बजरंग बलि के 10 प्रसिद्ध मंदिर, कभी अनदेखा न करें इन दिव्य मंदिरों को !

प्रभु श्री राम भक्त हनुमान जी को यह वरदान प्राप्त था की जब इस पृथ्वी पर जीवन चलायमान है तब तक वे साक्षात् इस धरती पर विराजमान रहेंगे.

यदि आप पवनपुत्र बजरंग बलि के भक्त है तथा उनके दर्शन के लिए उनका कोई मंदिर खोज रहे है तो आइये आज हम बताते है हनुमान जी के 10 ऐसे प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में जहाँ आप कर सकते है उनके साक्षात् दर्शन.

1.. कोरनटी हनुमान गारंटी मंदिर ( गुलबर्गा, कर्नाटक )

कर्नाटक के गुलबर्गा में स्थित हनुमान जी के मंदिर में कई वर्षो से यह महिमा बनी हुई है की यहाँ आने वाला हर व्यक्ति, यदि उसकी मांग सही है और यदि वह पवित्र दिल से यहाँ आता है तो उसकी मनोकामना पूर्ण होने की गारंटी स्वयं हनुमान जी देते है, व उस व्यक्ति की हर मनोकमना और कार्य पूर्ण हो जाता है.1957 में यह मंदिर निर्मित हुआ था.

हनुमान जी के इस मंदिर का नाम पास ही में स्थित मेडिकल कालेज के कारण पड़ा. क्योकि इस मेडिकल कॉलेज के छात्र इस मंदिर में अपने पास होने की प्राथना लेकर आते थे और सभी बच्चे पास भी हो जाते थे .

धीरे – धीरे मंदिर की महिमा यहाँ दूर दूर तक फैलने लगी और सभी अपनी मांगे लेकर मंदिर में आने लगे. जब सभी लोगो की जायज मांगे पूर्ण होने लगी तो इस मंदिर का नाम ही कोरनटी हनुमान गारंटी मंदिर रख दिया गया है.

मंदिर के पुजारी का कहना है यदि कोई व्यक्ति इस मंदिर में अपनी जायज मांग लेकर आता है तथा यही बैठकर कुछ मिनट हनुमान चालीसा का जाप करता है तो उसकी मुराद हनुमान जी अवश्य सुनते है और वह जल्द पूरी होती है.

2 . पंचमुख अंजनेयर हनुमान ( तमिलनाडु )

यहाँ आपको हनुमान जी पंचमुखी रूप में दर्शन देंगे.हनुमान जी के इस पावन मंदिर की महिमा इतनी है की भारत के कोने-कोने से लोग यहाँ दर्शन को आते है.

हनुमान जी के इस मंदिर को लेकर एक कथा प्रचलित है की जब अहिरावण और महिरावण ने शिविर से श्री राम और लक्ष्मण का अपहरण कर लिया था तथा उनकी बलि के लिए उन्हें पाताल लोक लेकर चले गए थे.

तब श्री राम की खोज के लिए पंचमुखी रूप धारण कर हनुमान जी ने अपनी खोज इसी स्थान से प्राम्भ करी थी. तथा राम लक्ष्मण को उनकी कैद से मुक्त कर अंत में हनुमान जी ने उन दोनों का वध कर दिया था.

मान्यता है की यदि कोई भक्त एक बार इस मंदिर में सच्चे दिल से प्राथना करें तो उसके सारे बिगड़े काम हनुमान जी की कृपा से स्वतः ही बनने लगते है.

3 . श्री बालहनुमान मंदिर ( जामनगर, गुजरात )

इस मंदिर में आप को हनुमान जी के बालरूप के दर्शन होंगे. इस मंदिर का नाम ”गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड” में भी शामिल है. इस मंदिर में सन 1964 से राम जाप की धुन चल रही है.

इस मंदिर के विषय में यह मान्यता है की यदि आप सच्चे मन से इस मंदिर के दर्शन को जाओगे तो मंदिर में प्रवेश करते ही आपको साक्षात् भगवान श्री राम के दर्शन भी हो सकते है.

बाल हनुमान के इस मंदिर में अलग-अलग पालियो में श्री राम जी की प्राथना करी जाती है. इसके लिए व्यक्तियों के नाम भी निश्चित कर दिए जाते है जिन्हे एक बोर्ड में लिख दिया जाता है ताकि व्यक्ति प्राथना के लिए समय से आ सके.

4 प्राचीन हनुमान मंदिर ( कन्नाट प्लेस, दिल्ली )

महाभारत के युग में जब पांडव राज्य करते थे तो उन्होंने अपने राज्य में पांच हनुमान मंदिरों का निर्माण करवाया था जिनमे से एक यह है.

हनुमान जी का यह प्रसिद्ध मंदिर दिल्ली के दिल कन्नाट प्लेस में स्थित है. यहाँ बजरंग बलि स्वयं प्रकट हुए थे. यदि इस मंदिर में कोई आधा या एक घंटा बैठता है तो उसे अपने आप ही किसी अद्भुत शक्ति का अनुभव होने लगता है.

5 . श्री कष्ट भंजन हनुमान मंदिर ( सारंगपुर, गुजरात )

इस मंदिर में हनुमान जी की शिला मूर्ति 1905 में स्थापित की गयी थी. कहा जाता ही की जब यह मूर्ति स्थापित की गई थी तो इसके कुछ देर बाद ही मूर्ति जोर-जोर से हिलने लगी थी.

