चतुरमास प्रारंभ – क्या करें, क्या न करें

आज देवशयनी एकादशी है और आज से ही चतुरमास का प्रारंभ माना जाता है। पौराणिक कथानुसार कहा जाता है कि इस दौरान भगवान विष्णु चार माह के लिए निद्रासन में चले जाते हैं। जानें इससे संबंधित मुहूर्त, पूजा विधि एवं अन्य महत्वपूर्ण तथ्य।

हिन्दू पंचांग के अनुसार, देवशयनी एकादशी आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। ग्रैगेरियन कैलेंडर के अनुसार यह पर्व जून-जुलाई के आसपास पड़ता है। चार मास (चतुरमास) के इस पर्व का समापन प्रबोधिनी एकादशी यानी कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की एकादशी (अक्टूबर-नवंबर के आसपास) को होता है।

ऐसा माना जाता है कि चतुरमास के दौरान भगवान विष्णु निद्रासन में चले जाते हैं और वे चार माह के बाद प्रबोधिनी एकादशी में इस नींद से जागते हैं। चतुरमास में आषाढ़, श्रावण भाद्रपद और अश्विन को गिना जाता है।

चतुरमास की इस अवधि के दौरान मान्यताओं का पालन करने के साथ ही इसमें व्यक्तिगत तौर पर समृद्धि, अभय, ज़िम्मेदारी की समझ एवं रक्षा का संकल्प लिया जाता है। देवशयनी के इस पावन अवसर पर लोगों की मनोकामना पूर्ण होती हैं।

चतुरमास के दौरान होने वाले धार्मिक क्रिया-कलाप नीचे दिए जा गए हैं:

चतुरमास के दौरान क्या करें:

चतुरमास की अवधि के दौरान व्यक्तिगत तौर पर शुभ कार्य करें और भगवान विष्णु से पवित्र मन से आशीर्वाद मांगे।चतुरमास पूजा-पाठ, धार्मिक आयोजन और मंदिर जाने के लिए बेहद शुभकारी समय होता है।इस मौक़े पर आप सके तो आप एक स्थान पर रुके और यात्रा करने से बचें, किसी प्रकार के बदलाव को भी नज़रअंदाज़ करें।चतुरमास के दौरान ईश्वर द्वारा किए गए कार्यों का न केवल पाठ करें, बल्कि प्रवचन के माध्यम से दूसरों को भी इसका ज्ञान दें।भगवान का आशीर्वाद पाने के लिए साधुओं को कपड़े एवं फल दान करें।इस अवसर पर लोग ईश्वर की भक्ति में दिन में एक समय ही खाना खाते हैं।

देवशयनी एकादशी के अवसर पर ये चीज़ें न करें:

वाणी में मिठास के लिए नमक का सेवन न करें।उम्र की दीर्घायु के लिए तेल का सेवन न करें।धन की प्राप्ति के लिए नद्यपान व तेल न खाएँ।पवित्रता के लिए खाना न पकाएँ।भगवान विष्णु की शरण प्राप्त करने के लिए बेड पर न सोएँ।शक्ति प्राप्ति और रोगमुक्त होने के लिए शराब का सेवन न करे। संतान की लंबी आयु के लिए गर्म खाना न खाएँ।शांति प्रिय जीवन के लिए दूध दही का सेवन न करें।घर में किसी शुभ कार्य को न करें, ख़ासकर जैसे- शादी-ब्याह, गृह प्रवेश आदि।

देवशयनी एकादशी के लिए पूजा विधि:

अनपे शरीर और आत्मा को पवित्र करने के लिए ब्रह्ममुहुर्त में उठकर स्नान करें।भक्त अपने ख़ुशहाल जीवन के लिए भगवान विष्णु की आराधना करें।देवशयनी एकादशी का व्रत धारण करें।भगवान विष्णु का आशीर्वाद पाने के लिए संबंधित मंत्रों का जाप करें।देवशयनी एकादशी व्रत जुलाई 15, 2016 को रखा जाएगा, जबकि जुलाई 16, 2016 को अपराह्न मुहूर्त 13:48 से 16:32 बजे तक होगा।

चतुरमास के पवित्र अवसर पर की जाने वाली धार्मिक यात्रा को पंढरपुर आषाढ़ एकादशी वारी यात्रा के नाम से जाना जाता है। जो महाराष्ट्र के पंढरपुर में की जाती है। भक्तों की 21 दिनों की लंबी यात्रा के बाद भगवान विट्ठल (विष्णु भगवान) इस दिन महाराष्ट्र के पंढरपुर में स्थित विट्ठल मंदिर में पूजे जाते हैं। ईश्वर का आशीर्वाद और सुख-समृद्धि पाने के लिए हज़ारों की संख्या में भक्त इस यात्रा में हिस्सा लेते हैं तथा वे कालारम मंदिर के समीप गोदावरी नदी में एकत्रित होकर भगवान राम की आराधना के लिए पवित्र डुबकी भी लगाते हैं।

इसके अलावा इस दौरान मानसून के कारण सूर्य के प्रकाश को घटाने के लिए पृथ्वी पर बृहद अनुपात में यम आवृत्ति पहुँचती हैं। यम आवृत्ति प्रमुख रूप से तम आवृति है जो नकारात्मक आवृत्तियों के प्रभावों को सहन करके हमारे जीवन में सत्व आवृत्ति को बढ़ाती हैं जिसके कारण इस अवधि में धार्मिक त्योहारों का आयोजन होता है जैसे- गुरु पूर्णिमा, कृष्ण जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, रक्षा बंधन, नवरात्रि, करवा चौथ, दीवाली आदि।