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जानिए क्या महत्व है प्रदोष व्रत का !

pradosh vrat vidhi

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pradosh vrat vidhi :

प्रदोष व्रत (pradosh vrat) में भगवान शिव को पूजा जाता है तथा यह व्रत त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है और यह व्रत अति मंगलकारी और शिव की कृपा प्रदान करता है | ऐसी मान्यता है की भगवान शिव कैलाश पर्वत में प्रदोष काल में प्रस्सन मुद्र में निर्त्य करते है, प्रदोष के दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी पापो से मुक्ति मिलती है तथा मोक्ष प्राप्त होता है |

प्रदोष व्रत (pradosh vrat) की पूजा शाम को 4:30 बजे से 7:00 बजे के बीच करनी चाहिए क्योकि यह समय भगवान शिव के आह्वान के लिए शुभ माना जाता है | ऐसी धरणा है की प्रदोष कल में सभी देवी देवता शिव की पूजा में सम्लित होते है अतः शिव की अन्य पूजाओं में प्रदोष पूजा अत्यंत महत्वपूण है | शास्त्रो के अनुसार प्रदोष व्रत रखने से दो गायो के दान के समान पुण्य प्राप्त होता है | अलग -अलग वारो के अनुसार प्रदोष व्रत के अलग -अलग लाभ होते है |

रविवार के दिन प्रदोष व्रत रखने वाले व्यक्ति सदेव निरोगी रहते है, सोमवार को पड़ने वाला व्रत उपवास से संबंधित मनोकामना व्रत को पूर्ण करता है, मंगलवार का व्रत सभी रोगो से मुक्ति दिलाता है और व्यकति को स्वस्थ रखता है , बुधवार के दिन व्रत रखने से व्यक्ति के सभी मनोकामनाओ की पूरी होने क सम्भवना बनती है , गुरु का व्रत शत्रुओ के विनाश के लिए होता है तथा शनि के प्रदोष व्रत (pradosh vrat) रखने से संतान की प्राप्ति होती है | वर्ष 2016 में ये व्रत 6 फ़रवरी , शनिवार को है |

प्रदोष तिथि को किसी भी शिव मंदिर या यदि सम्भव हो या ज्योतिर्लिंग के सामने गंध, अक्षत, सफेद पुष्प, आंकड़े का फूल, धतूरा व सफेद मिठाइयां चढ़ाकर पूजा के बाद धूप व दीप जलाकर इस मंत्र से मनोकामनाएं पूरी करने व सारे कष्ट दूर करने की भगवान शिव से प्राथना करनी चाहिए :-

मंत्र :

शान्तं पद्मासनस्थं शशधरमुकुटं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रं।
शूलं पाशं च खड्गं परसुमभयदं दक्षिणाङ्गे वहन्तम्।
नागं पाशं च घण्टां डमरुसहितं साङ्कशं वामभागे।
नानालंकारयुक्तं स्फटिकमणिनिभं पार्वतीशं नमामि।।

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