Dakshinavarti shankh से दूर होती है बीमारिया क्या है इसके और फायदे जानिए !!

Dakshinavarti shankh in hindi – दक्षिणावर्ती शंख

Dakshinavarti shankh :- शंख को हिंदी धर्म में बहुत मानयता दि गई है| जब भी को पूजा या सुभ काम सुरु होता है तो उस की जगतिरी के लिए शंख का प्रयाग किया जाता है| शंक से निकने वाली धवनी अंतरात्मा तक जा कर नकारात्मक सोच को निकल देता है अब जानते है की शंख की उत्पति कैसे हुए| थो  सृष्टि से आत्मा, आत्मा से प्रकाश, प्रकाश से आकाश, आकाश से वायु, वायु से अग्नि, अग्नि से जल और जल से पृथ्वी की उत्पति हुयी है। इन सभी तत्वों से मिलकर शंख का निर्माण हुआ है।  शंख  के बहुत फायदे होते है महाभारत में भी जब कोई शुभ कार्य सुरु व् समाप्त होता है तो  शंख के दुवारा लोगो तक खबर पहुचाते थे | आइये जानते है इस के अनेके फायदे |

Shankh importance – दक्षिणावर्ती शंख के फायदे

वैसे तो कही प्रकार के शंक होते है लेकिन दक्षिणावर्ती शंख Dakshinavarti shankh का स्थान हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है|  क्योकि इस शंख को देवी लक्ष्मी जी का प्रति स्वरूप माना गया है| साथ ही ये धन संपदा, ऐश्वर्य और समृद्धि का भी प्रतिक माना जाता है| इसका पूजन करने वाले व्यक्ति हमेशा सुख में रहता है| उसे कभी भी धन संपदा, ऐश्वर्य और समृद्धि की कमी नही होती| उनका व्यापार सदा सफल और कारोबार में वृद्धि रहती है| और अगर इसमें जल भरकर सूर्य को जल चढ़ाएं तो नेत्रों के रोगों से भी मुक्ति मिलती है| और अगर रात के समय इसमें जल भर कर रखा जाएँ और दिन में उसे घर में छिडका जाएँ तो घर में सुख शान्ति बढती है, सभी परेशानियाँ दूर हो जाती है| पैसो की रूकावट दूर होती है |

Dakshinavarti shankh importance - दक्षिणावर्ती शंख के फायदे

 Shankh Dakshinavarti- दक्षिणावर्ती शंख की कहानी / कथा

भागवत पुराण और ग्रंथो के अनुसार संदीपन ऋषि आश्रम में कृष्ण की शिक्षा पूरी होने पर उन्हे गुरू दक्षिणा लेने का आग्रह किया। तब ऋषि ने कहा समुद्र में डूबे हुये मेरे पुत्र को ले आओ। श्री कृष्ण ने समुद्र तट पर जाकर शंखासुर को मारने से उसका खोल (शंख) शेष रह गया था। उसी से शंख की उतपत्ति हुयी।उसी शंख का नाम पांचजन्य था। वैसे तो शंख कई प्रकार के होते हैं, लेकिन जिस घर में दक्षिणावर्ती शंख Dakshinavarti shankh होता है, और उसे नियमित रूप से इस्तेमाल में लाया जाता है, उस घर से नकारात्म्क ऊर्जा दूर रहती है। हमेशा खुशहाली बनी रहेती है|आइये जानते है और क्या लाभ होते है दक्षिणावर्ती शंख के

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History of Dakshinavarti shankh - दक्षिणावर्ती शंख की कहानी / कथा

Benefits of Dakshinavarti shankh – दक्षिणावर्ती शंख उपाय

यदि कोई बोलने में असमर्थ या किसी भी प्रकार का कोई वाणी दोष है| तो उसे हर रोज शंख बजाना चाइये  उसे शंख बजाने से लाभ मिलता है। शंख बजाने से कई तरह की बिमारिय भी ठीक होती है जैसे फेफेड़े के रोग, दमा, संक्रमण, क्षय, दिल की बीमारी, पेट की बीमारी और आस्थमा आदि रोगों से निजात मिलती है। शंख बजाने से पूरे शरीर में वायु का प्रवाह अच्छे तरीके से होता है, जिससे हमारा शरीर निरोगी हो जाता है। और शंख में जल भरकर रखने के कुछ समय पश्चात उसी जल से पूजन सामग्री धोयें एंव बचे हुये जल को पूरे घर में छिड़कने से घर का वातारण शुद्ध हो जाता है जिससे किसी भी प्रकार की नकारात्मक उर्जा भवन में टिक नहीं पाती है।
Benefits of Dakshinavarti shankh - दक्षिणावर्ती शंख उपाय

