जाने आखिर क्यों भगवान शिव ने किया अपने ही भक्त और रावण के भाई ”कुम्भकर्ण” के पुत्र का वध !

khunm-shiva

Shiva :-

अपने भाई लंकापति रावण के समान ही कुम्भकर्ण की भी शिव shiva ) के प्रति अगाध श्रद्धा थी , ऋषि विश्रवा व कैकसी के दूसरे पुत्र के रूप में कुम्भकर्ण का जन्म हुआ था. राक्षस कुल में जन्म लेने के बावजूद भी कुम्भकर्ण में कोई अप्रवर्ति नहीं थी वह सदैव धर्म के मार्ग में चलने वाला व्यक्ति था उसकी यही विशेषता उसे राक्षस कुल के अन्य राक्षसों से अलग करती थी. कुम्भकर्ण के इस प्रताप को देखकर देवता भी उनसे जलते थे.

रावण जब भगवान शिव shiva ) की तपस्या करने बैठता था तो कुम्भकर्ण भी भाई विभीषण को साथ में लेकर शिव shiva ) की तपस्या में लीन हो जाता था. रावण के हर धार्मिक कार्यो में कुम्भकर्ण उसके साथ होता था. राक्षस कुल में रावण के बाद भगवान शिव का सबसे बड़ा भक्त होने के बावजूद भी आखिर क्यों भगवान शिव shiva ) कुम्भकर्ण के पुत्र का वध किया आइये विस्तार से जानते है इस कथा को :-

जब कुम्भकर्ण अपने भाई रावण के लिए राम के साथ युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुआ उस समय कुम्भकर्ण के पत्नी गर्भवती थी. कुम्भकर्ण की मृत्यु के पश्चात उसकी पत्नी कामरूप प्रदेश में रहने लगी तथा वहां उसने कुम्भकर्ण के भीम नामक महाप्रतापी पुत्र को जन्म दिया. भीम अपने पिता कुम्भकरण के समान ही अत्यन्त बलशाली था जब वह थोड़ा बड़ा हुआ तो एक दिन उसने अपनी माँ से उसके पिता के बारे में पूछा .

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