कल कार्तिगई दीपम गुड़ का ये उपाय रातो रात आएगा पैसा

05.11.17 मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा व कृतिका नक्षत्र के उपलक्ष में मार्गशीर्ष कार्तिगई दीपम पर्व मनाया जाएगा। हर महीने मनाया जाने वाला कार्तिगई दीपम दक्षणी संस्कृति का सबसे प्राचीन पर्व माना जाता है। कार्तिगई दीपम पर्व की उत्पत्ति का मूल सूर्य का नक्षत्र कृतिका है। ज्योतिषशास्त्र में अग्निदेव को कृतिका नक्षत्र के प्रतीक चिन्ह के रुप में चित्रित किया गया है।

अतः यह नक्षत्र अपने स्वभाव में अग्नि और गुस्से को दर्शाता है। हर माह में जब भी चंद्रमा कृतिका नक्षत्र में विचरण करते हैं तब मासिक कार्तिगई दीपम पर्व मनाया जाता है।

पौराणिक मान्यतानुसार परमेश्वर शिव ने भगवान विष्णु व ब्रह्मदेव को अपनी सर्वोच्चता सिद्ध करने हेतु प्रकाश की एक अंतहीन अग्नि को लौ में खुद को परिवर्तित कर लिया था। इस पर्व में संध्या के समय तेल के दीपों की पंक्तियां घर व शिवालय में सजाई जाती हैं। कार्तिगई दीपम पर्व के विशेष पूजन से पारिवारिक झगड़ों से छुटकारा मिलता है, दांपत्य कलह से मुक्ति मिलती है व विवाद मिटते हैं और संसार सुखी होता है।

विशेष पूजन: शाम के समय शिवलिंग का पंचोपचार पूजन करें। चमेली के तेल का दीपक करें, गूगल धूप करें, लाल फूल चढ़ाएं, सिंदूर चढ़ाएं, गुड़ का भोग लगाएं व लाल चंदन की माला से यह विशिष्ट मंत्र जपें। गुड़ प्रसाद स्वरूप बांट दें।

पूजन मुहूर्त: शाम 18:05 से रात्रि 20:00 तक।

पूजन मंत्र: ह्रीं अलोकाय नमः शिवाय ह्रीं॥

उपाय
सुखी जीवन हेतु शिवलिंग पर बेलफल चढ़ाएं।

दांपत्य कलह से मुक्ति हेतु शिवलिंग पर गुड़ व दही से अभिषेक करें।

पारिवारिक झगड़ों से मुक्ति के लिए शिवलिंग पर चढ़ी मौली घर के मेन गेट पर बांधें।