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हो रहा है प्रारम्भ श्रावण मॉस, जाने किन बातो का रखे ध्यान !

भगवान शिव की भक्ति का प्रमुख माह श्रावण 20 जुलाई से प्रारंभ हो रहा है। पूरे माह भोलेनाथ की पूजा-अर्चन का दौर जारी रहेगा। सभी शिव मंदिरों में श्रावण मास के अंतर्गत विशेष तैयारियां की गई हैं। चारों ओर श्रद्धालुओं द्वारा ‘बम-बम भोले और ॐ नम: शिवाय’ की गूंज सुनाई देगी। शिवालयों में श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ रहेगी

20 जुलाई से शुरू हुआ श्रावण का यह महीना भक्तों को अमोघ फल देने वाला है। माना जाता है कि भगवान शिव के त्रिशूल की एक नोक पर काशी विश्वनाथ की पूरी नगरी का भार है। उसमें श्रावण मास अपना विशेष महत्व रखता है।

इस मास में लघुरुद्र, महारुद्र अथवा अतिरुद्र पाठ कराने का भी विधान है। श्रावणमास में जितने भी सोमवार पड़ते हैं, उन सब में शिवजी का व्रत किया जाता है। इस व्रत में सुबह गंगा स्नान अथवा किसी पवित्र नदी या सरोवर में अथवा विधिपूर्वक घर पर ही स्नान करके शिवमन्दिर में जाकर स्थापित शिवलिंग या अपने घर में पार्थिव मूर्ति बनाकर यथाविधि षोडशोपचार-पूजन किया जाता है। जानकारों के अनुसार इसके अलावा यथासम्भव विद्वान ब्राह्मण से रुद्राभिषेक भी कराना चाहिए।

इस दौरान खास तौर पर महिलाएं श्रावण मास में विशेष पूजा-अर्चना और व्रत-उपवास रखकर पति की लंबी आयु की प्रार्थना भोलेनाथ से करती हैं। खास कर सभी व्रतों में सोलह सोमवार का व्रत श्रेष्ठ माना जाता है।

इस व्रत को वैशाख, श्रावण मास, कार्तिक मास और माघ मास में किसी भी सोमवार से प्रारंभ किया जा सकता है। इस व्रत की समाप्ति पर सत्रहवें सोमवार को सोलह दंपति को भोजन व किसी वस्तु का दान उपहार देकर उद्यापन किया जाता है। श्रावण मॉस में 84 कोस ब्रिज यात्रा एवं गंगा स्नान का विशेष महत्त्व माना जाता हैं.

जाप ,अनुष्ठान, हवन, सत्यनारायण जी की कथा,श्रावण में नई वस्तु की पूजा करना शुभ माना जाता है और अगर वैदिक ब्राम्हण दुवारा कराया जाये तो अधिक फल प्राप्त होता हैं. जाप, अनुष्ठान हेतु संपर्क करे – +91 124 4035869

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चतुरमास प्रारंभ – क्या करें, क्या न करें

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शिवजी का प्रिय महीना श्रावण क्यों और किसलिए ?