Chintpurni mandir से जुडी कुछ अनसुनी कहानी जो आपको हैरान कर देगी |

Chintpurni Mandir In Una- Himachal Pradesh

Chintpurni mandir – हिमाचल प्रदेश में अनेक प्रसिद्ध धार्मिक स्थान हैं Chintpurni mandir जहां प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इन्हीं धार्मिक स्थानों में से एक है, छिन्नमस्तिका धाम चिंतपूर्णी| इस जिले में चिन्नमस्तिका देवी और छिन्नमस्ता देवी का मंदिर है। प्राचीन काल के मुताबिक,ज्योतिष बताते है और ग्रंथो में भी विधित है| की जब भगवान विष्णु ने माँ सती के जलते हुए शरीर के 51 हिस्से में कर दिया था| तब शिव जी का क्रोध शांत हुआ था। जब भगवान विष्णु ने देवी के शरीर के 51 हिस्से कर दिए थे| उन्हें में से कुछ हिस्से  उपमहाद्वीप जा गिरे थे। ऐसा माना जाता है की इस स्थान पर देवी सती का पैर गिर है| जिस वजह से इस स्थान को भी महत्वपूर्ण 51 शक्ति पीठों में से एक माना जाने लगा। Chintpurni में  एक देवी को छिन्नमस्तिका के नाम से जाना जाता है|
Chintpurni Mandir In Una

Temple in Himachal Pradesh मंदिर से जुड़े कुछ अनसुने राज

ये मंदिर माँ चिंतपूर्णी देवी के नाम से जाना जाता है, जो हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में है। माँ चिंतपूर्णी देवी को माता श्री छिन्नमस्तिका के नाम से भी जाना जाता है। उन पर विशवास करने वाले लोग दूर दूर से मंदिर में माँ के दर्शन के लिए हर साल लको की तदार पर आते है | और वहा आ कर यदि कोई भक्त सच्चे मन से देवी से कुछ मांगता है| तो उसकी इच्छा माँ चिंतपूर्णी पूर्ण कर देती है। जो वहा आ कर व्रत रखता है उस की हर मनोकामना पूरी होती है| कहा जाता है की जहा से जाने के बाद कन्या को भोजन करवाते है उन्हें के घर लक्ष्मी निवास करती है| और उन्हें कभी दुःख नही आने देती| क्यों की कन्या माँ का रूप माना जाता है|
प्रसिद हिमाचल प्रदेश मंदिर के बारे में जानकारी के लिए click here

Temple in Himachal Pradesh

History of Chintpurni temple ज्योतिष और ग्रंथो के अनुसार

ज्योतिष बताते है की एक पंडित माई दास और एक सारस्वत ब्राह्मण, ने छपरा गांव में माता चिंतपूर्णी देवी के इस मंदिर की स्थापना की थी।फिर धिरे धिरे इस स्थान का नाम चिंतपूर्णी रखा गया| उस समय से आज  तक चिंतपूर्णी से जाना जाता है| और भगत चिंतपूर्णी मंदिर में की पूजा करने और मनोकामना पुरनी करने के लिए आते है | श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मेडिकल पोस्ट स्थापित की जाएंगी जो 24 घंटे खुली रहेंगी।यहां प्रति वर्ष नववर्ष, श्रावण अष्टमी, चैत्र व आश्विन के नवरात्र में मेले लगते हैं। इस वर्ष चैत्र नवरात्र मेलों का आयोजन आठ से 15 अप्रैल तक होगा।
History of Chintpurni temple

More Information about Chintpurni Temple 

ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार व्  चिंतपूर्णी चालीसा में लिखा है की माता चिंतपूर्णी चार शिवलिंग में घिरी हुई हैं|  इनमें से एक मंदिर शिववाड़ी जो गग्रेट के पास है बहुत प्रसिद्ध है दूसरा मंदिर कालेश्वर धाम जोकि अम्ब में पड़ता है। सतलुज दरिया बनने के समय यह दो मंदिर अलोप हो गए थे। और यह बात बहुत कम लोगो को पता है| और जो लोग जानते है वो वहा दर्शन करने जरुर जाते है| मान्यता है कि इस स्थान पर सती माता के चरण गिरे थे। पिंडी रूप में मां के दर्शन होते हैं।
 By Chintpurni chalisa

