क्या आप जानते है कि शिवजी के कितने पुत्र थे ?

How many children did Lord Shiva have

How many children did Lord Shiva have

How many children did Lord Shiva have :

भगवान शिव भोलेनाथ हमेसा अपने भक्तो पर कृपा बनाये रखते है, भगवान शिव के साथ साथ उनके पुत्र कार्तिकेय और गणेश भी देवो में पूजनीय है पर क्या आप जानते है की इन दोनों के आलावा भी शिव के चार अन्य पुत्र है .. इस प्रकार शिव के दो नही वरन 6 पुत्र थे | आइये जानते है कैसे हुआ शिवजी के इन 6 पुत्रो का जन्म ;-

गणेश :- गणेश की उत्तपति पार्वती जी ने चन्दन से की थी ,एक बार गणेश का द्वार पर बिठा कर पार्वतीजी स्नान कर रही थी .इतने में शिव भवन में प्रवेश करने लगे .जब गणेश ने उन्हें रोक तो क्रोध में शिव ने गणेश का सिर काट दिया .जब पार्वती ने देखा की उनके पुत्र का सिर काट दिया है तो वे क्रोधित हो गई | उन्हें शांत करने के लिए शिवजी ने गणेश के सिर के स्थान पर एक हाथी का सिर लगा दिया. और वे फिर से जीवित हो उठे |

कार्तिकेय :- जब शिव शती के आग में भस्म होने कारण दुःख से तपस्या में लीन हो गए थे तब धरती पर तारकासुर नामक दैत्य धरती पर अत्याचार मचाने लगा | उस दैत्य के अत्याचार से परेशान होकर देवता ब्रह्मा जी के पास गए तब ब्रह्माजी ने कहा की इसका समाधान शिवजी का पुत्र ही कर सकता है | फिर देवता शिव के पास गए और तारकासुर के अत्याचारों से मुक्ति के लिए प्राथना करी | उनकी प्राथना सुन शिव,पार्वती से शुभ घड़ी व शुभ मुहरत में विवाह करते है , इस प्रकार भगवान कार्तिकेय का जन्म हुआ |

सुकेश :- शिव का तीसरा पुत्र था सुकेश | दानवो में दो भाई थे हेति और प्रहेति | दानवो ने इन्हे अपना प्रतिनिधि बनाया, ये दोनों भाई बलशाली और प्रतापी थे |प्रहेति धर्मिक था और हेति को राजपाट और राजनीति की लालशा थी | दानव हेति ने अपने वंश को आगे बढ़ाने के लिए काल की पुत्री से ‘भय’ से विवाह कर लिया .कुछ समय पश्चात उनका पुत्र हुआ जिसका नाम था विद्युत्केश | विद्युत्केश का विवाह सालकटंकटा से हुआ क्योकि सालकटंकटा व्यभिचारणी थी इस कारण उन्होंने अपने पुत्र को लवारिश छोड़ दिया | पुराणो के अनुसार जब भगवान शिव और पार्वती की उस लावारिश बालक पर नजर गई तो उन्होंने उसे गोद लिया |

जलंधर :- जलंधर शिव जी का ही अंश था, एक बार जब शिव ने अपना तेज जल में फेका तो उस से जलंधर की उत्पति हुई | जलंधर बहुत ही शक्तिशाली था उसने अपने आक्रमण से स्वर्ग में कब्जा कर लिया तो वे शिवजी के पास गए और उन्हें पूरी घटना बताई | शिव ने इंद्रा से जलंधर की पत्नी वृंदा का पतिव्रत धर्म तोड़ने को कहा क्योकि उंसकी पतिव्रता धर्म की शक्ति के कारण शिव जलंधर को पराजित करने में असमर्थ थे | अतः इंद्र ने जलंधर का रूप धारण कर वृंदा का पतिवर्त धर्म तोडा तथा शिव ने जलंधर का वध कर दिया|

अयप्पा :- अयप्पा भगवन शिव और मोहिनी का पुत्र था | कहते हैं कि जब भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया था तो उनकी मादकता से भगवान शिव का वीर्यपात हो गया था और उस वीर्य से इस बालक का जन्म हुआ | दक्षिण भारत में अयप्पा देव की पूजा अधिक की जाती हैं अयप्पा देव को ‘हरीहर पुत्र’ के नाम से भी जाना जाता हैं |

भौम :- भौम भगवान शिव के पसीने से उत्पन हुआ था .जब भगवान शिव तपश्या में लीन थे तो उस समय उनके सर से पसीने की एक बून्द टपकी जो धरती पर गिरी | इन पसीने की बूंदों से एक सुंदर और प्यारे बालक का जन्म हुआ, जिसके चार भुजाएं थीं | इस पुत्र का पृथ्वी ने पालन पोषण करना शुरु किया। तभी भूमि का पुत्र होने के कारण यह भौम कहलाया। कुछ बड़ा होने पर मंगल काशी पहुंचा और भगवान शिव की कड़ी तपस्या की। तब भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उसे मंगल लोक प्रदान किया ।

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