क्या आप जानते है महादेव शिव से जुडी हैरान करने वाली इन गुप्त बातो को !

ऐसा कहा जाता है की आइस्टीन से भी पहले भगवान शिव ने यह बताया था की कल्पना ज्ञान से ज्यादा अधिक महत्वपूर्ण है. हम जिस प्रकार की कल्पना करते है जिस प्रकार के हमारे विचार होते है, हम उसी प्रकार के हो जाते है.

भगवान शिव ने इसी आधार पर कई ध्यान के क्रियाओं का विकास किया. भगवान शिव को सभी धर्मो का मूल माना जाता है. भगवान शिव दर्शन एवं उनकी कहानियाँ दुनिया के हर धर्म एवं ग्रंथो में अलग अलग प्रकार से लिखा है.

आज से 15 और 20 हजार पूर्व वराह काल के समय जब देवताओ ने पृथ्वी में कदम रखा था उस काल में पृथ्वी हिमयुग के चपेट में थी. तब भगवान शिव ने पृथ्वीलोक में कैलाश पर्वत को अपना निवास स्थान बनाया.

भगवान शिव ने समुद्र को अपना निवास स्थान चुना तथा ब्र्ह्मा जी ने समुद्र के किनारे को अपना स्थान चुना. कहा जाता है की जिस पर्वत पर भगवान शिव निवास स्थान है उसके ठीक नीचे पाताल लोक है जहा पर भगवान विष्णु निवास करते है. भगवान शिव के आसन के ठीक ऊपर व् आकाशमंडल के पार क्रमश स्वर्गलोक तथा उसके बाद ब्र्ह्मलोक है.

वैज्ञानिकों के अनुसार तिब्बत को प्राचीन काल की भूमि मानी जाती है . प्राचीन काल में तिब्बत की भूमि के अलावा चारो और जल भरा हुआ था इसके बाद धीरे धीरे भूमि उतपन्न हुई और धरती में जीवन आया है. सर्वप्रथम भगवान शिव ने ही धरती पर जीवन का प्रचार प्रसार करने का प्रयास किया इसी काल वे आदि देव के नाम से भी जाने जाते है.