जानिए क्यों विराजते है नंदी शिवलिंग के सामने !

why nandi sit in front of Lord siva  :

नंदी शिव शंकर के वाहन है और हर शिवलयो में आपने अक्सर देखा होगा शिवजी की मूर्ति के सामने नंदी की मूर्ति भी स्थापित होती है | श्रद्धालु शिवजी भगवान की पूजा के बाद नंदी जी की पूजा करते है, नंदी पवित्रता ,ज्ञान तथा बुद्धि के प्रतीक है | शिवजी के परम भक्त होने के कारण नंदी को शिवजी के गणों में उच्च स्थान प्राप्त है और नंदी हमेशा शिवजी के धुन में रमे रहते है |

पर आखिर नंदी ने भगवान ने शिव को पाया कैसे और कैसे वे उनके वाहन बने :

एक पौराणिक कथा के अनुसार – एक बार शिलाद ऋषि का ब्रह्मचारी वर्त का पालन देखकर उनके पूर्वजो को उनके वंश समाप्त होने की चिंता सताने लगी तो उन्होंने यह चिंता मुनि शिलाद से व्यक्त करी | मुनि शिलाद योग और तप में लीन रहने के कारण गृहस्थाश्रम नही अपनाना चाहते थे इसलिए उन्हें एक बालक गोद लेने की सोची पर वो कोई साधरण बालक नही चाहते थे | उन्हों इंद्र देव का आह्वान किया तथा उनसे एक ऐसे पुत्र की कामना करी जो अमर हो , इंद्र ने इस वरदान के लिए अपनी असर्मथता जताई और उन्हें भगवान शिव के पास जाने के लिए कहा |

why nandi sit in front of Lord siva  :

शिलाद ऋषि अपनी इच्छा लिए शिव के पास गए और उन्हें अपनी इच्छा प्रकट की | तब भगवान शिव ने उन्हें स्वयं उनके पुत्र के रूप में जन्म लेने का वरदान दिया | अगले ही दिन उन्हें खेत कार्य करते समय एक आकर्षक दिखने वाला शिशु मिला, शिलाद ऋषि इस शिशु को अपने साथ आश्रम में ले गए तथा उस शिशु का नाम नंदी रखा | नंदी बचपन से ही बड़े विद्वान थे तथा उनके पिता शिलाद ने उन्हें वेदो का ज्ञान दिया | कुछ सालो बाद शिलाद ऋषि के आश्रम में दो मुनि पधारे और उनका नंदी ने खूब अच्छे से आवभगत किया | दोनों मुनि ने नंदी से प्रस्सन होकर जब उन्हें आशीर्वाद देना चाहा तो उन्हें पता लगा की नंदी तो अल्पायु है ,यह बात उन्होंने शिलाद ऋषि को बताई जिससे शिलाद ऋषि परेशान हो गए |

जब नंदी को यह बात पता चली तो वह हसने लगे और उन्होंने अपने पिता से कहा में आपको शिव के वरदान से प्राप्त हुआ हु और मेरी रक्षा भी वही करेंगे | इतना कहकर नंदी भुवन नदी के किनारे कठोर तप करने लगे , शिव ने नंदी से प्रस्सन होकर उन्हें अमरता का वरदान दिया और अपने वाहन के रूप में कैलाश पर्वत में स्थान दिया |