योगिनी एकादशी व्रत 2018| Yogini Ekadashi History, Pooja vidhi, Importance

योगिनी एकादशी|Yogini Ekadashi 2018

योगिनी एकादशी आषाढ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन योगिनी एकादशी व्रत का किया जाता है. 2017 में यह योगिनी एकादशी व्रत Tuesday, 20th of June को आया था और इस वर्ष यह व्रत 9 जुलाई 2018 को मनाया जाएगा.  इस बड़े शुभ दिन पर विष्णु भगवान जी की पूजा की जाती है. साथ ही इस दिन पीपल के पेड की पूजा करने का बहुत ही बड़ा विधान माना जाता है. लोग इस दिन भगवान विष्णु की पूजा तो करते है लेकिन साथ ही पीपल के पेड़ की भी पूजा की जाती है. आइये जानते है योगिनी एकादशी व्रत से जुडी कुछ और कथाए|
योगिनी एकादशी|Yogini Ekadashi 2018

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Yogini Ekadashi Fast Katha|योगिनी एकादशी व्रत कथा

योगिनी एकादशी व्रत क्यों किया जाता है और इस व्रत की क्या मान्यता है आइये जानते है. अलकापुरी नाम की नगरी में एक कुबेर नाम का राजा रहेता था. और वो उस नगरी में राज करता था. वह भगवान शिव का सबसे बड़ा भक्त था. वह भगवान शिव पर हमेशा ताजे फूल अर्पित किया करता था साथ ही उन्ह की मन से पूजा पाठ किया करता था. उस का एक माली था जो उसे रोज पूजा के लिए पुष्प ला कर देता था. माली अपनी पत्नि के साथ सुख पूर्वक जीवन व्यतीत कर रहा था| एक दिन माली पूजा कार्य में फुल न लग कर, अपनी स्त्री के साथ रमण करने लगा. जब राजा कुबेर को उसका इंतजार करते करते दोपहर हो गई| तो उसने क्रोधपूर्वक अपने सेवकों को माली का पता लगाने के लिए कहा|
Yogini Ekadashi Fast Katha|योगिनी एकादशी व्रत कथा

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सेवक ने मालिक से ऐसा क्या कहा जिस से उन्हें गुस्सा आ गया?

उस के बाद सेवक मालिक के पास जाकर कहने लगे, हे राजन, वह माली अभी तक अपनी स्त्री के साथ रमण कर रहा है. सेवकों की बात सुनकर राजा ने माली को बुलाने की आज्ञा दी. जब माली राजा कुबेर के सम्मुख पहुंचा तो कुबेर ने उसे श्राप दिया कि तू स्त्री का वियोग भोगेगा मृत्यु लोक में जाकर कोढी हो जायेगा. कुबेर के श्राप से वह उसी क्षण स्वर्ग से पृथ्वी लोक पर आ गिरा और कोढी हो गया. स्त्री से बिछुड कर मृ्त्युलोक में आकर उसने महा दुख भोगे|
सेवक ने मालिक से ऐसा क्या कहा जिस से उन्हें गुस्सा आ गया?

माली की शिव ने किस प्रकार मदत की ?

वो शिव जी का सच्चा भक्त था इस लिए उनकी बुद्धि मलीन न हुइ और पिछले जन्म के कर्मों का स्मरण करते हुए. वह हिमालय पर्वत की तरफ चल दिया. वहां पर चलते -चलते उसे एक ऋषि मिले. ऋषि के आश्रम में पहुंच गया. माली ने उन्हें प्रणाम किया और विनय पूर्वक उनसे प्रार्थना की माली की व्यथा सुनकर ऋषि ने कहा की मैं तुम्हारे उद्वार में तुम्हारी सहायता करूंगा. तुम आषाढ मास के कृ्ष्ण पक्ष की योगिनी नामक एकादशी का विधि-पूर्वक व्रत करो इस व्रत को करने से तुम्हारे सभी पाप नष्ट हो जाएंगे. माली ने वचनों की पलना की और योगिनी एकादशी का व्रत किया. व्रत के प्रभाव से वह फिर से अपने पुराने रुप में वापस आ गया और अपनी स्त्री के साथ प्रसन्न पूर्वक रहने लगा|
माली की शिव ने किस प्रकार मदत की

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Moral of the story| शिक्षा शिव शक्ति का

