कैसे हुआ 4 साल में 102 कौरवो का जन्म ?

पांडवो और कौरवो के बीच के महान युद्ध महभारत लड़ा गया था जो एक बहुत बड़ा इतिहास बना | यह धृतराष्ट्र और गांधारी के 100 पुत्रो और पाण्डु व गंधारी के पांच पुत्र पांडवो के बीच धर्म युद्ध की लड़ाई थी जिसमे कौरवो की हर व पांडवो की जीत हुई थी | इस महायुद्ध में अनेक महारथियों ने युद्ध लड़ा तथा अपने साहस का परिचय दिया| महाभारत युद्ध का मुख्य कारण थे कौरव ,अगर कौरव न होते तो यह युद्ध भी नही लड़ा जाता |

लेकिन आप जानते है की वास्तविकता में कौरव 100 नही वरन 102 थे | शायद ही इस वास्तविकता को अधिकतर लोग जानते भी होंगे या नही पर यह सत्य है | गंधारी जब धृतराष्ट्र के साथ विवाह करके हस्तिनापुर आई तो उन्हें यह बात नही थी की धृतराष्ट्र अंधे है | अपने पति के अंधे होने की बात जानकर गांधारी ने अपने आँखों में पट्टी बांध ली और आजीवन अपने पति के समान रौशनी विहीन जीवन जीने का संकल्प ले लिया | इसी दौरान ऋषि व्यास हस्तिनापुर धृतराष्ट्र से मिलने आये, अपनी रौशनी विहीन होने के बावजूद गंधारी ने अपनी उसी अवस्था में ऋषि व्यास जी की खूब सेवा सत्कार किया |

गांधारी की सेवा और पतिव्रता संकल्प से प्रसन्न होकर ऋषि व्यास ने उन्हें 100 पुत्रों की माता होने का आशीर्वाद दिया | उन्हीं के आशीर्वाद से गांधारी दो वर्षों तक गर्भवती रहीं लेकिन उन्हें मृत मांस का लोथड़ा पैदा हुआ | तब ऋषि व्यास ने उसे 100 पुत्रों के लिए 100 टुकड़ों में काटकर घी के घड़े में एक वर्ष तक बंद रखने का आदेश दिया | गांधारी द्वारा एक पुत्री की इच्छा व्यक्त करने पर ऋषि व्यास ने मांस के उस लोथड़े को खुद 101 टुकड़ों में काटा और घड़े में डालकर बंद किया जिससे बाद दुर्योधन समेत गांधारी के 100 पुत्र और एक पुत्री दु:शला पैदा हुई |

कहते है की धृतराष्ट्र का किसी दासी के साथ भी सम्बन्ध था, जब दुर्योधन के जन्म के समय पहला घड़ा फूटा तो उसी समय उस दासी ने भी एक पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम युतुत्सु था .इस प्रकार कौरव 100 नही 102 थे |