जब स्वयं महादेव शिव भी नहीं बच पाए अपने शिष्य शनिदेव की दृष्टि से, पुराणों की एक रोचक कथा !

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Shani Dev :-

हिन्दू धर्म गर्न्थो और शास्त्रों में भगवान शिव को शनि देव ( shani dev ) का गुरु बताया गया है तथा शनिदेव को न्याय करने और किसी को दण्डित करने की शक्ति भगवान शिव के आशीर्वाद द्वारा ही प्राप्त हुई है अर्थात शनि देव ( shani dev ) किसी भी चाहे वह देवता हो या असुर, मनुष्य हो या कोई जानवर सभी को उनके कर्मो के अनुसार उनके साथ न्याय कर सकते है और उन्हें दण्डित कर सकते है.

शास्त्रों के अनुसार सूर्य देव एवं देवी छाया के पुत्र शनि देव को क्रूर ग्रह की संज्ञा दी गयी है. शनि देव ( shani dev ) बचपन में बहुत ही उद्ण्डत थे तथा पिता सूर्य देव ने उनकी इस उदंडता से परेशान होकर भगवान शिव को अपने पुत्र शनि को सही मार्ग दिखाने को कहा.

भगवान शिव के लाख समझाने पर भी जब शनि देव ( shani dev ) की उदंडता में कोई परिवर्तन नहीं आया तो भगवान शिव ने शनि देव को सबक सिखाने के लिए उन पर प्रहार किया जिससे शनि देव को मूर्छा आ गई.

इसके बाद पिता सूर्य देव के कहने पर भगवान शिव ने शनि देव ( shani dev ) की मूर्छा तोड़ी तथा शनि देव को अपना शिष्य बना लिया. तथा उन्हें दण्डाधिकारी का आशीर्वाद दिया. इस प्रकार शनिदेव न्यायधीश के समान न्याय एवं दण्ड के कार्य में भगवान शिव का सहयोग करने लगे.

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