कनिपक्कम गणपति मंदिर – यहाँ हर रोज बढ़ता है गणपति की मूर्ति का आकार !

Kanipakam Temple

भगवान गणपति के कई चमत्कारो की कथाए आपने पुराणो में सुनी होगी, लेकिन उन का चमत्कार आज भी हम देख सकते है. इन्हीं में एक चमत्कार चित्तूर का कनिपक्कम गणपति मंदिर(Kanipakam Temple)  में हर दिन देखने को मिलता है. भगवान गणेश का यह मंदिर कई कारणों से अपने आप में अनूठा और अद्भुत है.

कहा जाता है की इस मंदिर(Kanipakam Temple) में हर दिन गणेश भगवान की मूर्ति बढ़ती जा रही है और इस बात कर प्रमाण उनका पेट और घुटना है, जो बड़ा आकार लेता जा रहा है. विनायक की एक भक्त श्री लक्ष्माम्मा ने उन्हें एक कवच भेंट किया था, लेकिन प्रतिमा का आकार बढ़ने की वजह से अब उसे पहनाना मुश्किल हो गया है. ये विशाल मंदिर(Kanipakam Temple) नदी के बीचो बीच स्थित है जहाँ विघ्नहर्ता गणेश भगवान अपने सभी भक्तो के पापो को दूर करते है| आस्था एवम चमत्कारों की ढेर सारी कहानियो को समेटे हुए कनिपक्कम विनायक का ये मंदिर आंध्रप्रदेश में चित्तूर जिले में स्थित है.

Kanipakam Temple

Kanipakam Temple Story:

इस मंदिर की कहानी बहुत ही रोमांचक है कथा है – तीन भाई थे एक अँधा ,दूसरा गूंगा तथा तीसरा बहरा था.  तीनो ने अपने जीवन यापन के लिए एक जमीन खरीदी और उसमे खेती करने की सोची| खेत में सिचाई के लिए पानी की आवश्यकता पड़ी इसलिए तीनो ने एक कुए को खोदना शुरू किया जो सुख चूका था | काफी खोदने के बाद थोड़ा पानी निकला जब उन्होंने खोदना जारी रखा तो उसमे एक पत्थर निकला जिस हटाने पर खून के धारा निकलने लगी और धीरे धीरे पूरा कुआ खून के धारा से भरने लगा | तभी अचानक एक चमत्कार हुआ, तीनो भाई जो अंधे ,बहरे तथा गूंगे थे तीनो एकदम सही हो गए | जब ये खबर गाँव तक पहुंची तो सभी लोग इस चमत्कार देखने के लिए वहा पहुंचे | तभी वहां पर सभी को स्वयं भू गणेश जी की मूर्ति दिखाई दी | भगवान गणेश की ये मूर्ति वही स्थापित कर दी गई | इसकी स्थापना 11वीं सदी में चोल राजा कुलोतुंग चोल प्रथम ने की थी | मंदिर(Kanipakam Temple)  का विस्तार 1336 में विजयनगर साम्राज्य में किया गया.

Kanipakam Temple

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