krishan mratyu

मदिरा के नशे में चूर सभी ने घास को अपने हाथ में उठा लिया और सभी के हाथ में मौजूद वो घास लोहे की छड़ बन गई. जिससे सभी लोग आपस में ही भिड़ गए और एक-दूसरे को मारने लगे.वभ्रु, दारुक और भगवान कृष्ण के अलावा अन्य सभी लोग मारे गए. बलराम इस उपद्रव का हिस्सा नहीं थे इसलिए वो भी बच गए. कुछ समय बाद वभ्रु और बलराम की भी मृत्यु हो गई, जिसके बाद कृष्ण ने दारुक को पांडवों के पास भेजा और कहा कि अर्जुन को सारी घटना बताकर उससे मदद लेकर आए।
krishan mratyu

Shree krishan की मृत्य का क्या कारण था

दारुक इन्द्रप्रस्थ की ओर रवाना हो गया और पीछे से ही श्रीकृष्ण Shri krishna ने अपना देह त्याग दिया. कृष्ण की मृत्यु की घटना प्रभास नदी से ही जुड़ी है जिसमें लोहे की छड़ का चूर्ण बहाया गया था. लोहे की छड़ का चूर्ण एक मछली से निगल लिया और वह उसके पेट में जाकर धातु का एक टुकड़ा बन गया. जीरू नामक शिकारी ने उस मछली को पकड़ा और उसके शरीर से निकले धातु के टुकड़े को नुकीला कर तीर का निर्माण किया। कृष्ण वन में बैठे ध्यान में लीन थे. जीरू को लगा वह कोई हिरण है, उसने कृष्ण पर तीर चला दिया जिससे श्रीकृष्ण की मृत्यु हुई।
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Shree krishan की मृत्य का क्या कारण था

कब हुए मृत्यु ….

कुछ समय बाद अर्जुन मदद लेकर द्वारका पहुंचे और कृष्ण की मृत्यु की खबर पाकर अत्यंत दुखी हो गए. कृष्ण Shri krishna के जाने के बाद द्वारका में उनकी 16000 रानियां, कुछ महिलाएं, वृद्ध और बालक की शेष रह गए, वे सभी इन्द्रप्रस्थ के लिए रवाना होने लगे. परंतु जैसे ही लोग द्वारका छोड़ने के लिए तैयार हुए, जल का स्तर बढ़ने लगा. म्लेच्छ और डाकुओं ने द्वारका पर आक्रमण कर दिया और जब अर्जुन उनकी सहायता करने के लिए अस्त्र चलाने लगे तो वे सभी मंत्र भूल गए, द्वारका नगरी पानी के भीतर समा गई. अर्जुन, श्रीकृष्ण Shri krishna की कुछ रानियों और शेष प्रजा को लेकर इन्द्रप्रस्थ आ गए और वापस आकर सारी घटना युधिष्ठिर को बताई|
कब हुए मृत्यु ....