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जानिए क्या महत्व है सोमवती अमावस्या का !

importance of somvati amavasya

importance of somvati amavasya:

सोमवती अमावश्या (somvati amavasya)का हिन्दू सनातन धर्म में विशेष धर्मिक महत्व है. सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावश्या तिथि के संयोग को सोमवती अमावश्या कहते है. कहा जाता है की इस दिन किये गये प्रत्येक शुभ कार्य का मनुष्य को अक्षुण्ण फल प्राप्त होता है. इस दिन यदि कोई व्रती मोन व्रत रखता है तो उसे गाय को किये जाने वाले दान के बराबर फल प्राप्त होता है.

मान्यता है की जहाँ सोमवती अमावश्या का वास होता है वहा गंगा पुष्कर सहित विश्व के सभी तीर्थ विध्यमान होते है. इसलिए इस दिन पवित्र नदियों में किया गया स्नान, पूजा-पाठ, हवन जैसे शुभ कामो का विशेष फल प्राप्त होता है. यह दिन विशेषकर भगवान शिवजी का दिन माना जाता है, यह अमावश्या पूर्ण रूप से शिवजी को समर्पित होती है.

भीष्म ने युधिष्ठिर को इस दिन का महत्व समझाते हुए कहा था कि, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य समृद्ध, स्वस्थ्य और सभी दुखों से मुक्त होगा. ऐसा भी माना जाता है कि स्नान करने से पितरों कि आत्माओं को शांति मिलती है. सोमवती अमावश्या के दिन सूर्य नारायण को जल देने से दरिद्रता दूर होती है. जिन लोगो की कुंडली में चन्द्रमा के दोष होता है यदि वे इस दिन गाय को दही व चावल खिलाये तो उन्हें मानशिक शांति प्राप्त होती है.

importance of somvati amavasya :

विवाहित स्त्रियाँ इस दिन अपने पतियों के लम्बी आयु के लिए व्रत रखती है. इस दिन विवाहित स्त्रियाँ पीपल के वृक्ष में दूध जल अक्षत चंदन पुष्प आदि चढ़ाती है व उनकी विधि विधान से पूजा करती है. इसके बाद वह पीपल के वृक्ष का 108 बार धागा लपेटकर परिक्रमा करती है. ऐसा माना जाता है की पीपल के वृक्ष के मूल में विष्णु ,तने में शिवजी तथा अग्रभाग में ब्रह्मा जी निवाश होता है. अतः इस दिन पीपल के पूजन से सौभग्य में वृद्धि होती है. इस दिन पीपल का पूजन करते समय व्रती को सभी देवो का ध्यान करना चाहिए तथा अपने अंदर के काम , क्रोध ,लोभ ,मोह जैसे दुर्गणों को दूर करने की कामना करनी चाहिए. इस दौरान निंम्न मन्त्र की स्तुति करनी चाहिए :

यानि कनि पपानी जन्मांतर वर्तनी च .
तानी सर्वाणि नश्यन्ति प्रदक्षिणे पदे पदे .

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