सिर पर चोटी रखने का महत्व !

sar pe choti ka reason

sar pe choti ka reason

sar pe choti ka reason :

हिन्दू संस्कृति बहुत ही अद्भुत है, इसमें धरम से संबंधित हर प्रकार की छोटी बड़ी बातो का अपना एक विशेष महत्व है | इसी क्रम में अपने देखा होगा की प्राचीन काल से ब्रह्मणो द्वारा चोटी रखने की परम्परा चली आ रही है|

आखिर क्या हे इस चोटी रखने का महत्व :

सिर में सहस्रार के स्थान पर चोटी रखी जाती हे अर्थात सर के बीचो बीच जहा सुषुम्ना नाड़ी का स्थान होता है जो मनुष्य के हर तरह के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है | इस स्थान के ठीक 2-3 इंच नीचे आत्मा का स्थान होता है | भौतिक विज्ञानं के अनुसार यह हमारे मस्तिक का केंद्र होती है तथा यह शरीर के अंगो ,मन और बुद्धि को नियंत्रित करने का भी स्थान है | चोटी सुषुम्ना नाड़ी को हानिकारक प्रभावों से बचाती है और साथ ही ब्रह्माण्ड से आने वाली सकरात्मक व आध्यात्मिक विचारो को ग्रहण करती है |

यजुर्वेद में शिखा को इंद्रयोनि कहा गया है कर्म, ज्ञान और इच्छा प्रवर्तक ऊर्जा के माध्यम से इंद्रियों को प्राप्त होती है | दूसरे शब्दों में शिखा मनुष्य का एंटेना है, जिस तरह दूरदर्शन या आकाशवाणी में परिक्षेपित तरंगो को पकड़ने के लिए एंटीना का उपयोग किया जाता है ठीक उसी प्रकार ब्रह्माण्डीय ऊर्जा को प्राप्त करने के लिए शिखा का प्रयोग किया जाता है |

चोटी को रखने के ज्योतिष लाभ :

जब किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु नीच का हो या उसे खराब असर दे रहा हो तो उस व्यक्ति को माथे पे तिलक तथा सर पर चोटी रखने की सलाह दी जाती है| आधुनकि दौर में अब लोग सिर पर प्रतीकात्मक रूप से छोटी सी चोटी रख लेते हैं लेकिन इसका वास्तविक रूप यह नहीं है| वास्तव में शिखा का होना चहिये हमारे सिर में बीचोंबीच सहस्राह चक्र होता है जिसका आकार गाय के पैर के खुर के बराबर माना गया है | इसलिए वास्तव में इसका आकार गाय के खुर के बराबर होना चाहिए|

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