महाभारत में अंक 18 का महत्व

significance of number 108 :

महाभारत एक महान ग्रन्थ तो है ही पर उसके साथ-साथ एक लाजवाब साहित्यिक टुकड़ा भी है । इस पूरे ग्रन्थ में अंक 18 का ख़ास महत्व है ।

महाभारत में कुल 18 पर्व हैं और भगवत गीता में 18 अध्याय हैं । महाभारत के युद्ध में कौरवों कि ओर से 11 अक्षौहिणी सेना और पांडवों की ओर से 7 अक्षौहिणी सेना ने भाग लिया था । इस प्रकार कुल 18 अक्षौहिणी सेना ने ये युद्ध लड़ा जो कि 18 दिन चला था । एक अक्षौहिणी में 21870 रथ , 21870 हाथी, 65610 घोड़े और 109350 पैदल सिपाही होते हैं । इन सबके अंकों को यदि जोड़ा जाए तो सभी का कुल 18 ही आता है ।

इस ग्रन्थ पर अनेक लोगों ने शोध किया है । कुछ लोगों का मानना है कि 18 अंक के चयन के पीछे एक कारण है । अंक 1, एक भगवान का प्रतीक है और 8 प्रतिक है अनंतता का क्यूंकि यदि 8 को 90 डिग्री घुमाया जाए तो वो अनंत बन जाता है ।
शोध में एक बहुत रोचक बात भी सामने निकलके आई । वो ये कि महाभारत ग्रन्थ का वास्तविक नाम था ‘जया’ ।

संस्कृत में हर अक्षर को एक ख़ास अंक निर्धारित है । सभी वर्णों को निर्धारित अंक इस प्रकार हैं:
• क-1, ख-2, ग-3, घ-4, ङ-5, च-6, छ-7, ज-8, झ-9.
• ट-1, ठ-2, ड-3, ढ-4, ण-5, त-6, थ-7, द-8, ध-9.
• प-1, फ-2, ब-3, भ-4, म-5.
• य-1, र-2, ल-3, व-4, श-5, ष-6, स-7, ह-8.
• क्ष -0.

इस प्रकार से ‘जया’ का मूल्य हुआ 81 जो कि 18 का उल्टा है। शीर्षक ‘जया’ का अर्थ है ‘विजय’ लेकिन अंत में विजेता ही सब कुछ खो देते हैं जैसे कि अपने भाई, बच्चे, यहां तक कि राज करने की इच्छा भी । शायद इसी विडंबना को दिखाने के लिए, संख्या 18 पूरे ग्रन्थ में गूँज रहा है।

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