युद्ध में एक बार स्वयं भगवान श्री राम और दो बार लक्ष्मण को हराने वाला योद्धा मेघनाद, जाने इस योद्धा से जुड़े अनसुने रहस्य !

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सुलोचना का इतना कहते ही भुजा हरकत करने लगी, तब एक सेविका ने उस भुजा को खड़िया लाकर हाथ में रख दी. उस कटे हुए हाथ ने आंगन में लक्ष्मण जी के प्रशंसा के शब्द लिख दिए. अब सुलोचना को विश्वास हो गया कि युद्ध में उसका पति मारा गया है. सुलोचना इस समाचार को सुनकर रोने लगीं. फिर वह रथ में बैठकर रावण से मिलने चल पड़ी.

रावण को सुलोचना ने मेघनाद का कटा हुआ हाथ दिखाया और अपने पति का सिर मांगा. सुलोचना रावण से बोली कि अब में एक पल भी जीवित नहीं रहना चाहती में पति के साथ ही सती होना चाहती हूं.

तब रावण ने कहा, ‘पुत्री चार घड़ी प्रतिक्षा करो में मेघनाद का सिर शत्रु के सिर के साथ लेकर आता हूं. लेकिन सुलोचना को रावण की बात पर विश्वास नहीं हुआ. तब सुलोचना मंदोदरी के पास गई. तब मंदोदरी ने कहा तुम राम के पास जाओ, वह बहुत दयालु हैं.’

सुलोचना जब राम के पास पहुंची तो उसका परिचय विभीषण ने करवाया. सुलोचना ने राम से कहा, ‘हे राम में आपकी शरण में आई हूं. मेरे पति का सिर मुझे लौटा दें ताकि में सती हो सकूं. राम सुलोचना की दशा देखकर दुखी हो गए. उन्होंने कहा कि मैं तुम्हारे पति को अभी जीवित कर देता हूं.’ इस बीच उसने अपनी आप-बीती भी सुनाई.

सुलोचना ने कहा कि, ‘मैं नहीं चाहती कि मेरे पति जीवित होकर संसार के कष्टों को भोगें. मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि आपके दर्शन हो गए. मेरा जन्म सार्थक हो गया. अब जीवित रहने की कोई इच्छा नहीं.’

राम के कहने पर सुग्रीव मेघनाद का सिर ले आए लेकिन उनके मन में यह आशंका थी कि कि मेघनाद के कटे हाथ ने लक्ष्मण का गुणगान कैसे किया. सुग्रीव से रहा नहीं गया और उन्होंने कहा में सुलोचना की बात को तभी सच मानूंगा जब यह नरमुंड हंसेगा.

सुलोचना के सतीत्व की यह बहुत बड़ी परीक्षा थी. उसने कटे हुए सिर से कहा, ‘हे स्वामी! ज्लदी हंसिए, वरना आपके हाथ ने जो लिखा है, उसे ये सब सत्य नहीं मानेंगे. इतना सुनते ही मेघनाद का कटा सिर जोर-जोर से हंसने लगा. इस तरह सुलोचना अपने पति की कटा हुए सिर लेकर चली गईं.

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