Kashi Vishwanath Temple varanasi history, katha,mandir, timing, niyam, pooja vidhi, rahasya

Kashi vishwanath temple Varanasi

Kashi Vishwanath Temple varanasi  पुराणों और ग्रंथों के मुताबिक काशी विश्वनाथ भगवान शिव की सबसे प्रिय नगरी में से एक है। भगवान शिव को भोले नाथ भी कहा जाता है, क्यों की वो अपने भगतो की जल्दी मनोकामना पूरी करते है| भगवन शिव का यह अद्भुत भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग अथवा काशी विश्वनाथ स्तिथ है। ऐसा दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता है, यह दूर दूर से लोग दर्शन के लिए आते है| आइए जानते है काशी विश्वनाथ मंदिर से जुडी रोचक और अनसुनी बातें। Kashi Vishwanath Temple काशी विश्वनाथ temple में ज्योतिर्लिंग दो भागों में विराज मान है। दाहिने भाग में शक्ति के रूप में मां भगवती विराजमान हैं, दूसरी ओर भगवान शिव वाम रूप में विराजमान हैं।

Kashi vishwanath temple Varanasi

Mandir ki Katha-Kashi Vishwanath Temple varanasi

कशी विश्वनाथ मंदिर की कथा ग्रंथो के अनुसार जब भगवान शंकर पार्वती जी से विवाह करने के बाद कैलाश पर्वत रहने लगे| तब पार्वती जी इस बात से नाराज रहेती थी|उन्होंने अपने मन की इच्छा भगवान शिव को बताया|यह बात सुनकर भगवान शिव कैलाश पर्वत को छोड़ कर देवी पार्वती के साथ काशी नगरी में आ गये और वही रहने लगे। तब से ही काशी नगरी में शिव ज्योतिर्लिग के रूप में स्थापित हो गए। इस लिए काशी नगरी में विश्वनाथ ज्योतिर्लिग भगवान शिव का निवास स्थान बन गया। और काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिग किसी मनुष्य की पूजा, तपस्या से प्रकट नहीं हुआ, बल्कि यहां निराकार परमेश्वर ही शिव बनकर विश्वनाथ के रूप में साक्षात प्रकट हुए। जब से ही कशी नगरी को भगवन शंकर के रूप में मान्यता है और शिव ज्योतिर्लिग के दर्शन करने लोग आते है|
Vishwanath Mandir ki Katha

Kashi  Temple Timings

आरती का समय काशी विश्वनाथ Kashi Vishwanath Temple varanasi में आरती पुरे देश बार में प्रसिद्ध है। यहां दिन में 5 बार आरती की जाती है। हर रोज सुबह मंदिर 2.30 बजे खुल जाता है। भक्तों के दर्शन के लिए मंदिर सुबह 4 से 11 बजे तक खुला रहता है|और यधि को दोपहर में आना चाहता है वो 12 से सायं 7 बजे तक मंदिर में पूजा कर सकता है| सायं सात बजे सप्त ऋषि आरती होती है| उसके बाद 9 बजे तक श्रद्धालु मंदिर में आ जा सकते हैं। 9 बजे भोग आरती शुरू की जाती है इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर में प्रवेश वर्जित हैअथवा मंदिर में नही जा सकते|
Kashi  Temple Timings

Kashi Vishwanath Temple वर्णन

मंदिर का विस्तार से वर्णन Kashi Vishwanath Temple varanasi  देवी भगवती के दाहिनी ओर विराजमान होने से मुक्ति का मार्ग केवल काशी में ही खुलता है। यहां मनुष्य को मुक्ति मिलती है और दोबारा गर्भधारण नहीं करना होता है। भगवान शिव खुद यहां तारक मंत्र देकर लोगों को तारते हैं। अकाल मृत्यु से मरा मनुष्य बिना शिव अराधना के मुक्ति नहीं पा सकता।
Kashi Vishwanath Temple वर्णन

