जानिए क्या महत्व है मकर संक्रांति पर्व का ?

makar sankranti

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importance of makar sankranti  :

भारत विभिन्न संस्कृतीयो का संगम है और यहाँ पर अनेक पर्वो का मैला लगा रहता है | ये सभी पर्व अनोखे और निराले होते है,इन्ही में से एक पर्व है मकर सक्रांति, इसे एक बात खास बनती है की यह त्यौहार भारत के अलग – अलग राज्यों में विभिन्न प्रकार के रीती-रिवाजो से बनाई जाती है|

पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है या जब सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है तब इस त्यौहार को मनाया जाता है| मकर सक्रांति के दिन ही सूर्य की उत्तरायण गति प्रारम्भ होती है इसलिए कहीं-कहीं पर इसे उत्तरायणी का त्यौहार भी कहा जाता है|

मकर सक्रांति का पर्व जनवरी में मनाया जाता है | हर चौथे वर्ष पृथ्वी और सूर्य के बीच 20 – 25 मिनट का अंतर आने से यह बढ़ते हुए 82 वर्षो में एक दिन के बराबर हो जाता है|

मकर सक्रांति (makar sankranti ) का पौराणिक कथाओ से सम्बन्ध:

मकर संक्रांति को लेकर अनेक दिलचस्प पौराणिक कथाए है – भगवद गीता के अनुसार उत्तरायण के 6 महीने देवताओ के लिए दिन है और दक्षिणायण के 6 महीने रात्रि | जो व्यक्ति उत्तरायण में शरीर का त्याग करता है उसे मुक्ति प्राप्त होती है और कृष्ण लोक मैं स्थान प्राप्त होता है और जो दक्षिणायण में प्राण त्यागता है उसे पुन: जन्म लेना पड़ता है|

कहा जाता है की महाभारत में भीष्म पितामह उत्तरायणी के दिन तक , 6 माह बाणों की शैया में लेटे रहे तथा उत्तरायणी के दिन उन्होंने अपने प्राण त्यागे थे| उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान था |

एक और मान्यता मकर सक्रांति को लेकर प्रचलित है की महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजो के तर्पण के लीये माँ गंगा को सवर्ग से पृथ्वी में लेकर आये थे .उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद गंगा समुद्र में जा कर मिल गयी .इसलिए मकर संक्रांति पर गंगा सागर में मेला लगता है।

मकर सक्रांति (makar sankranti )के विभिन्न रूप :
आंध्र,केरला तथा कर्नाटका में इस त्यौहार को संक्रांति कहते है तथा तमिलनाडु में इसे पोंगल कहते है .मिथलांचल में तिल का भोग लगाने , सेवन करने तथा दान देने की परम्परा होने से इस त्यौहार को तिल-सक्रांति का नाम मिला. उत्तर भारत में कई राज्यों में इस त्यौहार के दिन खिचड़ी चढ़ाने की परम्परा होने के कारण इस का एक नाम वहा खिचड़ी भी है |

मकर सक्रांति( makar sankranti ) व कुम्भ का मेला:
मकर संक्रांति पर्व पर देश भर में मेले भी लगते हैं और तीर्थ स्थलों पर गंगा स्नान को श्रद्धालु पहुंचते हैं| मकर संक्रांति के मौके पर इलाहाबाद में प्रसिद्ध महाकुंभ मेला लगता है | प्रयाग इलाहाबाद में गंगा के किनारे पूरे 144 वर्ष के बाद महाकुंभ मेले का आयोजन होता है . कुंभ का मेला प्रत्येक 12 वर्ष में आता है. इस तरह प्रत्येक 12 कुंभ पूरा होने के उपरांत एक महाकुंभ का आयोजन होता है जो 144 वर्ष के बाद आता है और वो प्रयाग में ही संपन्न होता है |