श्रृद्धालुओ का विश्वास है की हनुमान जी की इस मूर्ति में सक्षात हनुमान जी निवास करते है. इस मंदिर में हनुमान जी कोई भी भक्त यदि अपने दर्द एवं समस्या उनके सामने लेकर आता है तो हनुमान जी शीघ्र ही उसका निवारण कर देते है अतः इसी कारण हनुमान जी के इस मंदिर का नाम श्री कष्ट भंजन हनुमान मंदिर पड़ा है

6 . महदीपुर बालाजी ( राजस्थान )

हनुमान जी के इस मंदिर के संबंध यह मान्यता है की एक विशाल पर्वत से हनुमान जी की मूर्ति स्वयं उभर कर प्रकट हुई थी. जिसे यहाँ प्रतिमा के रूप में पूजा जाता है. हनुमान जी के चरणों से से एक धारा लगातार बहती रहते है.

मंदिर की शक्ति से पूरा भारत देश वाकिफ है, यहाँ ऊपरी बाधाओं के निवारण के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं और सही होकर अपने घरों में जाते हैं.

जब एक बार मुगलो के बादशाह अकबर ने हनुमान के इस मंदिर को तोड़ने का प्रयास किया था तो उसे मुंह की खानी पड़ी थी तथा हनुमान जी के इस मंदिर को जरा सा भी नुक्सान नहीं पहुंचा था.

7 . हनुमानगढ़ी हनुमान मंदिर ( अयोध्या )

हनुमानगढ़ी मंदिर भगवान श्री राम के नगरी अयोध्या में स्थित है. यह मंदिर सरयू नदी के तट पर स्थित भक्तो के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहाँ जाने के लिए आपको 76 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ेगी. यहाँ भगवान श्री राम के दर्शन प्राप्त करने के लिए सर्वप्रथम आपको हनुमान जी से आज्ञा लेनी पड़ती है.

हनुमान गढ़ी का मंदिर पुरे भारत में प्रसिद्ध है. 300 साल पहले यहाँ के सुलतान मंसूर अली थे. कहा जाता है की हनुमान जी ने उनके पुत्र को एक नया जीवनदान दिया था इस कारण से उन्होंने हनुमान जी के इस मंदिर का निर्माण किया था.

8 . हनुमान धारा ( उत्तर प्रदेश )

लंका युद्ध के बाद अपने भगवान श्री राम जी से जब हनुमान जी ने पूछा था कि भगवान युद्ध के बाद अपने शरीर को तपन को कहाँ शांत करू तो भगवान राम ने हनुमान को यही भेजा था.

मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा के ऊपर से आज भी जल बहता रहता है. प्रतिमा के ऊपर तो जल कुंड हैं जिनका जल बेहद शक्तिशाली है.

उत्तर प्रदेश के सीतापुर नामक स्थान के समीप यह हनुमान मंदिर स्थापित है.

9 . महावीर हनुमान मंदिर ब्रज ( मथुरा )

इस मंदिर में रोजाना हनुमान जी के हजारो भक्तो की भीड़ लगी रहती है. वैसे तो हनुमान जी के पुरे ब्रज में 300 से ज्यादा मंदिर है परन्तु उन सभी में इस मंदिर की बहुत मान्यता है.

यहाँ हनुमान जी की अद्भुत प्रतिमा विद्यमान है. यहाँ भक्त अपने अपने कष्टों को लेकर हनुमान जी के मंदिर में आते है तथा हनुमान जी शीघ्र ही अपने भक्तो के कष्ट हर उन्हें सुख शांति का आशीर्वाद देते है.

इस मंदिर की महिमा का गुणगान सुन देश-विदेश से लोग यहाँ आते है.

10 . हनुमान मंदिर, लेटी प्रतिमा ( इलाहाबाद )

यहां स्थापित हनुमान की अनूठी प्रतिमा को प्रयाग का कोतवाल होने का दर्जा भी हासिल है. आम तौर पर जहां दूसरे मंदिरों मे प्रतिमाएँ सीधी खड़ी होती हैं. वही इस मन्दिर मे लेटे हुए बजरंग बली की पूजा होती है.

पौराणिक कथाओं के मुताबिक लंका विजय के बाद भगवान् राम जब संगम स्नान कर भारद्वाज ऋषि से आशीर्वाद लेने प्रयाग आए तो उनके सबसे प्रिय भक्त हनुमान इसी जगह पर शारीरिक कष्ट से पीड़ित होकर मूर्छित हो गए.

इलाहाबाद के लेटे हनुमानपवन पुत्र को मूर्छित देख माँ जानकी ने उन्हें अपनी सुहाग के प्रतिक सिन्दूर से नई जिंदगी दी और हमेश स्वस्थ एवं आरोअग्य रहने का आशीर्वाद प्रदान किया. माँ जानकी द्वारा सिन्दूर से जीवन देने की वजह से ही बजरंग बली को सिन्दूर चढाये जाने की परम्परा है.

इस मंदिर के बारे में कहा जाता है की जब ओरंगजेब ने अपने 100 सेनिको को इस मंदिर हनुमान जी की प्रतिमा हटाने को कहा था उनके लाखो प्रयास करने के बावजूद भी यह मूर्ति टस से मस नहीं.

हनुमान जी की इस लेटी हुई प्रतिमा में सक्षात हनुमान जी बस्ते है. इस मंदिर में कोई व्यक्ति सच्चे मन से उनके दर्शन के लिए जाता है तो उसकी हर मुरादे पूर्ण होती है.