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एक ऐसा पात्र जिसने रामायण में की राम की सहायता और महाभारत में लड़ा श्रीकृष्ण से युद्ध !

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Jamwant in hindi

jamwant पुरे संसार में कुछ ऐसे गिने चुने महापुरषो में से एक है जिन्हे चिरंजीवी का वरदान प्राप्त है अर्थात जो अजर और अमर है। इन्ही चिरंजीवी महापुरुषों में हनुमान जी भी शामिल है जो आज भी कलयुग में विराजमान है। जामवंत ऐसे योद्धा है जिनका वर्णन सतयुग द्वापर और त्रेता तीनो युगो में मिलता है।

jamvant ke janam ki katha

पुराणों में ऐसा माना गया है की जामवंत का जन्म ब्रह्मा जी के द्वारा हुआ था लेकिन जामवंत के जन्म का स्त्रोत बाकि सब पुत्रो से अलग है। एक दिन ध्याम में बैठे बैठे ब्रह्मा जी के आँखों से आंसू गिरने लगे, उन्ही आंसुओ से प्रकट हुए थे उनके पुत्र जामवंत जो की फिर हिमालय पर रहने लगे। जामवंत का शरीर मानव रूपी ना होकर रीछ रुपी था लेकिन वो मानव के जैसे संवाद कर सकते थे। जामवंत ने सागर मंथन में भी वासुकि को देवताओ की तरफ से खिंचा था और जब वामन अवतार रूप में भगवान् ने राजा बलि से तीन पग धरती मांगी थी उस समय भी जामवंत मौजूद थे और उन्होंने वामन अवतार की परिक्रमा भी की थी।

jamvant in ramayan

रामायण में जामवंत का बहुत ज्यादा योगदान था पुराणों में ये वर्णन है की जामवंत में ऐसी अद्भुत सकती थी की वो समुन्द्र को पार कर सकते थे लेकिन उस समय वो वृद्ध अवस्था में थे जिसकी वजह से उन्होंने हनुमान जी का चयन किया

ramayan chopai
जामवंत के बचन सुहाए। सुनि हनुमंत हृदय अति भाए॥
तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई। सहि दु:ख कंद मूल फल खाई॥

भावार्थ
जाम्बवान के सुंदर वचन हनुमान के हृदय को बहुत ही भाए। (वे बोले -) हे भाई! तुम लोग दुःख सहकर, कंद-मूल-फल खाकर तब तक मेरी राह देखना

माना जाता है कि जामवन्तजी आकार-प्रकार में kumbhkaran से तनीक ही छोटे थे। जामवन्त को परम ज्ञानी और अनुभवी माना जाता था। उन्होंने ही हनुमानजी से हिमालय में प्राप्त होने वाली चार दुर्लभ औषधियों का वर्णन किया था जिसमें से एक संजीविनी थी।
मृत संजीवनी चैव विशल्यकरणीमपि।
सुवर्णकरणीं चैव सन्धानी च महौषधीम्‌॥- युद्धकाण्ड 74-33

विशल्यकरणी (शरीर में घुसे अस्त्र निकालने वाली), सन्धानी (घाव भरने वाली), सुवर्णकरणी (त्वचा का रंग ठीक रखने वाली) और मृतसंजीवनी (पुनर्जीवन देने वाली)।

रामायण युद्ध में रावण की सेना के विरुद्ध जामवंत भगवान् राम की सेना के मार्गदर्शक थे लेकिन जब युद्ध खत्म हुआ तो जामवंत ने प्रभु श्री राम से कहा की हे प्रभु – पूरा रामायण युद्ध समाप्त हो गया लेकिन मुझे पसीना तक नहीं आया इसलिए आप मेरे से ऐसे ही युद्ध लड़े ऐसे में प्रभु समज गए की जामवंत को अहंकार हो गया है और श्री राम ने कहा की मैं अगले जन्म में तुमसे युद्ध करूँगा

who played jamwant in ramayan

ramanand sagar ramayan में जामवंत का किरदार एक्टर राजशेखर उपाध्याय ने निभाया था. उन्होंने उस किरदार में अपनी बुलंद आवाज से जान फूंक दी थी. ऐसा बताया जाता है कि राजशेखर उपाध्याय ने रामायण में श्रीधर का किरदार भी अदा किया था. लेकिन दर्शकों के दिल में हमेशा वो जामवंत के रूप में बस गए.

jamvant in ramayan
Jamvant images

Jamwant story

महाबली जामवंत का शुमार उन गिने चुने पौराणिक पात्रों में होता है जो त्रेता युग के रामायण काल में भी उपस्थित थे परन्तु उनकी उपस्थिति महाभारत काल में भी पाई गई | ये तो सभी जानते है की वे भगवान विष्णु के अवतार श्री राम के सहायक थे परन्तु महाभारत काल में उन्होंने भगवान विष्णु के कृष्ण अवतार से युद्ध लड़ा, शायद ही इस प्रसंग के बारे में लोगो ने सुना हो |

jamvant in mahabharat

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार सत्राजित ने भगवान सूर्य की उपासना करी,भगवान सूर्य ने प्रस्सन होकर उन्हें स्यमन्तक नाम की मणि दी | एक दिन जब कृष्ण साथियों के साथ चौसर खेल रहे थे तो सत्राजित स्यमन्तक मणि मस्तक पर धारण किए उनसे भेंट करने पहुंचे | उस मणि को देखकर कृष्ण ने सत्राजित से कहा की तुम्हारे पास जो यह अलौकिक मणि है, इसलिए तुम इस मणि को हमारे राजा उग्रसेन को दे दो |

