जब नारद मुनि के कारण श्रीराम ने भक्त हनुमान पर किया ब्रह्मास्त्र का प्रयोग !

fight between lord rama and hanuman :

संकटमोचन हनुमान जैसा भक्त इतिहास में आज तक न कभी हुआ है और न होगा | वाल्मिकी रामायण में रामभक्ति से जुड़े हुए पवनपुत्र हनुमान के कई प्रसंग मिलते हैं, जैसा कि हम सभी जानते हैं प्रभु श्रीराम द्वारा सीता को लंका से वापस लाने के प्रयासों में रामभक्त हनुमान ने शुरू से अंत तक श्रीराम का साथ दिया था |

भगवान श्रीराम भी हनुमान को अपने भाईयों जितना ही स्नेह करते थे लेकिन पद्मपुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार एक बार श्री राम ने अपने गुरु के कहने पर अपने भक्त हनुमान पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करा था|

एक बार जब नारद मुनि को हनुमान जी से असुरक्षा महसूस होने लगी क्योकि वे विष्णु के अवतार राम के अत्यंत प्रिय थे| उन्होंने इस असुरक्षा भाव से हनुमान की परीक्षा लेनी चाही |

एक बार राम ने भोज का आयोजन किया जिस में ऋषि विस्वामित्र पधारे | नारद जी ने हनुमान को फुसलाया की ऋषि विश्वामित्र ज्यादा सेवा – सत्कार पसंद नही करते, वही नारद ऋषि ने विश्वामित्र से कहा की हनुमान को अपने आप पे ज्यादा घमंड आ गया है इसी कारण उन्होंने आपको प्रणाम तक नही किया |

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विश्वामित्र ने नारद मुनि की बातों में आकर राम को, हनुमान को दंडित करने का आदेश दिया |

अपने गुरु की बात को राम टाल नहीं सकते थे इसलिए उन्होंने ध्यान में मग्न हनुमान को मारने के लिए कई हथियारों का प्रयोग किया लेकिन हनुमान पर असर नहीं हुआ | तब श्रीराम ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया लेकिन इस बार भी हनुमान को कोई हानि नहीं पहुंची |

नारद ये सब देखकर हैरान थे और उन्होंने आगे बढ़कर हनुमान से इस बारे में पूछा, क्योंकि ब्रह्मास्त्र के प्रभाव से बच पाना असंभव था | हनुमान जी ने नारद मुनि को कहा की मैं राम का नाम जपने में इतना व्यस्त था की मुझे पता ही नही चला की मेरा आस पास क्या हो रहा है | में खुद को श्रेष्ठ समझने की जगह राम की भक्ति में लीन होना ज्यादा पसंद करता हुँ |

तब नारद को अपनी भूल का अहसास हुआ और वे आत्मग्लानि से भर उठे और उन्होंने अपनी इस गलती के लिए हनुमान जी से माफी मांगी |