क्या कारण था शकुनी की धूर्तता के पीछे?

story shakuni in mahabharat :

रामायण कि तरह, महाभारत को भी कई भाषाओं में अलग-अलग रूप में लिखा गया है । यूँ तो शकुनी के अतीत का वर्णन व्यास की महाभारत में नहीं मिलता पर जैन धर्म में यह कथा प्रचलित है ।

कहा जाता है कि एक दिन बालक कौरवों और पांडवों में खेल-खेल में लड़ाई हो रही थे। पांडवों ने कौरवों का अपमान करते हुए उन्हें ‘विधवा के बेटे’ कहा । उनके पिता धृतराष्ट्र अभी भी जिंदा थे तो इस निंदा का कारण समझने के लिए सभी कौरव भीष्म पितामह के पास गए और पांडवों के बारे में शिकायत की।

भीष्म पितामह भौचक्के हो गए और इसलिए इस मामले पर गौर करने का फैसला किया । उन्हें मालूम हुआ कि गांधारी को युवावस्था में शाप दिया गया था कि उसके पहले पति कि मृत्यु हो जायेगी और दूसरे पति की लम्बी उम्र होगी । डर के मारे, गांधारी के पिता ने उसकी शादी एक बकरे से करा दी और उस बकरे की मौत के बाद ही उसकी शादी धृतराष्ट्र से हुई थी ।

वेदों के अनुसार, एक महिला के बच्चे हमेशा पहले पति के ही माने जाते हैं चाहे वे शपथ, अभिशाप, वरदान या किसी अन्य नश्वर से पैदा हुए हों । इसलिए, कौरव एक मृत बकरी के बेटे और एक विधवा के ही पुत्र थे। इस रहस्योद्घाटन से भीष्म पितामह को बहुत गुस्सा आया और इस कपट के लिए, उन्होंने गांधारी के परिवार के प्रत्येक सदस्य को कैद कर लिया । भीष्म पितामह उन सभी को मार डालना चाहते थे ।

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वेदों के अनुसार उन प्राणियों को मारना अपराध है जो खुद का बचाव नहीं कर सकते, इसलिए भीष्म पितामह ने उन्हें बहुत कम खाना देना शुरू कर दिया ताकि वे सभी भूख से मर जाएँ ।

भीष्म पितामह की इस चाल को गांधारी के पिता ने समझ लिया और उन्होंने एक व्यक्ति को बचाने की योजना बनाई जो कौरवों से उनकी निर्दयता का बदला ले सके । तो ये निर्णय लिया गया कि शकुनी, जो गांधारी का सबसे छोटा भाई था और सभी भाई-बहनों में सबसे बुद्धिमान था, उसको बचाया जाए । शकुनी ने अपने परिवार को अपनी आँखों के सामने भूख से मरते देखा था । उसके पिता ने अपने अंतिम समय में शकुनी से कहा था कि यदि वह उनकी हड्डियों से बने पासों के साथ खेलेगा तो कभी हार नहीं सकता ।

शकुनी ने उन पासों की मदद से पांडवों को वनवास भेजा और इस तरह कौरवों के नीचे गिरने का कारण बन गया । खेल को जीतने और महाभारत के युद्ध के पीछे मुख्य कारणों में से एक होने के नाते, शकुनी ने अपने प्रण को पूरा किया और कुरु परिवार से बदला लिया ।

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