यह बात सुन सत्राजित बिना कुछ बोले ही वहाँ से उठ कर चले गए | सत्राजित ने स्यमन्तक मणि को अपने घर के मन्दिर में स्थापित कर दिया, वह मणि रोजाना आठ बार सोना देती थी तथा जिस स्थान में वह मणि होती थी वहाँ के सारे कष्ट स्वयं ही दूर हो जाते थे |

एक दिन सत्राजित का भाई प्रसेनजित उस मणि को पहन वन में शिकार करने गया वन में एक सिंह ने उस पर हमला कर उसे मार दिया तथा वह सिंह अपने साथ वह मणि लेकर चले गया उस सिंह को ऋक्षराज जामवंत jamwant ने मारकर वह मणि प्राप्त कर ली और अपनी गुफा में चला गया |

Jamwant ने उस मणि को अपने बालक को खिलोने के रूप में खेलने को दे दिया | उधर द्वारिकापूरी में प्रसेनजित के ना लौटने पर सत्राजित ने सोचा की उसके भाई को श्री कृष्ण ने मारकर उस से मणि छीन ली है | अपने ऊपर लगे इस झुटे कलंक को मिटाने के लिए कृष्ण में प्रसेनजित को ढूढ़ने गए , वन में उन्होंने प्रसेनजित को मारा हुआ पाया तथा कुछ ही दुरी पर जामवंत (jamvant) के गुफा के सामने सिंह का भी मारा हुआ शरीर मिला | जब वे गुफा के अंदर गए तो वह उन्होंने एक बालक को मणि से खेलते हुऐ पाया, उन्होंने उस बालक से वह मणि ले ली |

जब जामवंत ने कृष्ण को देखा तो वे क्रोधित होकर उन पर झपट पड़े और दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ जो 28 दिन तक चला | जब युद्ध में jamwant की नसे टूटने से वे व्याकुल हुए तो वे प्रभु राम जी को याद करने लगे, तब श्री कृष्ण ने उन्हें राम के रूप दर्शन दिए | jamvant ने अपनी गलती के लिए उनसे क्षमा मांगी | तब कृष्ण के कहा मेरे राम अवतार में रावण के मृत्यु के पश्चात तुमने मुझ से युद्ध करने की इच्छा रखी थी, इस कारण मैंने तुमसे इस जन्म में युद्ध लड़ा |

jamwant gufa

आज भी भारत में कई ऐसे स्थान है जिनका प्राचीन काल में जामवंत से संबंध था जिनमे कुछ नगर और कुछ गुफा भी शामिल है तो आइये जानते है..

जामथुन नगरी : माना जाता है कि जामथुन नामक नगरी जामवन्त ने बसाई थी। यह प्राचीन नगरी मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में उत्तर-पूर्व में स्थित है। यहां एक गुफा मिली है जो जामवन्त का निवास स्थान माना जाता है।

बरेली की गुफा : उत्तर प्रदेश के बरेली के पास जामगढ़ में भी एक प्राचीन गुफा है। माना जाता है कि जामवन्तजी यहां हजारों वर्ष रहे थे। बरेली से लगभग सोलह किलोमीटर दूर विंध्याचल की पहाड़ी पर पुराकाल से ही गणेश-जामवन्त की प्रतिमा स्थापित हैं, जिनके बारे में मान्यता है कि जामवन्तजी द्वारा स्थापित यह प्रतिमा प्रतिवर्ष एक तिल के बराबर बढ़ती जा रही है।

जामवन्त तपोगुफा : जम्मू और कश्मीर के जम्मू नगर के पूर्वी छोर पर एक गुफा मंदिर बना हुआ है जिसे जामवन्त की तपोस्थली माना जाता है। इस गुफा में कई पीर-फकीरों और ऋषियों ने ज़्ह तपस्या की है इसलिए इसका नाम ‘पीर खोह्’ भी कहा जाता है। डोगरी भाषा में खोह् का अर्थ गुफा होता है।

पीर खोह् तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु मुहल्ला पीर मिट्ठा के रास्ते गुफा तक जाते हैं। मंद‌िर की दीवारों पर देवी-देवताओं के मनमोहक चित्र उकेरे गए हैं। आंगन में श‌िव मंद‌िर के सामने पीर पूर्णनाथ और पीर स‌िंध‌िया की समाधिंया हैं। जामवन्त गुफा के साथ एक साधना कक्ष का निर्माण किया है जो तवी नदी के तट पर स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।

 

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