Guru purnima 2018 – गुरु पूर्णिमा 2018

What is Guru purnima? Why it is celebrate??

Guru purnima – आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा (Guru purnima) के रूप में पूरे भारत देश में उत्साह के साथ मनाया जाता है| इस दिन गुरु जी की पूजा की जाती है| गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के आरम्भ में आती है। ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं। न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी। इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं। वैसे तो गुरु जी की पूजा हर रोज करनी चाइये और उन की आज्ञा का पालन भी करना चाइये लेकिन जो लोग रोज पूजा अर्चना नही करते उन्हें गुरु पूर्णिमा के दिन जरुर करना चाइये इससे उन्हें हर सुख मिलता है और भगवन भी प्रशन होते है|

Guru purnima rahasya – More information guru purnima :-

इस दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिन भी होता है| वे संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे और उन्होंने चारों वेदों की भी रचना की थी। इस कारण उनका एक नाम वेद व्यास भी है। उन्हें आदिगुरु कहा जाता है और उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा नाम से भी जाना जाता है। भक्तिकाल के संत घीसादास का भी जन्म इसी दिन हुआ था वे कबीरदास के शिष्य थे।

Guru purnima history – गुरु पूर्णिमा रहस्य :-

एक गुरु वह होता हे जिसके बीते हुए कल आपके आने वाले कल के मार्गदर्शक बन सकते है| एक अच्छा गुरु आपको सही राह दिखा सकता हे, मगर एक घटिया गुरु आपको गुमराह कर सकता हे और भटका सकता है| हमेशा अपने गुरु का सम्मान करे और उस से ज्ञान की इच्छा रखें| गुरु ज्ञान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले स्टूडेंट को ज्यादा पसंद करते है|अच्छे गुरु आपकी प्यास नहीं बुझाते, बल्कि आपको प्यासा बनायेंगे|

Story about Guru purnima – गुरु पूर्णिमा कहानी :-

पुराने समय में एक ऐसे राजा की कहानी हे जो किसी ऐसे व्यक्ति का सम्मान करना चाहता था जिसने समाज की उन्नति के लिए सबसे ज्यादा योगदान किया है| हर तरह के लोग जिनमे, डॉक्टर और व्यवसायी भी आये थे, और सबने उस सम्मान को पाने के लिए अपना-अपना दावा पेश किया, मगर राजा उनसे प्रभावित नहीं हुआ |अंत में एक बुजुर्ग इंसान आया जिसके चेहरे पे एक अजीब सी चमक थी उसने खुद को एक शिक्षक बताया. राजा ने उसे झुककर प्रणाम किया और उस शिक्षक को सम्मानित किया, क्योकि समाज के भविष्य को बनाने और संवारने में सबसे बड़ा योगदान शिक्षक का ही होता है|

Meaning of guru purnima – Define guru purnima:

शास्त्रों में गुरु का अर्थ बताया गया है-

अंधकार या मूल अज्ञान और रु का का अर्थ किया गया है- उसका निरोधक। गुरु को गुरु इसलिए कहा जाता है कि वह अज्ञान तिमिर का ज्ञानांजन-शलाका से निवारण कर देता है।अर्थात अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को ‘गुरु’ कहा जाता है।

Guru purnima

Importance  of guru purnima in hindi – क्या है मान्यता

कहा जाता है कि आषाढ़ पूर्णिमा को आदि गुरु वेद व्यास का जन्म हुआ था. उनके सम्मान में ही आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. मगर गूढ़ अर्थों को देखना चाहिए क्योंकि आषाढ़ मास में आने वाली पूर्णिमा तो पता भी नहीं चलती है. आकाश में बादल घिरे हो सकते हैं और बहुत संभव है कि चंद्रमा के दर्शन तक न हो पाएं| चंद्रमा की चंचल किरणों के बिना तो पूर्णिमा का अर्थ ही भला क्या रहेगा. अगर किसी पूर्णिमा का जिक्र होता है तो वह शरद पूर्णिमा का होता है तो फिर शरद की पूर्णिमा को क्यों न श्रेष्ठ माना जाए क्योंकि उस दिन चंद्रमा की पूर्णता मन मोह लेती है. मगर महत्व तो आषाढ़ पूर्णिमा का ही अधिक है क्योंकि इसका विशेष महत्व है|

Guru purnima

गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima in Hindi)

Guru purnima festival in india 2018 हिन्दू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2018 में गुरु पूर्णिमा पर्व या व्यास पूर्णिमा 27 जुलाई को मनाया जाएगा। गुरु के लिए पूर्णिमा से बढ़कर कोई और तिथि हो ही नहीं सकती, क्योंकि गुरु और पूर्णत्व दोनों एक दूसरे के पर्याय हैं। जिस प्रकार चंद्रमा पूर्णिमा की रात सर्वकलाओं से परिपूर्ण हो जाता है और वह अपनी शीतल रश्मियां समभाव से सभी को वितरित करता है। उसी प्रकार सम्पूर्ण ज्ञान से ओत-प्रोत गुरु अपने सभी शिष्यों को अपने ज्ञान प्रकाश से आप्लावित करता है। पूर्णिमा गुरु है। आषाढ़ शिष्य है। बादलों का घनघोर अंधकार। आषाढ़ का मौसम जन्म-जन्मान्तर के लिये कर्मों की परत दर परत। इसमें गुरु चांद की तरह चमकता है और अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है।सिख धर्म केवल एक ईश्वर और अपने दस गुरुओं की वाणी को ही जीवन का वास्तविक सत्य मानता है|

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गुरु पुर्णिमा पर्व का महत्व – guru purnima 2018

जीवन में गुरु और शिक्षक के महत्व को आने वाली पीढ़ी को बताने के लिए यह पर्व आदर्श है. व्यास पूर्णिमा या गुरु पूर्णिमा अंधविश्वास के आधार पर नहीं बल्कि श्रद्धाभाव से मनाना चाहिए| गुरु का आशीर्वाद सबके लिए कल्याणकारी व ज्ञानवर्द्धक होता है, इसलिए इस दिन गुरु पूजन के उपरांत गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए| सिख धर्म में इस पर्व का महत्व अधिक इस कारण है क्योंकि सिख इतिहास में उनके दस गुरुओं का बेहद महत्व रहा है|

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