इस लिए कहा जाता है जो इशान अपने जीवन में गलतिया करता है और उसका पच्य्ताप करना चाहता है. उस इन्शान को यह योगिनी एकादशी का व्रत जरुर करना चाइये. इस व्रत को करने से उसके सारे पाप नष्ट हो जाएगे| कभी कभी हमारे जीवन में कुछ बुरा समय आता है. लेकिन हम समझ नही पाते हो सकता है.  वो हमारे पिछले कर्मो की वजह से हो इस लिए अपने पिछले कर्मो के दुख से छुटकारा पाने के लिए यह योगिनी एकादशी का व्रत करना बहुत जरुरी होता है.  और यह व्रत कोई भी कर सकता है. लेकिन इस व्रत को किस प्रकार करना चाइये आइये जानते है|
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Rules for Yogini Ekadashi Fast Puja योगिनी एकादशी व्रत पूजा विधि

श्रीकृष्ण कहने लगे कि हे राजन! आषाढ़ कृष्ण एकादशी का नाम योगिनी है. यह एकादशी व्रत का महत्व तीनों लोकों में प्रसिद्ध है. इस व्रत को करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं चाहे वो पिछले जन्म के हो तथा मुक्ति प्राप्त होती है. यह तीनों लोकों में प्रसिद्ध है. यह इस लोक में भोग और परलोक में मुक्ति देने वाली है. योगिनी एकादशी व्रत एक दिन पहले से इस का एक नियम रात्रि में ही शुरु हो जाता हैं. यह व्रत दशमी तिथि कि रात्रि से शुरु होकर द्वादशी तिथि के प्रात:काल में दान कार्यो के बाद समाप्त होता है. आइये जानते है इस व्रत से जुडी और बाते |
Rules for Yogini Ekadashi Fast Puja योगिनी एकादशी व्रत पूजा विधि

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पूजा विधि | Pooja Vidhi

एकादशी तिथि के दिन प्रात: सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है. स्नान करने के लिये मिट्टी का प्रयोग करना शुभ रहता है. इसके अतिरिक्त स्नान के लिये तिल के लेप का प्रयोग भी किया जा सकता है. स्नान करने के बाद कुम्भ स्थापना की जाती है, कुम्भ के ऊपर श्री विष्णु जी कि प्रतिमा रख कर पूजा की जाती है. और धूप, दीप से पूजन किया जाता है. व्रत की रात्रि में जागरण करना चाहिए. दशमी तिथि की रात्रि से ही व्रती को तामसिक भोजन का त्याग कर देना चाहिए और इसके अतिरिक्त व्रत के दिन नमक युक्त भोजन भी नहीं किया जाता है. इसलिये दशमी तिथि की रात्रि में नमक का सेवन नहीं करना चाहिए|
पूजा विधि | Pooja Vidhi

योगिनी एकादशी व्रत का महत्व | Significance of Yogini Ekadashi

योगिनी एकादशी व्रत में भोजन करवाने का सब से बड़ा विधान है यह मन लीजिये की भोजन न करवाया जाए तो यह व्रत पूरा नही माना जाता| श्रवण का फल 88 अट्ठासी सहस्त्र ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाइये. ऐसा करने से समस्त पाप दूर होते है.और सब से जरुरी बात भगवान नारायण की मूर्ति को स्नान कराकर पुष्प, धूप, दीप से आरती उतारनी चाहिए तथा भोग लगाना चाहिए. इस दिन गरीब ब्राह्माणों को दान देना कल्याणकारी माना जाता है|
योगिनी एकादशी व्रत का महत्व | Significance of Yogini Ekadashi

पूजा करने का सही समय तिथि| How to do Workship?

वैसे तो यह योगिनी एकादशी व्रत पूरा दिन चलता है. लेकिन इस का शुभ समय पूजा समय क्या है, उस का पता होना बहुत ही जरुरी है. हो सकता है , आप में से कई लोगो को ज्ञात होगा पर हम आपको बता देते है. की योगिनी एकादशी व्रत 09 june को प्रात: 05:51 AM से सुरु हो जाएगा और यह 10-Jul-2018 को रात्रि 18:45 PM पर समाप्त हो जाएगा लेकिन व्रत की सुरुवात 08-Jul-2018 23:30 PM से 09-Jul-2018 21:27 PMतक का है. इस के बिच आप पूजा पाठ शिव पूजा कर सकते है|
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