Devshyani Ekadashi देवशयनी एकादशी व्रत नही किया तो आपकी जिन्दगी में होगा

Devshayani Ekadashi 2018

एक बार की बात है एक टाइम था “काल” कलयुग चल रहा था. तब नारद जी ने ब्रह्माजी से पूछा की इस धरती पर इतने पाप हो रहे है इसे कैसे रोका जा सकता है. तब ब्रह्माजी ने नारद जी को कहा हे नारद, तुमने कलियुगी जीवों के उद्धार के लिए बहुत उत्तम प्रशन किया है। क्योंकि देवशयनी एकादशी का व्रत का समय निकट है और यह व्रत सब व्रतों में उत्तम है। इस व्रत से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और जो मनुष्य इस व्रत को नहीं करते वे नरकगामी जीवन व्यतित करते हैं। इस व्रत के करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। फिर ब्रह्माजीने बोला अब मैं तुमसे एक पौराणिक कथा सुनाता हु। तुम ध्यान से मन लगाकर सुनना।
Devshayani Ekadashi 2018

janiye कामिका एकादशी व्रत विष्णु ने किया एक ठाकुर को भयंकर पाप से मुक्त

Hari Shayani Ekadashi katha देवशयानी एकादशी कथा

एक बार की बात है सूर्यवंश में मांधाता नाम का एक चक्रवर्ती राजा रहता था, जो सत्यवादी और महान प्रतापी था। वह अपनी प्रजा का बहुत ध्यान और देखभाल एक पुत्र की भांति किया करता था। उसकी सारी प्रजा धन धान्य से भरपूर और सुखी ख़ुश थी। उसके राज्य में कभी दुख की धडी नहीं आई थी। एक समय ऐसा आया की उस राज्य में तीन वर्ष तक वर्षा नहीं हुई और अकाल पड़ गया। प्रजा अन्न की कमी के कारण अत्यंत दुखी हो गई। अन्न के न होने से राज्य में यज्ञादि भी बंद हो गए। एक दिन प्रजा राजा के पास जाकर कहने लगी कि हे राजा! सारी प्रजा त्राहि-त्राहि पुकार रही है, क्योंकि समस्त विश्व की सृष्टि का कारण वर्षा है।
Hari Shayani Ekadashi katha देवशयानी एकादशी कथा

Devshayani ekadashi Vrat Vidhi in Hindi

वर्षा न होने की वजह से अकाल पड़ गया है और अकाल से की वजह से प्रजा मर रही है। इसलिए हे राजन! कोई ऐसा उपाय बताओ जिससे प्रजा का कष्ट दूर हो। राजा मांधाता कहने लगे कि आप लोग ठीक कह रहे हैं, वर्षा से ही अन्न उत्पन्न होता है और वर्षा न होने के कारण आपको अत्यंत दुःख भोगना पड़ रहा है। मैं आप लोगों के दुखों को समझ सकता हूं। ऐसा कहकर राजा कुछ सेना साथ लेकर वन की तरफ चल दिया। वह अनेक ऋषियों के आश्रम में भ्रमण करता हुआ अंत में ब्रह्माजी के पुत्र अंगिरा ऋषि के आश्रम में पहुंचा। वहां राजा ने अंगिरा ऋषि को प्रणाम कियाऔर अपने दुख का कारण बताया और उन से प्राथना की वो प्रजा का दुःख दूर करे|
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Devshayani Ekadashi Fast story देवशयानी एकादशी स्टोरी

अंगिरा ऋषि ने धर्मराज युधिष्ठिर से बोला – हे केशव! क्या अपने शुक्ल एकादशी का नाम सुना है? क्या आप जानते है इस व्रत के करने की विधि क्या है और किस देवता का पूजन किया जाता है? श्रीकृष्ण कहने लगे कि हे युधिष्ठिर! जिस कथा को ब्रह्माजी ने नारदजी से कहा था वही मैं तुमसे कहता हूं। एक समय नारदजी ने ब्रह्माजी से यही प्रश्न किया था। यह सतयुग सब युगों में उत्तम है। इसमें धर्म को चारों चरण सम्मिलित हैं अर्थात इस युग में धर्म की सबसे अधिक उन्नति है। लोग ब्रह्म की उपासना करते हैं और केवल ब्राह्मणों को ही वेद पढ़ने का अधिकार है। ब्राह्मण ही तपस्या करने का अधिकार रख सकते हैं, परंतु आपके राज्य में एक शूद्र तपस्या कर रहा है। इसी दोष के कारण आपके राज्य में वर्षा नहीं हो रही है।
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ब्राह्मण ने राजा को कहा…जिसे सुन राजा ने इंकार कर दिया.