Facts about Kashi Vishwanath Temple

क्या है मान्यता-ज्योतिष के अनुसार Kashi Vishwanath Temple varanasi  काशी विश्वनाथ मंदिर हिंदू मंदिरों में बहुत ही पुराने मंदिरों में से एक है। कहते हैं काशी तीनों लोकों में न्यारी नगरी है, जो भगवान शिव के त्रिशूल पर विराजती है। मान्यता है कि जिस जगह ज्योतिर्लिग स्थापित है वह जगह लोप नहीं होती और जस का तस बना रहती है। कहा जाता है कि जो श्रद्धालु इस नगरी में आकर भगवान शिव का पूजन और दर्शन करता है मनत मांगते है और प्राथना करते है की हे प्रभु मेरे सरे समस्त पापों से मुझे मुक्ति दे|
Kashi Vishwanath Temple varanasi

Mandir ka Nirman

इस मंदिर को करीब 3,500 वर्ष से ज्यादा हो गया है| इस मंदिर का निर्माण कब हुआ था यह तो बहुत कम लोग जानते है और इस के बारे मी ग्रंथो में भी नही दिया लिकेन इसके इतिहास से पता चलता है Kashi Vishwanath Temple varanasi  इस पर कई बार हमले किए गए है काशी विश्वनाथ मंदिर हिंदू मंदिरों में अत्यंत प्राचीन है। लेकिन उतनी ही बार इसका निर्माण भी किया गया। कहा जाता है की यह मंदिर हिंदुओं का सबसे पूज्य मंदिर में से एक है| हर वर्ष फाल्गुन शुक्ल एकादशी 23 मार्च को यहां उत्सव का आयोजन किया जाता है|
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 Temple images Kashi Vishwanath Temple varanasi

Vishwanath Jyotirling

कशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर के द्वार के दर्शन करने का समय आ गया है आज हम आपको मंदिर के द्वारो के दर्शन करवाएगे| मंदिर में बहुत से द्वार है लेकिन को सा द्वार कहा खुलता है जानते है| Kashi Vishwanath Temple varanasi मंदिर का मुख्य प्रथम द्वार जो की दक्षिण मुख पर है और शिव जी विश्वनाथ का मुख की ओर है।और मंदिर का मुख्य द्वार है वो दक्षिण से उत्तर की ओर प्रवेश करता है। इसीलिए सबसे पहले भोले भंडारी के अघोर रूप का दर्शन होता है। यहां जो दर्शन करता है उस व्यक्ति के सरे पाप-ताप विनष्ट हो जाते हैं।  मैदागिन क्षेत्र जहां कभी मंदाकिनी नदी और गौदोलिया क्षेत्र जहां गोदावरी नदी बहती थी। इन दोनों के बीच में ज्ञानवापी में शिव जी स्वयं विराजते हैं। मैदागिन-गौदौलिया के बीच में ज्ञानवापी से नीचे है, जो त्रिशूल की तरह ग्राफ पर बनता है।
Kashi Vishwanath Temple varanasi

Pooja Vidhi-Kashi Vishwanath Temple varanasi

Kashi Vishwanath Temple varanasi  पूजा विधि यह मंदिर प्रतिदिन 2.30 बजे भोर में मंगल आरती के लिए खोला जाता है जो सुबह 3 से 4 बजे तक होती है। दर्शनार्थी टिकट लेकर इस आरती में भाग ले सकते हैं। तत्पश्चात 4 बजे से सुबह 11 बजे तक सभी के लिए मंदिर के द्वार खुले होते हैं। 11.30 बजे से दोपहर 12 बजे तक भोग आरती का आयोजन होता है। 12 बजे से शाम के 7 बजे तक पुनः इस मंदिर में सार्वजनिक दर्शन की व्यवस्था है। चढ़ावे में चढ़ा प्रसाद, दूध, कपड़े व अन्य वस्तुएँ गरीबों व जरूरतमंदों में बाँट दी जाती हैं|

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Kashi Vishwanath Temple varanasi

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