अपने भक्त की रक्षा के लिए जब महादेव शिव को करना पडा भगवान श्री कृष्ण से युद्ध, जाने क्या हुआ इस भीषण युद्ध का परिणाम !

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Shiva and lord krishna :-

महाप्रतापी एवं दैत्यराज बलि के 100 पुत्र थे जिसमे उसके सबसे बड़े पुत्र का नाम वाणासुर था, ( shiva ) वाणासुर बचपन से ही भगवान शिव ( shiva ) का परम भक्त था जब वाणासुर बड़ा हुआ तो वह हिमालय पर्वत की उच्ची चोटियों पर भगवान शिव की तपस्या करने लगा.

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उसके कठिन तपस्या को देख भगवान शिव ( shiva ) उससे प्रसन्न हुए तथा उसे सहस्त्रबाहु के साथ साथ अपार बलशाली होने का वरदान दिया. भगवान शिव के इस वरदान द्वारा वाणासुर अत्यन्त बलशाली हो गया कोई भी युद्ध में उसके आगे क्षण भर मात्र भी टिक नहीं सकता था.

वाणासुर को अपने बल पर इतना अभिमान हो गया की उसने कैलाश पर्वत में जाकर भगवान शिव ( shiva ) को युद्ध के लिए चुनौती दे दी. वाणासुर की इस मूर्खता को देख भगवान शिव ( shiva ) क्रोध में आग बबूला हो गए परन्तु फिर अपने भक्त की इस मूर्खता को उन्होंने उसकी नादानी समझी और कहा अरे मुर्ख ! तेरे घमंड को चूर करने वाला उतपन्न हो चुका है, जब तेरे महल की ध्वजा गिरे तो समझ लेना की तेरा शत्रु आ चुका है.

वाणासुर की एक पुत्री थी जिसका नाम उषा था. एक दिन उषा को एक सपना आया जिसमे उसने भगवान श्री कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध को देखा, वह इतना आकर्षक था की उषा उस पर मोहित हो गई. उषा जब सुबह उठी तो उसने अपने स्वप्न वाली बात अपनी सखी चित्रलेखा को बताई.

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