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कैसे हुआ भगवान शिव की बहन का जन्म और क्यों हुई माँ पार्वती उनसे परेशान !

shivji sister asavari:

भारतीय समाज में रिश्ते और संबंधो का बहुत बड़ा महत्व होता है. जब हम कोई छोटी या बड़ी खुसी अपने परिवार के साथ बाटते है तो उस खुसी का आनंद दोगुना हो जाता है. परन्तु वर्तमान समय में परिवार छोटे होते जा रहे है. लोग संयुकत परिवार को छोड़ एकल परिवार की और अग्रसर हो रहे है. इसके बावजूद भी वह अपनों से दूर नही हो पाये है क्योकि उन्हें हर छोटे -बड़े पर्व और समाजिक समरोह जोड़े रखते है. इसी तरह इन प्यार और नोक-झोक से भरे रिश्तो से भगवान भी बंधे हुए है.

इस के संबंध एक पौराणिक कथा मिलती है एक बार पार्वती माँ कैलाश पर्वत में बैठी सोच रही थी की वह कैलाश पर्वत में कितना अकेला महसूस कर रही है क्योकि भगवान शिव तो हमेशा ध्यान में मग्न रहते थे ऐसे में अगर माँ पार्वती की ननद होती तो उन्हें कभी भी इस तरह का एकांत नही झेलना पड़ता. पर ऐसा असम्भव नही था क्योकि भगवान शिव अजन्मे थे. इसलिए माँ पार्वती ने अपने मन की बात मन में ही रहने दी. परन्तु भगवान शिव तो अंतर्यामी थे, उन्होंने माँ पार्वती के समस्या अपने योग बल से जान ली.

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तब उन्होंने माँ पार्वती के इस अकेलेपन को दूर करने के लिए अपनी माया से एक देवी उत्पन्न करी जिनका नाम असावरी था. वह देवी बहुत मोटी थी. भगवान शिव ने असावरी देवी को माँ पार्वती से मिलाया, उन्हें देख माँ पार्वती बहुत प्रसन्न हुई. माँ पार्वती अपनी ननद के लिए भोजन ग्रहालय में भोजन बनाने के लिए गई. जब असावरी देवी स्नान कर आई तो माँ पार्वती ने उन्हें भोजन परोस दिया

परन्तु असावरी ने पार्वती के भंडार ग्रह में जो कुछ भी था सब कुछ खा लिया इस तरह महादेव के लिए भी कुछ नही बचा. इसके बाद जब माँ पार्वती ने अपनी ननद को वस्त्र बदलने के लिए अपने वस्त्र दिए तो वो उनके लिए छोटे पड गए. माँ पार्वती उनके नए वस्त्र लाने गयी तो असावरी ने माँ पार्वती को अपने पेरो के दरारों में छुपा दिया जिस से माँ पार्वती का दम घुटने लगा. जब शिव जी ने असावरी से माँ पार्वती के बारे पूछा तो उन्होंने झूठ बोला.इस पर शिवजी ने कहा की कहि ये तुम्हारी बदमाशी तो नही. इस बात पर वह हसने लगी और माँ पार्वती उनके पेरो बाहर आ गिरी. माँ पर्वती क्रोध में शिव जी से बोली ये मेरी गलती थी की मेने ननद के चाह रखी आप इन्हे कैलाश पर्वत से जल्दी विदा करे. तब शिव जी ने असावरी को कैलाश से विदा किया.

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