Chintpurni mandir in hindi 

Jyotish ke anusar जो लोग वहा दर्शन करने जाते है|  उन्हें की सारी मोकमाना पूरी होती है| और जो वहा से जाते उन्हें की यात्रा अधूरी मानी जाती है| और एक मंदिर जो है नारायण देव मंदिर ज्वाला जी रोड पर डेरा चौंक से हरिपुर रोड पर कुछ किलोमीटर की दूरी पर कासब मंदिर के नाम से जाना जाता है| चौथा मंदिर मचकूंद महादेव मंदिर ज्वाला जी रोड पर डल्यिरा चौंक से बाएं होकर आगे एक किलोमीटर दूरी पर पुली आती है| पुली से पांच कीलोमीटर की दूरी पर पर है| मान्यता है कि जो भक्त इन चारों मंदिरों के दर्शन करने के उपरांत माता चिंतपूर्णी के दर्शन करेगा बहुत ही जरुरी माना जाता है |

Chintpurni mandir in hindi 

Chintpurni mandir rehsya:-

मंदिर एक बरगद के वृक्ष के नीचे बना हुआ है। मंदिर के चारों तरफ सोने से कवर किया हुआ है| दर्शनों को प्राप्त कर मनुष्य सभी सुखों का भागी बनता है और उसके जीवन में आने वाली सभी चिंताओं का अंत होता है। इस दिन बिलकुल शुद्ध हो कर माँ के दर्शन करना चाइये| अगर व्रत कर के माँ के दर्शन करते है तो माँ और अधिक प्रशन होती है और आपकी हर मनोकामना पूरी होती है|  ज्योतिष के अनुसार मां चिंतपूर्णी के दर्शन करने वाले भक्तों की न केवल चिंताएं समाप्त होती हैं| बल्कि भक्तों के असंभव कार्य भी पलक झपकते ही पूर्ण हो जाते हैं। उन्हें हर पाप से मुक्ति भी मिलती है|

Chintpurni mandir rehsya

Chintpurni Mandir place मंदिर पहुचने का सही मार्ग

ऐसे पहुंचें मां के मंदिर – चिन्तपुरनी मंदिर जाने के लिए चिंतपूर्णी धरातल से लगभग 1 km की ऊँचाई पर पड़ता है| और अगर जिले की बात करे तो यह हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले का हिस्सा है। यहाँ का बहुत ही अच्छा और सरल है जो की  राज्य राजमार्ग का एक हिस्सा है| और पुरे वर्ष अच्छी अवस्था में रहता है। वहा एक बस स्टैंड है| जो मंदिर से 1.5 km की दुरी पर स्थित है| उस से आगे आपको पैदल ही करनी होती है। मां के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु सड़क के अतिरिक्त रेल के माध्यम से भी यहां पहुंच सकते हैं।सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन अम्ब है जो मंदिर से 25 किलोमीटर दूर है|

Chintpurni Mandir place

Chintpurni Mandir Pooja Timing मंदिर का समय, पूजा समय और दर्शन समय

वैसे तो दर्शन करने की कोई माना नही है लेकिन| मंदिर प्रातः 4am बजे से रात्रि 11pm बजे तक खुला रहता है। हजारो की तदार पर लोग दर्शन करने पूजा पाठ करने आते है और मनोकामना मांगते है और कई लोग अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए आते है| इस गर्भगृह में माँ चिंतपूर्णी की छवि लगायी गयी है| जो एक पिंडी के स्वरुप में विराजमान है। माँ के दर्शन करने के लिए भक्त कई घण्टो तक लम्बी कतारों में खड़े रहते है।

poojan samagriy- पूजा सामान

Poojan samagriy- पूजा सामान :-

Chintpurni mandir मंदिर में आने वाले लोग भक्त देवी माँ के लिए मिठाइयां में सूजी का हलवा, लडडू, बर्फी, खीर, पताशा, नारियल , ध्वज लाला रंग का झंडा, फूल और घी आदि लाते है।और माँ को इस का भोग लगाते है| यह सामान या तो आप अपने घर से या बाजार से खरीद सकते है |ऐसा  करने से माँ और भी अधिक प्रशन होती है क्यों की कहा जाता है की अगर कोई शुभ काम करते है तो कुछ मीठा खा कर करना चाइये ऐसे ही मंदिर और माँ का दर्शन करना इस से शुभ काम कोई नही होता इस लिए माँ को मीठे का प्रशाद का भोजन करवाते है और घर जा कर भी मीठाबना चाहिये |

Chintpurni Mandir

more search:-

Mata chintpurni live darshan,
How to reach chintpurni temple?,
Chintpurni temple timings,
Chintpurni temple history in hindi,
How to reach chintpurni temple from chandigarh?,