यदि आप प्रजा का भला चाहते हो तो उस शूद्र का वध कर दो। अगर आपने ऐसा कर दिया तो आपकी प्रजा का कलेयाँ होगा यह सुन कर राजा कहने लगा कि महाराज मैं उस निरपराध तपस्या करने वाले शूद्र को किस तरह मार सकता हूं। आप इस दोष से छूटने का मुझे कोई दूसरा उपाय बताइए। तब ऋषि कहने लगे कि हे राजन! यदि तुम अन्य उपाय जानना चाहते हो तो सुनो। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करने से भी आपकी प्रजा का कलेयाँ होगा। व्रत के प्रभाव से तुम्हारे राज्य में वर्षा होगी और प्रजा सुख प्राप्त करेगी|
ब्राह्मण ने राजा को कहा...जिसे सुन राजा ने इंकार कर दिया.

क्या उपाय बताया ब्राह्मण ने राजा को??

क्योंकि इस एकादशी का व्रत सब सिद्धियों को देने वाला है और समस्त उपद्रवों को नाश करने वाला है। इस एकादशी का व्रत तुम प्रजा, सेवक तथा मंत्रियों सहित करो। इस वचन को सुनकर राजा अपने नगर को वापस आया और उसने विधिपूर्वक पद्मा एकादशी का व्रत किया। उस व्रत के प्रभाव से वर्षा हुई और प्रजा को सुख पहुंचा। अगर आपके जीवन में भी कोई भी समस्या है तो इस मास की एकादशी का व्रत सब मनुष्यों को करना चाहिए। यह व्रत इस लोक में भोग और परलोक में मुक्ति प्रधान करता है| इस कथा को पढ़ने और सुनने से मनुष्य के समस्त पाप नाश को प्राप्त हो जाते हैं। यह व्रत कोई भी कर सकता है चाहे बालक हो या युवा|
क्या उपाय बताया ब्राह्मण ने राजा को??

Devshayani Ekadashi Vrat date व्रत तिथि, उपाय

देवशयनी एकादशी आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाते है. इसी दिन से चातुर्मास की शुरुवात भी होती है. ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से सारी इच्छाओं की पूर्ति होती है एवं भगवान् प्रसन्न होते हैं.इस एकादशी के करने से मनुष्य की सभी कामनायें पूर्ण हो जाती हैं। यह व्रत मनुष्य के सभी पापों को नष्ट करता है.इस व्रत को करनेवाला व्यक्ति परम गति को प्राप्त होता है। इस वर्ष यह व्रत 2018 में देवशयनी एकादशी 23 जुलाई 2018, दिन सोमवार को मनाई जाएगी| आइये जानते है इस दिन किस प्रकार पूजा करनी चाइये और इस का पूजा विधान क्या है|

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Devshayani Ekadashi worship पूजा तरीका

पूजा करने के लिए और भगवान को प्रशन करने के लिए भागती और आस्था की जरूरत होती है और उन का आशीर्वाद पाने के लिए पूजा विधान और सामग्री की भी जरूरत होती है आइये जानते है क्या क्या चीजो की आवश्यकता पढ़ती है श्री विष्णु जी की मूर्ति, वस्त्र(लाल एवं पीला),फूल व् फूल की mala नारियल supari धुप दीपक घी आरती थाली तुलसी दल चंदन कलश आदि|
Devshayani Ekadashi worship पूजा तरीका

देवशयनी एकादशी व्रत विधि | Devshayani Ekadashi Vrat Vidhi

देवशयनी एकादशी व्रत को करने के लिये व्यक्ति को इस व्रत की तैयारी दशमी तिथि की रात्रि से ही करनी चाइये. इस लिए क्यों की दशमी तिथि की रात्रि के भोजन में किसी भी प्रकार का तामसिक प्रवृ्ति का भोजन नहीं होना चाहिए. भोजन में नमक का प्रयोग करने से व्रत के शुभ फलों में कमी होती है. और व्यक्ति को भूमि पर शयन करना चाहिए. और जौ, मांस, गेहूं तथा मूंग की दान का सेवन करने से बचना चाहिए. यह व्रतदशमी तिथि से शुरु होकर द्वादशी तिथि के प्रात:काल तक चलता है. दशमी तिथि और एकाद्शी तिथि दोनों ही तिथियों में सत्य बोलना और दूसरों को दु:ख या अहित होने वाले शब्दों का प्रयोग करने से बचना चाहिए|
देवशयनी एकादशी व्रत विधि | Devshayani Ekadashi Vrat Vidhi

Importance of Hari Shayani Ekadashi देवशयनी एकादशी

इसके अतिरिक्त शास्त्रों में व्रत के जो सामान्य नियम बताये गए है, उनका सख्ती से पालन करना चाहिए.देवशयनी एकादशी तिथि में व्रत करने के लिये सुबह जल्दी उठना चाहिए. नित्यक्रियाओं को करने के बाद, स्नान करना चाहिए. एकादशी तिथि का स्नान अगर किसी तीर्थ स्थान या पवित्र नदी में किया जाता है, तो वह विशेष रुप से शुभ रहता है. किसी कारण वश अगर यह संभव न हो, तो उपवासक इस दिन घर में ही स्नान कर सकता है. स्नान करने के लिये भी मिट्टी, तिल और कुशा का प्रयोग करना चाहिए|
Importance of Hari Shayani Ekadashi देवशयनी एकादशी