2018 मोहिनी एकादशी व्रत जानिए कैसे करे मिलेगा फल होगी हर इच्छा पूरी

2018 मोहिनी एकादशी ( Mohini Ekadashi 2018 )

2018 मोहिनी एकादशी mohini ekadashi 2018 हर साल वैशाख मास की एकादशी तिथि को मनाया जाता है| इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है|  वैसे तो यह हर साल आती है और हिन्दू धर्म के अनुसार भगवान विष्णु की पूजा भी की जाती है| लेकिन आज हम आपको बताएगे कुछ नियम और पूजा से जुड़े कुछ अनोखे उपाय जिसे करने से आप जान पाएंगे आनेक फ़ायद|

 2018 मोहिनी एकादशी

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2. Story Mohini Ekadashi  मोहिनी एकादशी कथा :-

इस से जुडी कथा सरस्वती नदी के किनारे भद्रावती नाम का नगर था। वहां धृतिमान नाम का राजा रहता था जो की  वहा  पर राज्य होया करता था। उसी नगर में एक धनपाल रहेता था| वह भगवान विष्णु का परम भक्त था और उनकी हर रोज पूजा करता था और वो सदा अच्छे कम करने में, लोगो की सेवा करने में मगन रहेता था। वो पांच भाई थे |सुमना, द्युतिमान, मेधावी, सुकृत तथा धृष्टबुद्धि। धृष्टबुद्धि सदा पाप व गलत काम करता रहेता था| वो हमेशा अन्याय के मार्ग पर  चलता था और वह अपने पिता का धन बरबाद करते जा रहा था| एक दिन उसके पिता ने तंग आकर उसे घर से निकाल दिया और वह दर-दर भटकने लगा।

2018 मोहिनी एकादशी

भटकते हुए भूख-प्यास से व्याकुल वह महर्षि कौंडिन्य के आश्रम जा पहुंचा और हाथ जोड़ कर बोला कि मुझ पर दया  मझे कोई ऐसा व्रत बताइये, जिसके पुण्य प्रभाव से मेरी मुक्ति हो। और मेरे सारे पाप दुल जाए | तब महर्षि कौंडिन्य ने उसे वैशाख शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी के बारे में बताया। 2018 मोहिनी एकादशी के महत्व को सुनकर धृष्टबुद्धि ने विधिपूर्वक मोहिनी एकादशी का व्रत किया। इस व्रत को करने से वह पाप मुक्त हो गया और दिव्य देह धारण कर गरुड़ पर बैठकर श्री विष्णुधाम को चला गया। इस प्रकार यह मोहिनी एकादशी का व्रत बहुत उत्तम है।

2018 ekadashi

3. Mohini Ekadashi Importance – 2018 मोहिनी एकादशी :-

2018 मोहिनी एकादशी का व्रत अगर इंसान विधि-विधान से करता है उसे वर्षों तक तपस्या के पुण्य प्राप्त होता है| इस व्रत से कई पीढियों द्वारा किए गए पाप भी दूर हो जाते है। इसलिए इस व्रत को जरुर करना चाहिए।2018 मोहिनी एकादशी हिंदू पंचाग के अनुसार वैशाख मास की एकादशी तिथि को मनाया जाता है| इस दिन पूजा-पाठ करने से 
हर मनोकामना भी पूरी होती है| इस दिन ऐसे कोई भी काम नही करना चाइये जिससे आपके द्वारा किए 
गए पुण्य के काम पाप में बदल जाएं। ऐसा करने पर आपके आने वाले जीवन के लिए नुकसानदेय साबित हो सकता है।
कहा जाता है| एकादशी का व्रत करने से लोक और परलोक में सौभाग्य की प्राप्ति होती है|और पापों का नाश होता है
यह बहुत बड़ा व्रत माना जाता है इस व्रत को जो भी करता है उसे 10 हजार सालो की तपस्या के बराबर फलो की प्राप्ति 
होती है| 

