जाने पुराणों में वर्णन प्रलय के प्राम्भ होने से जुडी अचंभित करने वाली अनोखी बाते, जो कर देंगे आपके रोंगटे खड़े !

हिन्दू धर्म शास्त्रों एवं ग्रंथो के अनुसार करीब सवा चार अरब साल हो जाने के पश्चात धरती में प्रलय आती है, अभी लगभग दो अरब साल का समय व्यतीत हो चुका है.

इतना पुराना इतिहास वह भी बिलकुल सही गणना के साथ केवल हमारे हिन्दू सनातन धर्म में ही दिया गया है तथा वैज्ञानिक भी इसका प्रतिपादन करते है.

हमारे पुराणों के अनुसार मनुष्यो का एक वर्ष देवताओ का एक दिन कहा गया है वही ब्र्ह्मा जी का एक दिन तब माता जाता है जब मनुष्य के सवा चार अरब साल पूर्ण हो जाते है.

कहा जाता है की जब ब्र्ह्मा एक दिन होने के पश्चात सोने चले जाते है तब पृथ्वी पर भयंकर प्रलय आता है तथा सारा जीवन तहस-नहस हो जाता है.

आज हम आपको सृष्टि विनाश के समय प्राम्भ होने वाले प्रलय से जुड़े ऐसे संकेतों के बारे में बताने जा रहे है जिन्हे सुन एक बार के आपकी रूह अवश्य ही काँप जायेगी.

पुराणों में बताया गया है की जिस दिन ब्रह्म देव एक दिन ( मनुष्य के 4290000000 साल ) समाप्त होने के पश्चात सोने के लिए चले जाएंगे उस दिन इस पृथ्वी में प्रलय प्राम्भ हो जायेगी. सबसे पहले पृथ्वी में सौ साल तक वर्षा नहीं होगी,

तथा सारी नादिया तथा समुद्र के पानी सुख जाएंगे धरती में बहुत ही भयंकर सुखा पड़ेगा.

ऐसे में लगभग बहुत से जनजातिया भूख से ही मर जाएंगी. भीषण गर्मी से जमीन के साथ पाताल जलने लगेगा, तथा पाताल लोक का सम्पूर्ण जीवन समाप्त हो जाएगा.

उसके बाद प्रलय के बादलों का आगमन होगा जो सौ साल तक लगातार बरसते रहेंगे. बारिश के बून्द पृथ्वी पर इतनी तेजी से पड़ेंगी की सिर्फ एक बून्द में ही पत्थरों को दो टुकड़ो में विभाजित करने का समार्थ्य होगा.

प्रलय के समय सिर्फ सप्तऋषि तथा मनु ही इस पृथ्वी में जीवित रहेंगे जो आपने साथ वनस्पति जीवन एवं इतिहास को सुरक्षित समेटे रहेंगे. उसके बाद हवा, पानी से उसका रस छीन लेगी तथा जिससे पानी अग्नि में परिवर्तित हो जायेगी.

तब उस समय धरती में चारो तरफ फेला अन्धकार वायु की गंध छीन लेगा क्योंकि धरती की वजह से ही वायु अपनी गंध को प्राप्त करता है.

उस समय आकाश वायु से स्पर्श छीन लेगा तथा आकाश से त्रिगुण छीन लिया जाएगा जिससे फिर वो अंतरिक्ष का रूप ले लेगा. मन सतगुण में तथा इंद्रिया रज गन में समा जायेगी.

इसके ये सभी गन पृथ्वी में तथा पृथ्वी ब्रह्म शक्ति में लीन हो जायेगी. इसके विपरीत बाद में ब्रह्म देव का एक नया दिन शुरू होने के बाद नई सृष्टि का निर्माण होगा.