कामिका एकादशी (30 July) – जाने हिन्दू धर्म में क्या महत्व है और कैसे मिलेगा पापो से छुटकारा

Kamika Ekadashi – 30 July 2016

इस व्रत को करने से प्राणी को ब्रह्महत्या और भ्रूणहत्या जैसे पापों से छुटकारा मिलता है.समस्त दुखों का नास होता है पुत्र की प्राप्ती होती है एवम उसकी अन्य मनोकामना पूर्ण होती है इस व्रत को करने से महापुण्य का फल प्राप्त होता है व्रती को वैकुंठ में स्थान मिलता है उसे यमलोक की यातनाएं नहीं साहनी पड़तीं और न ही वः कभी बुरी योनी में जन्म लेता है केदारनाथ और कुरुक्छेत्र में सूर्यग्रहण के समय दान करने का जो फल मिलता है . इस व्रत की कथा सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है

इस व्रत की कथा का उल्लेख श्री ब्रम्हवैवर्तपुराण में आया है. कथा के अनुसार-एकबार सुदीप मुनि से धर्मराज युधिष्ठिर ने पूछा – हे मुनिवर सभी प्रकार के पापों.कष्टों .दुखों को दूर करने वाली और संसार के समस्त सुख ऐश्वर्य पुत्रादि की मनोकामनाए पूर्ण करने वाली कामिका एकादशी की कथा बताएं .तब मुनि सुदीप ने कहा हे धर्मराज सभी प्रकार के पूण्य कार्य करने .दान करने .दान करने का जो फल मिलता है वही .पूण्य .सुख-सम्पति तथा मोक्छ की प्राप्ति कामिका एकादशी का व्रत धारण करने और विधि विधान व् श्रद्धा से भगवान् विष्णु की पूजा तथा आरती करने से प्राप्त हो जाता है,

मुनि ने आगे बताया की हे धर्मराज सोना और चांदी के दान करने से तथा रत्न मुक्त मंडियों से पूजा करने से भगवान् विष्णु इतने प्रसन्न नहीं होते.जितने तुलसीदास से प्रसन्न हुआ करते है .इस व्रत को करने से मन की समस्त इच्छाए पूरी हो जाती है जो भी स्त्री-पुरुष विधि.विधान से इसका व्रत करते है ..

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अथवा चित्त लगाकर इसकी कथा सुनते है -वे समस्त प्रकार के पापों और दुखो से रहित होकर इस लोक में समस्त सुखो का उपयोग करते हुए अंत में सद्गति को प्राप्त क्र लिया करते है . इसका नाम कामिका अथवा पवित्र इसलिए है की पुत्रो सहित सब सुखों को प्रदान करने वाली सब पापों को दूर करने वाली और सद्गति देने वाली हैं . अतः इस एकादशी का व्रत अवश्य ही देना चाहिए

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