प्रभु श्री राम के हाथो हुआ था एक गन्धर्व कन्या का वध, लेकिन क्यों ?

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हमारे हिन्दू धर्मिक ग्रंथो एवं शास्त्रों में महिलाओं को मारना एक घोर पाप कर्म बताया गया है, ( shri ram ) लेकिन फिर भी भगवान श्री राम के हाथो एक गन्धर्व महिला का वध हो गया था.

परन्तु मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्री राम ( shri ram ) ने ऐसा क्यों किया और आखिर कौन थी वह गन्धर्व महिला आइये जानते है इस सम्पूर्ण कथा को.

बात उस समय की है जब ऋषि विश्वामित्र एक और बर्ह्माण्ड और स्वर्ग बनाने की चेष्टा में अपनी सभी दिव्य शक्तियां खो चुके थे, और उन शक्तियों के पुनः प्राप्ति के लिए वे घोर यज्ञ कर रहे थे.

ऐसे में कुछ राक्षसों ने उनके इस यज्ञ को भंग करने के लिए अनेको बार प्रयास किया. राक्षसों के इन हरकतों से ऋषि विश्वामित्र को अपने यज्ञ को सम्पन्न करने में बाधा उतपन्न हो रही थी.

तब ऋषि विश्वामित्र उन राक्षसों के आतंक से परेशान होकर राजा दशरथ के पास सहायता मांगने गए तथा उनके दो पुत्र राम ( shri ram ) और लक्ष्मण को अपने साथ वन में ले आये. यज्ञ को शान्ति से सम्पन करने के लिए राम ( shri ram ) एवं लक्ष्मण आश्रम के बाहर पहरा देने लगे.

एक बार जब राम ( shri ram ) एवं लक्ष्मण पहरा दे रहे थे तो ताड़का नाम की एक विशाल राक्षसी और उसके दो भाई खर एवं दूषण ने उन पर आक्रमण किया.

तीनो राक्षस अपनी भयंकर माया उन्हें उन दोनों राजकुमार को दिखने लगे. भगवान श्री राम ( shri ram ) ने उन राक्षसों के हर प्रकार की माया को अपने तिरो से नष्ट कर दिया.

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परन्तु ताड़िका एक स्त्री थी और भगवान श्री राम ( shri ram ) एक स्त्री का वध करके महापाप नहीं कर सकते थे. अतः जब भगवान श्री राम ( shri ram ) ने ताड़िका के वध के लिए अपने धनुष बाण से निशाना साधा तो उनके हाथ काँपने लगे.

जब ऋषि विश्वामित्र ने भगवान राम ( shri ram ) को ताड़िका के वध के लिए झिझकते देखा तो उन्होंने श्री राम को प्रेरित करने के लिए भगवान विष्णु दवारा ऋषि भृगु की पत्नी ख्याति के वध करने का उदाहरण प्रस्तुत किया.

तब लोक कल्याण के लिए भगवान श्री राम ( shri ram ) ने राक्षसी ताड़िका सहित खर-दूषण का भी वध कर दिया. वास्तविकता में ताड़िका राक्षसी नहीं बल्कि एक गन्धर्व कन्या थी.

वह गन्धर्व राज सकेतु के पुत्री थी. सकेतु ने ब्र्ह्मा जी की पूजा पुत्र प्राप्ति के इच्छा से करी थी परन्तु उसे पुत्री रूप में ताड़का मिली.

गन्धर्व राज सकेतु ने अपनी पुत्री ताड़िका का विवाह राजा सुमाली से करवाया. कुछ दिनों बाद उन्हें पुत्री की प्राप्ति हुई जिसका नाम उन्होंने कैकसी रखा.

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उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह धोखे से ऋषि विश्रवा से करा दिया तथा ऋषि विश्रवा को रावण के अलावा दो पुत्रों के साथ ही एक पुत्री की प्राप्ति हुई.

अगस्त्य ऋषि ने कैकसी का विवाह ऋषि विश्रवा के साथ धोके से कराने के कारण ताड़िका सहित उसके पति सुमाली और देवर माली को श्राप दिया.

ऋषि अगस्त्य के कारण ही ताड़िका नरभक्षी विशाल राक्षसी बनी और उसके पति एवं देवर खर-दूषण बने. प्रभु राम के हाथो तीनो का उद्धार हुआ और उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हुई.

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