Types of shankh- शंख के प्रकार

एक बार दक्षिणावर्ती शंख Dakshinavarti shankh के स्थापित हो जाने के बाद आप रोजाना शंख का नियमित रूप से पूजन और दर्शन करें. अगर कोई शीघ्र फल प्राप्ति की इच्छा रखता है तो उसे स्फटिक की माला के साथ नीचे दिए मंत्र का रोजाना जाप करना है. इस शंख के प्रभाव से जल्द ही घर की दरिद्रता दूर होती है, यश बनता है, कीर्ति में वृद्धि होती है, संतान की प्राप्ति होती है और शत्रु दूर होते है उनका भय खत्म होता है|
Types of shankh- शंख के प्रकार

 दक्षिणावर्ती शंख  : Dakshinavarti shankh

दक्षिणावर्ती शंख Dakshinavarti shankh दाई तरफ से खुला होता है और ये तंत्र विद्या में भी बहुत इस्तेमाल किया जाता है. साथ ही इस शंख का मुख बंद होता है इसीलिए इसे बजाया भी नहीं जा सकता और पूजा के कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है. ये शंख विष्णुप्रिय, पवित्र, शुभ फलदायी और लक्ष्मी सहोदर होता है, ऐसी मान्यता है| कि जिस घर में दक्षिणावर्ती शंख Dakshinavarti shankh की स्थापना होती है| उस घर में श्री समृद्धि सदैव रहती है| अगर घर में किसी को दुस्वप्न आते है तो इस शंख की स्थापना से उन्हें इससे भी मुक्ति मिलती है क्योकि इस शंख की सकारात्मक ऊर्जा घर से ओपरी छाया को भी दूर करता है| इस तरह घर का वातावरण शांत बना रहता है| वहीँ अगर इसे व्यापार स्थल पर रखा जाएँ तो कारोबार में दिन प्रतिदिन उन्नति होती रहती है |

दक्षिणावर्ती शंख

Establishment of Dakshinavarti Shell – दक्षिणवर्ती शंख की स्थापना

  •  दक्षिणावर्ती शंख Dakshinavarti shankh  यह शंख जिस घर में रहता है, वहां लक्ष्मी की वृद्धि होती है। इसका प्रयोग अर्घ्य आदि देने के लिए विशेषत होता है। इसके बजाने के लिए एक छिद्र होता है। इसकी ध्वनि से रोगोत्पादक कीटाणु कमजोर पड़ जाते हैं। दक्षिणावर्ती शंख दो प्रकार के होते हैं नर और मादा। जिसकी परत मोटी हो और भारी हो वह नर और जिसकी परत पतली हो और हल्का हो, वह मादा शंख होता है। दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना यज्ञोपवीत पर करनी चाहिए। शंख का पूजन केसर युक्त चंदन से करें। प्रतिदिन नित्य क्रिया से निवृत्त होकर शंख की धूप-दीप-नैवेद्य-पुष्प से पूजा करें और तुलसी दल चढ़ाएं।

Establishment of Dakshinavarti Shell - दक्षिणवर्ती शंख की स्थापना

Pooja vidhi -पूजा विधि

पूजन करने से मान-सम्मान धन- सम्पत्ति यश व कीर्ति में वृद्धि होती है| हर रोज सुबह जब भी आप पूजा करे उस के बाद यह मंत्र १०८ बार मंत्र का जप करें| और उस के बाद शंक बजा कर उस का आनद ले| यह शुभ कार्य को करने से पहले शुद्धिकरण का होना आवश्यक है तो दक्षिणावर्ती शंख को स्थापित करने से पहले आप शंख का शुद्धिकरण कर लें |  शंख की स्थापना के लिए बुधवार या वीरवार के दिन शुभ मुहूर्त का चयन करें| शंक को पंचामृत, दूध, गंगाजल, धुप दीप, चाँदी का आसन, लाल कपडा  से ही पूजा करे | यह मंत्र का जाप रोज करना  है 

  मंत्र ( Mantra )

 ऊँ ह्रीं श्रीं नम:

श्रीधरकरस्थाय पयोनिधिजातायं लक्ष्मीसहोदराय फलप्रदाय फलप्रदाय

श्री दक्षिणावर्त्त शंखाय श्रीं ह्रीं नम:।

मंत्र ( Mantra )

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