चार विद्या, जिनको पाने के लिए करना पड़ा हनुमान जी को विवाह !

hanuman marriage story :

भगवान रामभक्त हनुमान hanuman marriage story जिनकी उपासना से हर कष्ट तथा संकट मिट जाते हे ,माना जाता है की हनुमान एक ऐसे देवता हे जो अति शीघ्र अपने भक्त की पूजा से प्रसन्न हो जाते है पर आपको जानकर आश्चर्य होगा की हनुमान जी ब्रह्मचारी होकर भी विवाहित थे |

इस के सबंध में यह कथा है की हनुमान जी ने सूर्य देवता को अपना गुरु बनाया था, हनुमान जी भगवान सूर्य से शिक्षा ग्रहण कर रहे थे क्योकि सूर्य देवता एक जगह स्थिर नही रह सकते तो हनुमान जी को उनके रथ के साथ चलते-चलते शिक्षा ग्रहण करनी पड़ती थी | लेकिन एक धर्मसंकट हनुमान जी के सामने खड़ा हो गया की 9 तरह की विद्यो में 5 तरह की विद्या तो सूर्य देवता से प्राप्त हो गयी थी लेकिन 4 तरह की पाने के लिए हनुमान जी को विवाह करना आवश्यक था क्योकि यह विद्या केवल विवाहित वयक्ति को ही बताई जा सकती थी |

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हनुमान जी पूरी विद्या ग्रहण करने का प्रण कर चुके थे और इस से कम में वो मानने वाले नही थे | उधर सूर्य देवता अपने नियम के अनुसार इन चार विद्याओ को किसी अविवाहित व्यक्ति को प्रदान नही कर सकते थे | ऐसी स्थिति में सूर्य देवता ने हनुमान जी को विवाह करने की सलाह दी तथा अपने प्रण को पूरा करने के लिए हनुमान जी ने विवाह करने के सोची ,पर अब समस्या यह थी की हनुमान जी विवाह के लिए कैसे और किसे वधु बनाये !

ऐसे में सूर्य देवता ने अपनी परम तपस्वी और तेजस्वी पुत्री सुवर्चला को हनुमान जी के साथ शादी करने के लिए तैयार किया | शादी के पश्चात हनुमान जी ने सूर्य देवता से अपनी शिक्षा पूर्ण करी तथा सुवर्चला अपनी तपश्या में सदा के लिए लीन हो गयी | इस तरह हनुमान जी भले ही शादी के बंधन में बंद चुके हो लेकिन शारीरिक रूप से वो अभी भी बर्ह्मचारी ही है | हनुमान जी प्रत्येक स्त्री को अपने माँ के समान देखते है,यही एक कारण भी की हनुमान जी किसी स्त्री को उन्हें प्रणाम करते नही देख सकते, इसलिए यह भी कहा जाता हे की स्त्रियाँ हनुमान जी को प्रणाम नही कर सकती पर अगर वो चाहे तो हनुमान जी की स्तुति कर सकती है |

हनुमान जी के विवाह का गवाह है ये मंदिर