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हनुमान जी से जुडी इस सच्चाई को जान आश्चर्य में पड जाएंगे आप, बजरंग बलि से जुडी अनोखी कथा !

रामायण की कथा से तो हम सभी भली-भाति परिचित ही है, यदि कोई व्यक्ति आप से यह पूछ ले रामायण की कथा में किसने रावण की लंका को जलाया था तो आपकी नजर में वह सवाल पूछने वाला बेवकुफ होगा. क्योकि यह सभी को पता है की रावण की लंका को हनुमान जी ने जलाई थी.

लेकिन यदि हम कहे की रावण की लंका हनुमान जी ने नहीं बल्कि माता पार्वती ने जलाई तो ?

यदि आपको यह सुन कर विशवास नहीं हुआ तो चलिए आज हम आपको हनुमान एवं लंका दहन के संबंध में दो ऐसी कथा के बारे में बताएंगे जिसकी भूमिका हनुमान जी के जन्म से पूर्व है लिख दी गयी थी.

पहली कथा

हनुमान जी की माता अंजना एक राजकुमारी थी, खूबसूरत होने के साथ ही साथ में बहुत चंचलता भी थी. एक बार जब वे वन में भ्रमण को निकली तो विचरण करते समय उनकी नजर ध्यान मग्न ऋषि पर पड़ी.

ऋषि की शक्ल वानर जैसी थी जिसे देख अंजना जोर जोर से हसने लगी. अंजना की हसी से ऋषि का ध्यान भंग हो गया. अपने रूप में घमंड करने तथा ऋषि के मजाक उड़ाने का पता चलने पर ऋषि अत्यन्त क्रोधित हो गए तथा अंजना को श्राप दिया की वह एक वानर कन्या में बदल जाए.

श्राप के प्रभाव से अंजना शीघ्र ही एक वानर कन्या में परिवर्तित हो गई तथा अब उनका घमंड भी चूर हो चुका था. अंजना ने ऋषि से अपने गलती के लिए क्षमा याचना करी, ऋषि के क्रोध शांत होने पर उन्हें अंजना पे दया आ गए तथा वे अंजना से बोले यदि स्वयं भगवान शिव तुम्हारे पुत्र के रूप में जन्म ले तो तुम्हे इस श्राप से मुक्ति प्राप्त हो सकती है.

ऋषि की आज्ञा से अंजना ने एक उच्चे पर्वत में जाकर तपस्या आरम्भ कर दी तथा भगवान शिव को प्रसन्न किया. उनकी तपस्या से प्रसन्न भगवान शिव ने उन्हें उनके पुत्र के रूप में जन्म लेना के वरदान दिया.

जब माता पार्वती को इस बात का पता चला तो उन्होंने भगवान शिव से पूछ की क्या वे भी शिव के साथ धरती में अवतरित हो सकती है ?

भगवान शिव ने कहा में बाल ब्रह्मचारी हनुमान के रूप में धरती पर विराजमान रहूंगा अतः तुम मेरे साथ नहीं आ सकती.

भगवान शिव की बात सुनकार माता पार्वती बोली की वह वानर रूपी शिव के पूछ के रूप में अवतार लेंगी जिससे हनुमान में शिव एवं शक्ति दोनों का अंश होगा जो उन्हें अति पराक्रमी एवं बलशाली बनाएगा.

इस प्रकार भगवान शिव ने अंजना के गर्भ से हनुमान के रूप में जन्म लेकर उन्हें श्राप से मुक्ति दिलाई तथा हनुमान के पूछ रूप में माता पार्वती विद्यमान थी.

दूसरी कथा

धन के देवता कुबेर ने भगवान शिव की आज्ञा से सोने एक सुन्दर एवं भव्य सोने का महल बनया. ये महल सम्पूर्ण बर्ह्माण्ड में अद्वितीय था. जब रावण ने इस महल को देखा तो उसके मन उसे पाने की लालसा उतपन्न हुई.

भगवान शिव को युद्ध में हराकर तो वह उस सोने के महल को प्राप्त नहीं कर सकता था अतः वह कैलाश पर्वत एक ब्राह्मण के रूप में गया तथा छल से भगवान शिव से सोने की लंका प्राप्त कर ली.

जब माता पार्वती को पता चला की उनके लिए निर्मित किया गया सोने का भवन रावण ने छीन लिया है तो उनके क्रोध की कोई सीमा नहीं रही.

भगवान शिव ने पार्वती को शांत करते हुए कहा कि जब त्रेता युग में मैं हनुमान के रूप में जन्म लूँगा और तुम मेरी पूँछ के रूप में जुडी होगी तब तुम रावण को उसके कर्मों की सजा दे देना.

इस प्रकार भगवान शिव के अवतार हनुमान जी माता सीता से भेट करने के लिए लंका गए तो हनुमान की पुंछ रूपी शक्ति पार्वती ने रावण के सोने की लंका को जलाकर रावण को उसके छल करने की सजा दी.

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