एकादशी व्रत करने की विधि व् नियम- Vidhi, Niyam

एकादशी के दिन  प्रात: स्नान करके भगवान को स्मरण करते हुए विधि के साथ पूजा करें और उनकी आरती करे, उन्हें भोग लगाए| इस दिन भगवान नारायण की पूजा करने का भी महत्व होता है। साथ ही अगर आप ब्राह्मणों तथा गरीबों को भोजन करवाते है तो पुण्य मिलता है। यह व्रत बहुत ही जरुरी माना जाता है| इस व्रत को करने से बिगड़े काम बन जाते है | 2018 मोहिनी एकादशी को भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया था। वैसे तो महीने में दो एकादशी आती हैं, एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में। दोनों ही एकादशी महत्वपूर्ण होती हैं। ज्योतिष की मानें तो इस दिन व्रत रखने से हर मनोकामना पूरी होती है| इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान विष्णु को पीले फूल पंचामृत और तुलसी के पत्ते अर्पित करने चाहिए।

Important Point:-( shubh mahurat ) – Mohini Ekadashi 2018 Date

अगर आप इस दिन व्रत रखते है तो गौ दान के बराबर पुण्य मिलता है। इस व्रत में फलाहार ही किया जाता है। एकादशी सुरु होने का शुभ समय 10:46 on 25/Apr/2018 और इसकी समाप्ति का समय 09:19 on 26/Apr/2018 है| Ekadashi Tithi Begins = 10:46 on 25/Apr/2018 Ekadashi Tithi Ends = 09:19 on 26/Apr/2018 On 27th, Parana Time = 06:00 to 08:07 On Parana Day Dwadashi End Moment = 08:07

कैसे करें एकादशी का व्रत.. Ekadashi Importance:-

सभी धर्मों में व्रत-उपवास करने का बहुत महत्व होता है। साथ ही सभी धर्मों के नियम भी अलग-अलग होते हैं। खास कर हिंदू धर्म के अनुसार एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को दशमी के दिन से ही कुछ अनिवार्य नियमों का पालन करना चाहिए। इस दिन मांस, लहसुन, प्याज, मसूर की दाल आदि निषेध वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। रात्रि को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए तथा भोग-विलास से दूर रहना चाहिए।

भूल कर भी न करे यह काम :-

एकादशी के दिन प्रात: लकड़ी का दातुन न करें, नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उंगली से कंठ साफ कर लें, वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी ‍वर्जित है। अत: स्वयं गिरा हुआ पत्ता लेकर सेवन करें। यदि यह संभव न हो तो पानी से बारह बार कुल्ले कर लें। फिर स्नानादि कर मंदिर में जाकर गीता पाठ करें या पुरोहितजी से गीता पाठ का श्रवण करें। एकादशी के दिन घर में झाड़ू नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है। इस दिन बाल नहीं कटवाना चाहिए। न नही अधिक बोलना चाहिए। अधिक बोलने से मुख से न बोलने वाले शब्द भी निकल जाते हैं।

3.2 जरुर करे यह कम :-

फिर प्रभु के सामने इस प्रकार प्रण करना चाहिए कि ‘आज मैं चोर, पाखंडी़ और दुराचारी मनुष्यों से बात नहीं करूंगा और न ही किसी का दिल दुखाऊंगा। रात्रि को जागरण कर कीर्तन करूंगा। इस दिन यथा‍शक्ति दान करना चाहिए। किंतु स्वयं किसी का दिया हुआ अन्न आदि कदापि ग्रहण न करें। दशमी के साथ मिली हुई एकादशी वृद्ध मानी जाती है। वैष्णवों को योग्य द्वादशी मिली हुई एकादशी का व्रत करना चाहिए। त्रयोदशी आने से पूर्व व्रत का पारण करें।

Ekadashi Food:- 

  1.  इस दिन व्यक्ति को गाजर, शलजम, गोभी, पालक, इत्यादि का सेवन नहीं करना चाहिए। बल्कि केला, आम, अंगूर, बादाम, पिस्ता  फलों का सेवन करें। प्रत्येक वस्तु प्रभु को भोग लगाकर तथा तुलसीदल छोड़कर ग्रहण करना चाहिए। द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को मिष्ठान्न, दक्षिणा देना चाहिए| क्रोध नहीं करते हुए मधुर वचन बोलना चाहिए। इस व्रत को करने वाला दिव्य फल प्राप्त करता है और उसके जीवन के सारे कष्‍ट धीरे-धीरे खत्म हो जाते हैं।

2018 मोहिनी एकादशी