सोमनाथ ज्योतिर्लिंग – भगवान शिव का पहला ज्योतिर्लिंग जहाँ श्रीकृष्ण ने किया था देह त्याग !

Somnath Temple

12 jyotirling, 12 jyotirlinga, 12 jyotirlingas, hindu mythology, hinduism, jyotirling, jyotirlinga, lord shiva, shiva, shiva jyotirlinga, shiva temple, somanath temple, somnath, somnath mandir, somnath temple, somnath trust, stories from hindu mythology, temple

Somnath Temple:

शिव पुराण के अनुसार 12 ज्योतिर्लिंग ( 12 Jyotirling ) में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का प्रथम स्थान है, यह मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह में स्थित है | कहा जाता है की सोमनाथ ( Somnath Temple ) ज्योतिर्लिंग में स्वयं चन्द्रलोक ने शिवलिंग की स्थापना करी थी और पौराणिक कथाओ के अनुसार श्री कृष्ण ( Lord Krishna ) ने यही देह त्यागा था |

Somnath Temple History:

इतिहास ( History Of Somnath Temple ) के अनुसार इस मंदिर में कई बार आक्रमण हुए है | आठवीं सदी में सिन्ध के अरबी गवर्नर जुनायद ने इसे नष्ट करने के लिए अपनी सेना भेजी। प्रतिहार राजा नागभट्ट ने 815 ईस्वी में इसका तीसरी बार पुनर्निर्माण किया । इस मंदिर की महिमा और कीर्ति दूर-दूर तक फैली थी। अरब यात्री अल-बरुनी ने अपने यात्रा वृतान्त में इसका विवरण लिखा जिससे प्रभावित हो महमूद ग़ज़नवी ने सन 1024 में कुछ 5000 साथियों के साथ सोमनाथ मंदिर ( Somnath  Temple ) पर हमला किया, उसकी सम्पत्ति लूटी और उसे नष्ट कर दिया। 50,000 लोग मंदिर के अंदर हाथ जोडकर पूजा अर्चना कर रहे थे, प्रायः सभी कत्ल कर दिये गये ।

इसके बाद गुजरात के राजा भीम और मालवा के राजा भोज ने इसका पुनर्निर्माण कराया. सन 1297 में जब दिल्ली सल्तनत ने गुजरात पर क़ब्ज़ा किया तो इसे पाँचवीं बार गिराया गया। मुगल बादशाह औरंगजेब ने इसे पुनः 1706 में गिरा दिया। इस समय जो मंदिर खड़ा है उसे भारत के गृह मन्त्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने बनवाया और पहली दिसंबर 1995 को भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया.

इस मंदिर का अस्तित्व पुनर्निर्माण का प्रयास और साम्प्रदायिक सदभावना का परिचायक है, यहाँ भूमि के नीचे शिवलिंग ( Shivling Of Somnath Temple ) की स्थापना की गई है. भू-गर्भ में होने के कारण प्रकाश यहाँ मुश्किल से ही पहुचता है और इस मंदिर में भगवान शिव ( Lord Shiva ) के शिवलिंग के आलावा माँ पार्वती ,सरस्वती ,लक्ष्मी ,गंगा और नंदी की मुर्तिया भी विराजमान है.

स्कन्द पुराण के प्रभासखंड में उल्लेख किया है की सोमनाथ ज्योतिर्लिंग ( Somnath Jyotirling ) का हर युग के साथ नाम परिवर्तन होता है. इसी कर्म में जब वर्तमान युग का अंत हो जयेगा तो इस ज्योतिर्लिंग का नाम ”प्राणनाथ” हो जायेगा और सोमनाथ ज्योतिर्लिंग प्रथम ज्योतिर्लिंग ( Jyotirling Of Somnath Temple )  के रूप में कैसे स्थपित हुआ इसके सम्बन्ध में एक रोचक कथा है. दक्ष प्रजापति ने अपनी 27 पुत्रियों का विवाह चन्द्रमा से कर दिया, दक्ष की सभी पुत्रिया चन्द्र देव ( Chandr Dev ) के साथ विवाह से अत्यंत प्रसन्न थी पर विवाह के कुछ दिनों बाद चन्द्र अपनी पत्नी रोहाणी की ओर ज्यादा आकर्षित होने लगे और अपनी अन्य पत्नियों के प्रति उदासीन हो गए | चन्द्र देव की 26 पत्नियॉ चन्द्र देव के इस व्यवहार से दुखी हो गई.

