जाने आखिर शुभकार्यो में पूर्वदिशा की तरफ मुंह क्यों करते है ?

यह तो हम सभी जानते है की सूर्य पूर्वदिशा की ओर से उदित होता है. वेदो में उदित होते हुए सूर्य की किरणों का भुत महत्त्व बताया गया है.

उद्यन्त्सूर्यो नूदंता मृत्युपाशां . – अर्थवेद 17 / 1 / 30

अर्थात उदित होता हुआ सूर्य मृत्यु के सभी कारणों अर्थात सभी रोगों को नष्ट करता है. सूर्य की किरणे मनुष्य को मृत्यु से बचाती है.

सूर्यस्त्वाधिप्तिमृत्योरुदायच्छतु रशिम्भिः . अर्थवेद 5 / 30 / 15

अर्थात मृत्यु के बन्धनों को यदि तोड़ना है , तो सूर्य के प्रकाश से अपना सम्पर्क बनाए रखे.

मृत्योः पड़विशन अवमुंचमान :, मा चिछत्था अस्माल्लोकादग्नेः सूर्यस्य संदृश : अर्थवेद 8 / 1 / 4

अर्थात सूर्य के प्रकाश में रहना अमृत के लोक में रहने के तुल्य है.

चुकी भगवान सूर्य परमात्मा नारायण के साक्षात प्रतीक है, इसलिए वे सूर्यनारायण कहलाते है. सूर्य ही ब्र्ह्मा का आदित्यरूप है. ये ही जगत के एकमात्र नेत्र ( प्रकाशक ) है. समस्त प्राणियों की उत्तपति का कारण और पालनहार है. प्रत्यक्ष देवता है , जिनका अवतरण ही संसार के, कल्याण के लिए हुआ है. सूर्य ही के ऐसे देवत है , जिनकी उपासना से हमें प्रत्यक्ष फल प्राप्त होता है.

मनोकामनाए पूरी होती है. वेदो में ओजस, तेजस एवं ब्रह्मवर्चस की प्राप्ति के लिए सूर्य की उपासना करने का विधान है. सूर्य मानवमात्र के समस्त शुभ और अशुभ कर्मो के साक्षी है. उनसे हमारा कोई भी कार्य या व्यवहार छिपा नहीं रह सकता, क्योकि सूर्य विश्वचक्षु जो है.

सूर्य-उपनिषद के अनुसार समस्त देव, गन्धर्व एवं ऋषि भी सूर्यरश्मियो ( किरणों ) में निवास करते है. आठ सूर्य की किरणों और उनके प्रभावों की प्राप्ति के लिए ही प्रत्येक शुभकार्यो व संस्कारो को करते समय पूर्वदिशा की ओर मुख्य करके बैठने की परम्परा हमारे वेदो के निर्देशों पर की गई है , ताकि धार्मिक व्यक्ति इसका अधिक से अधिक लाभ उठा सके.

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उल्लेखनीय है की इस समय की किरणों में अवरक्त करने होती है, जिनमे रोगों को नष्ट करने की विशेष क्षमता होती है. सूर्य की सात अलग-लग रंग की करना से सात प्रकार की ऊर्जा भी प्राप्त होती है. इस ऊर्जा के कारण सभी धर्मक अनुष्ठान सफल होते है. सूर्य की अवरक्त करने सीधे छाती पर पड़ती रहे, तो उनके प्रभाव से व्यक्ति सदा निरोग रहता है इसलिए प्रातः सूर्योदय के समय पूर्व की ओर मूख करके सूर्य नमस्कार, सूर्य उपासना, सन्ध्योपासना, पूजा-पाठ, हवन आदि शुभ कृत्य करना बहुत लाभदायक है.

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