जानिए क्या है षटतिला एकादशी का महत्व !

importance of shattila ekadashi

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importance of shattila ekadashi :

षटतिला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु का अत्यंत प्रिय और प्रमुख व्रत माना जाता है और यह एकादशी माघ माह में कृष्ण पक्ष पर आती है | इस वर्ष षटतिला एकादशी व्रत 4 फरवरी को है, इस एकादशी के विधान का बखान करते हुए ऋषि पुलस्य ऋषि दुलभ्य को बताते है की माघ का माह बहुत ही पवित्र और पावन है और इस माह में किया गया व्रत और तप दोनो का ही अत्यंत महत्व है|

पौराणिक मान्यताओ के अनुसार यह व्रत नरक से मुक्ति दिलावाता है और मोक्ष प्राप्त करवाता है | संसार में मनुष्य हर पल अनेक कर्मो को करता है ऐसे में उससे जाने अनजाने में पाप कर्म हो ही जाते है | शास्त्रो के अनुसार इन पाप कर्मो से मुक्ति पाने का सर्वोत्तम उपाय है षटतिला एकादशी व्रत है | इस एकादशी व्रत में धन अथवा किसी अन्य वस्तु के किये गए दान की अपेक्षा अन्न का दान सबसे उत्तम माना गया है |

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षटतिला एकादशी के दिन व्रत धारण करने वाले व्यकति को भगवान विष्णु का निमित्त व्रत रखना चहिये | इस एकादशी की व्रत विधि अन्य व्रत विधि से थोड़ा भिन्न है | इस दिन व्रत धारण करने वाले वय्कति को भगवान विष्णो पर दीप,धुप, गंध ,पुष्प ,ताम्बूल ,वस्त्र ,द्रव्य आदि अर्पित करने चाहिए तथा पूरी आस्था के साथ उनका स्मरण करते हुए उन्हें पूजन करना चाहिए | इस दिन तिल का विशेष महत्व होता है | षटतिला एकादशी में तिल का प्रयोग स्नान और उबटन लगाते समय प्रयोग में लाया जाता है साथ ही तिल का मिश्रित जल पिने ,तिल का भोजन करने और तिल से भरा बर्तन का दान करने से पाप कर्मो से मुक्ति मिलती है | इस दिन उड़द और तिल के खिचड़ी का भगवान विष्णु को भोग लगाया जाता है .रात्रि में काले तिल द्वारा हवन करते समय 108 बार निम्न मन्त्र का उच्चारण करना चाहिए |

मन्त्र :- ”ॐ नमः भगवते वासुदेवाय स्वाहा”

षटतिला एकादशी का व्रत रखने वाले व्यकति के सभी मनोकामनाए भगवान विष्णु पूरी करते है और उसके द्वारा किये गए पाप कर्मो से उसे मुक्ति दिलाकर उसे स्वर्ग प्रदान करते है तथा उसकी सभी अज्ञानताओ को दूर करते है |

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