मृत्यु के पश्चात क्या होता है आत्मा का – जानिए क्या लिखा है गरुड़ पुराण में !

what happens after death – garun puran :

प्राचीन काल में पृथ्वी पर पक्षीराज गरुड़ ने तपश्या द्वारा भगवान विष्णु की आराधना की. तपश्या से प्रसन्न होकर भगवान श्री हरी विष्णु ने गरुड़ को जन्म-मृत्यु से जुड़े रहस्य के बारे में बताया जो गरुड़ पुराण के नाम से प्रसिद्ध हुआ.

गरुड़ पुराण के अनुसार मरने वाले व्यक्ति की मृत्यु से कुछ क्षण पहले आवाज चली जाती है तथा उसे दिव्य दृष्टि की प्राप्ति होती है. समस्त संसार उसे ब्रह्म स्वरूप दिखाई देता है और शरीर हिलने डुलने में असमर्थ हो जाता है. कहा जाता है की पापियो के प्राण निचे गुदा द्वारा निकलते है. मृत्यु के समय यमलोक से अति भयंकर, क्रोध से लाल हुई आँखे तथा हाथ में पाशदंड लिए दो यमदूत आते है. उनके नाख़ून ही उनके अश्त्र होते है. यमराज के इन भयंकर दूतो को देखकर प्राणी भय के मारे वही मलमूत्र त्याग देता है.

इस समय मनुष्य के शरीर से अंगूठा मात्र एक जीव हा हा की ध्वनि के साथ बहार निकलता है. इस सूक्ष्म जीवात्मा को यमदूत अपने पाश में बांधकर यमपुरी में ले जाते है. यमपुरी पहुचने से पूर्व पापात्मा को इन भयंकर 16 प्रकार के गावो से होकर गुजरना पड़ता है. पापात्मा इन सभी गावो के अलग-अलग कष्टो को सहते हुए यमपुरी पहुचता है. इन गांवों के नाम हैं सौम्यपुर, सौरिपुर, गन्धर्वपुर, शैलगाम, क्रौंचपुर, विचित्र भवन, बह्वापदपुर, दुःखपुर, नानाक्रन्दपुर, सुतप्तभवन, रौद्रपुर, पयोवर्षणपुर, शीताढयपुर और बहुभीतिपुर.

मार्ग में चलते समय जब प्रेत आत्मा थक कर रुक जाती है तो उसे यमदूतों द्वारा अग्निपाश से मारा जाता है, उन्हें यमलोक में नरक में मिलने वाली भयंकर यातनाओ के बारे में बताया जाता है जिसे सुनकर पापात्मा रोने लगती है. रास्ते में पापात्मा को भयंकर जानवर काटते है और उन्हें अनेक दुर्गन्धित किच्डो और दलदलों से होकर चलना पड़ता है. पापात्मा को यमपुरी पहुचने में 99 हजार योजन चलना होता है अर्थात 1584000 किलोमीटर.

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यमलोक पहुचने से पूर्व आत्माओ को वैतरणी नदी पार करनी होती है जिसका विस्तार सो योजन है. इस नदी में रक्त और और मवाद बहता है और इसका तट हडियो से भरा होता है. इस नदी के अंदर भयंकर मुह वाले मगरमछ, बड़े दातो वाली मछली और सुई के मुख वाले भयानक कृमि होते है. इस नदी को पार करवाने के लिए एक प्रेत होता है जो आत्मा द्वारा किये गए गोदान के पुण्य के कारण उन्हें वैतरणी नदी पार करवाता है. वैतरणी नदी को पार करने में पुरे 47 दिन का समय लगता है.

जब पापात्मा इन कष्ट भरे मार्गो और नदी को चल यमपुरी पहुचती है तो उसे उसके अच्छे व बुरे कर्मो के अनुसार यमराज निर्णय सुनाते है .गरुड़ पुराण में 28 तरह के मुख्य नरको तथा 86 प्रकार के नरक कुंडो का वर्णन किया गया है अलग अलग कर्मो के अनुरूप पापात्मा को यहाँ सजा मिलती है. इन में से 7 नरक पृथ्वी के निचे है जिनके नाम रौरव, शीतस्तप, कलसुत्र, अप्रतिष्ठित, अवीचि, लोकपृष्ठ और अविचेय है !

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