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अचलेश्वर महादेव मंदिर, माउन्ट आबू – ऐसा अनोखा मंदिर जहाँ शिव के अंगूठे को पूजा जाता है !

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Achaleshwar Mahadev Temple:

राजस्थान के अचलगढ़ में माउन्ट आबू पर्वत पर अचलेश्वर महादेव(Achaleshwar Mahadev Temple) का एक विचित्र मंदिर है जहाँ भगवान शिव की ही नही ,बल्कि उनके ”अंगूठे” को भी पूजा जाता है जिस प्रकार वाराणसी को ”स्कन्द पुराण” के अनुसार शिव नगरी कहा जाता है उसी प्रकार माउन्ट आबू को शिव की उपनगरी की उपाधि दी गई है | अचलेश्वर महादेव (Achaleshwar Mahadev Temple) का यह मंदिर माउन्ट आबू से तकरीबन 11 किलोमीटर दूर ,उत्तर दिशा में अचलगढ़ के किले के पास स्थित है.

यह अद्भुत मंदिर आध्यत्मिक एवं समाजि मान्यताओ से परिपूर्ण है और इस मंदिर के गृभगृह में शिव पाताल खंड के रूप में दिखाई देते है,इसमें ऊपर की और एक अंगूठे का निशान उभरा हुआ है जिसे स्वयंभू शिवलिंग का रूप मानकर पूजा जाता है. यह शिव जी के पेरो का दाहिना अंगूठा माना जाता है और वहाँ के लोगे के अनुसार एक पौराणिक मान्यता है की माउन्ट आबू का पर्वत भगवान शिव के अंगूठे के कारण टिका हुआ है जब वह अंगूठे का निशान गायब हो जायेगा तो पूरा माउन्ट आबू का पर्वत गिर के ढह जायेगा.

इस मंदिर (Achaleshwar Mahadev Temple) में प्रवेश करते ही चार टन वजनी तथा पांच धातु से बनी भगवान नंदी के सुन्दर प्रतिमा दिखाई देती है मंदिर के बायीं और दो कलात्मक खम्भो पर अद्भुत शिल्पकला से सुसज्जित धरमकांटा बना हुआ है. कहा जाता है की यहाँ के शासक अचलेश्वर महादेव का आशीर्वाद लेने के पश्चात उस धर्मकांटे के नीचे प्रजा के सामने सब के हित को प्राथमिकता देना व न्याय के साथ शासन करने की शपथ लेते थे.

Achaleshwar Mahadev Temple Story:

पौराणिक कथा के अनुसार बहुत वर्षो पहले आबू पर्वत के स्थान पर एक ब्रह्म खाई थी जिसके तट पर मुनि वशिस्ठ रहते थे. एक बार मुनि वशिस्ठ की कामधेनु नामक गाय घास चरते हुए ब्रह्म खाई पर जा गिरी तब मुनि ने माँ सरस्वाति और गंगा का आह्वान किया और दोनों देवियो के प्रभाव से वह खाई पानी से भर गई और गाय ऊपरी सतह पर पहुंच गई. यह घटना दोबार घटने पर मुनि ने हिमालय जाकर इस खाई को हिमालय से पाटने का अनुरोध किया.

तब हिमालय ने अपने पुत्र नंदी वर्धन को वहाँ भेजा जिसे अबुर्द नाग उडा के लाया. नंदीवर्धन जब उस खाई को ढकने के लिए उसमे उतरा तो केवल उसकी नाक व ऊपरी हिस्सा बाहर रहा तथा बाकि हिस्सा उस खाई में धस गया. नंदीवर्धन का ऊपरी हिस्सा आबू पर्वत के नाम से जाना जाता है परन्तु इस के बाद भी वह अचल नही रह पा रहा था तब वशिष्ठ मुनि के अनुरोध पर शिव जी ने अपने दाहिने पैर के अंगूठे से उसे अचल किया जिसे आज अचलगढ़ कहते है तब से यहाँ भगवान शिव और उनके अंगूठे की अचलेश्वर मंदिर (Achaleshwar Mahadev Temple) में श्रधालुओ द्वारा पूजा अर्चना की जाती है.

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