दानवीर कर्ण एवं द्रोपदी दोनों करना चाहते थे एक दूसरे से विवाह परन्तु इसलिए नहीं चुना द्रोपदी ने कर्ण को अपना पति … !

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Karna :-

जब कर्ण ( karna ) का जन्म हुआ था उस समय कुंती अविवाहित थी. समाज के तानो एवं लांछनों से बचने के लिए कुंती ने अपने पुत्र कर्ण ( karna ) को नदी में बहा दिया. एक सूत परिवार को कर्ण जब बहते हुए मिला तो उन्होंने कर्ण ( karna ) को अपने पुत्र के रूप में पालने का निर्णय लिया. सूत दम्पति के पास पलने के कारण कर्ण ( karna ) सूतपुत्र कहलाए.

कर्ण ( karna ) ने अपनी शिक्षा दीक्षा परशुराम के आश्रम में सम्पन्न करी. कर्ण अंगदेश के राजा थे. एक बार कर्ण जब पांचाल नगरी अपने मित्र दुर्योधन के किसी कार्य से आये तो वहां उन्हें एक सुंदर कन्या दिखी जिसका नाम द्रोपदी था. द्रोपदी एवं कर्ण ( karna ) दोनों एक दूसरे को देखकर आकर्षित हो गए तथा दोनों एक दूसरे से विवाह करना चाहते थे.

स्वयम्बर से पूर्व द्रोपदी ने यह निर्णय लिया था की वह स्वयम्बर में कर्ण ( karna ) के गले में ही वह वरमाला डालेगी. परन्तु आखिर ऐसा किया हुआ की द्रोपदी ने स्वयंबर में अपना निर्णय बदल लिया और कर्ण की जगह अर्जुन के गले में वरमाला डाल दी ?

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