चन्द्र देव के इस बर्ताव के बारे में बताने के लिए वे अपने पिता दक्ष के पास गई, दक्ष ने अपने दामाद चन्द्र देव को समझाया परन्तु फिर भी चन्द्र देव का बर्ताव अपनी अन्य पत्नियों के प्रति उदासीन था. दक्ष ने क्रोध में आकर चन्द्र देव को क्षय रोग का शाप दे दिया | चन्द्र देव इस रोग से ग्रसित हो गए और इसके उपाय के लिए वे अन्य देवताओ के साथ ब्रह्म लोग गए | ब्रह्म देव ( Lord Brahma ) ने चन्द्र देव से शिव की उपासना करने के लिए कहा. चन्द्र देव ने शिव की घोर तपश्या की जिस से प्रस्सन हो शिव ने उन्हें शाप मुक्त किया. तब भगवान शिव बोले – मेरे वर से तुम्हारा शाप-मोचन तो होगा ही, साथ ही साथ प्रजापति दक्ष के वचनों की रक्षा भी हो जाएगी. कृष्णपक्ष में प्रतिदिन तुम्हारी एक-एक कला क्षीण होगी, किंतु पुनः शुक्ल पक्ष में उसी क्रम से तुम्हारी एक-एक कला बढ़ जाया करेगी | इस प्रकार प्रत्येक पूर्णिमा को तुम्हें पूर्ण चंद्रत्व प्राप्त होता रहेगा.

शाप मुक्त होकर चंद्रदेव ने अन्य देवताओं के साथ मिलकर मृत्युंजय ( Mahamrityunjaya ) भगवान्‌ से प्रार्थना की कि आप माता पार्वतीजी के साथ सदा के लिए प्राणों के उद्धारार्थ यहाँ निवास करें | भगवान्‌ शिव उनकी इस प्रार्थना को स्वीकार की तथा उसी जगह शिव भगवान साकार माता पार्वतीजी ( Shiva Parvati ) के साथ लिंग रूप में प्रकट हुए जो आज पुरे संसार में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग ( Somnath Jyotirling )  से प्रसिद्ध है. इस स्थान पर चन्द्र देव भी भगवान शिव के साथ स्थित है.

लोककथाओं के अनुसार इसी क्षेत्र में श्रीकृष्ण ( Shri krishna ) ने इसी स्थान पर देहत्याग किया था। सोमनाथ मंदिर  ( Somnath Temple ) के लगभग १-२ किलोमीटर दूरी पर ही भालका तीर्थ है. ऐसी मान्यता है कि श्रीकृष्ण भालुका तीर्थ पर विश्राम कर रहे थे. तब ही शिकारी ने उनके पैर के तलुए में पद्मचिन्ह को हिरण की आँख जानकर धोखे में तीर मारा था. तब ही कृष्ण ने देह त्यागकर यहीं से वैकुंठ गमन किया। इस स्थान पर बड़ा ही सुन्दर कृष्ण मंदिर भी बना हुआ है.

अब आप बिना Internet अपने फ़ोन पर पंचांग, राशिफल, आरती, चालीसा, व्रत कथा, वेद और पुराणो की कथाएं, हिन्दू धर्म की रीति-रिवाज और प्रमुख एवं अजीबो गरीब मंदिरो की जानकारी प्राप्त कर सकते है ! Click here to download