जाप पूजा के समय रहे इन कामो से दूर, अन्यथा करना पड सकता है भयंकर मुसीबतों का समाना !

Jaap :-

हमारे हिन्दू धर्म में अनेको धार्मिक कर्म-कांड करने का प्रचलन सदियों से निरंतर चले आ रहा है. ( jaap ) हिन्दू धर्म में कई देवताओ की पूजा की जाती है, यहाँ लोग श्रद्धा पूर्वक अपने घर या मंदिरों में भगवान की पूजा, व्रत एवं जाप  करते है. भगवान को स्मरण करने के लिए उनके नाम का ”जाप” ( jaap )  हिन्दू धर्म में विशेष महत्ता रखता है. ऐसी मान्यता है की जाप के माध्यम से भक्त अपने आराध्य देवी-देवताओ को प्रसन्न करते है व मन मुताबिक़ वरदान प्राप्त करते है.

जप ( jaap ) के दौरान यदि कोई व्यक्ति किसी विशेष मन्त्र का उच्चारण करता है तो उस मन्त्र के उच्चारण के साथ-साथ उसके सही ध्वनि का होना भी उतना ही अत्यन्त आवश्यक है. आज हम आपको कुछ ऐसे बातो की बारे में बताने जा रहे है जिन्हे मंत्र जाप करते समय विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है अन्यथा आपको मन्त्र जाप ( jaap ) के विपरीत प्रभाव को झेलना पड सकता है.

हिन्दू धर्म गन्थो में पांच ऐसे कामो के बार में बताया गया है जिन्हे भूल से भी जाप ( jaap ) करते समय नहीं करना चाहिए, इन कामो को जाप ( jaap ) के दौरान करने से देवी-देवता रुष्ठ हो जाते है. परन्तु अक्सर ऐसा देखा गया है की लोग ऐसी गलतियां कर ही देते तथा फिर उन्हें मुसीबतों का समाना करना पड़ता है.

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1 . हिन्दू धर्म ग्रंथो में बताया गया ही की मनुष्य को देवी-देवताओ का जाप  करते समय कभी छींकना नहीं चाहिए, जाप ( jaap ) के दौरान भक्त को अपनी छिक और खासी पर नियंत्रण रखना चाहिए. ऐसा इसलिए है क्योकि छींकने से मनुष्य का मुंह अपवित्र हो जाता है तथा अपवित्र मुंह से भगवान का जाप ( jaap ) करना पुराणों में वर्जित माना गया है.
छिक आना या खासी आना एक स्वभाविक प्राकृतिक क्रिया है तथा इसे किसी प्रकार से रोकना, इसमें हमारा वश नहीं चल सकता अतः जब आपको छिक या खासी को रोक पाना नामुमकिन लगे तो छिक या खासी आने के बाद तुरंत अपने मुंह और हाथ धो कर पवित्र हो जाए तथा इसके पश्चात ही जाप ( jaap ) करना आरम्भ करें.

2 . पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जाप ( jaap ) के दौरान थूकना वर्जित है. जब भी हम भगवान का नाम स्मरण करते हुए जाप करते है तो हमें हमेशा थूकने जैसे बुरे काम से दूर रहना चाहिए. क्योकि थूकते समय हम अपने शरीर की गंदगी को बाहर निकालते है. अतः यह क्रिया जाप के दौरान की जाए तो ऐसा करना अपवित्र माना जाता है.
न सिर्फ थूकना बल्कि यदि हम शरीर से संबंधित कोई अन्य कार्य भी करते या जब इसे जाप ( jaap ) के दौरान रोकना नामुकिन सा प्रतीत होता है तो वह करने के तुरंत बाद हमे स्नान कर लेना चाहिए. इस तरह शरीर दोबारा से पवित्र हो जाता है व इसके बाद फिर से जाप ( jaap ) आरंभ करना सही माना गया है.

3 . जाप ( jaap ) के दौरान प्रायः ऐसा देखा गया है की बहुत से लोग उबासी या जम्हाई लेने लग जाते है जो की आलस्य की निशानी होती है. देवी-देवताओ के जाप ( jaap ) के दौरान यदि आप उबासी लेते है तो ऐसा कर आप उन्हें रुष्ठ कर रहे है. क्योकि देवी-देवताओ का जाप सच्ची श्रद्धा से करना चाहिए उसमे आलस्य का क्या काम ?

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4 . कभी भी मन में क्रोध लिए हुए देवी-देवताओ के मंत्रो का जाप ना करें क्योकि जाप तो मन की शांति को प्राप्त करने के लिए किया जाता है. तथा जाप ( jaap ) करते समय भक्त की मन में ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा होनी चाहिए व मन केवल उनके ध्यान में लगा होना चाहिए. यदि मनष्य क्रोध में हो तो वह जाप करते समय अपना ध्यान ईश्वर पर नहीं लगा सकता.

5 . चाहे वह हिन्दू धर्म हो या कोई अन्य धर्म, हर धर्म में यह कहा गया है की भगवान का नाम स्मरण करते समय भक्त को तन और मन दोनों से शुद्ध होना चाहिए. जो व्यक्ति नशे का आदि है तथा दिन-रात नशा करते रहता है, उसके सभी पूण्य कर्म नष्ट हो जाते है तथा उसकी मृत्यु के पश्चात उसे नर्क में बहुत भयंकर कष्ट सहने पड़ते है. जाप ( jaap ) के समय नशा करने के बारे में सोचना भी धर्मिक ग्रंथो में महापाप बताया गया है.

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