युद्ध में एक बार स्वयं भगवान श्री राम और दो बार लक्ष्मण को हराने वाला योद्धा मेघनाद, जाने इस योद्धा से जुड़े अनसुने रहस्य !

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पहले दिन के युद्ध में उतरते ही इंद्रजीत ( meghnad )  ने सुग्रीव की पूरी सेना को हिला डाला. लक्ष्मण इंद्रजीत के सामने युद्ध को आये परन्तु वे भी अधिक समय तक टिक न सके, लक्ष्मण को कमजोर पड़ता देख राम भी इंद्रजीत के साथ युद्ध में उतरे परन्तु उसके मायावी शक्ति के आगे बेबस थे.

दरअसल युद्ध पे आने से पूर्व मेघनाद ने अपनी कुल देवी का यज्ञ शुरू करवाया था जिसके प्रभाव से वो और उसका रथ अदृश्य हो जाता था. मेघनाद ( meghnad ) ने अपनी मायावी शक्ति के प्रभाव से राम और लक्ष्मण दोनों को भ्रमित कर दिया तथा मौका पाकर उन पर नागपश का प्रयोग किया जिसके प्रभाव से दोनों मूर्छित होकर गिर पड़े.

नागपाश से मूर्छित व्यक्ति अगले दिन का सूरज नहीं देख सकता था. परन्तु हनुमान जी नागपाश से अपने प्रभु राम व लक्ष्मण को मुक्त करने लिए वैकुंठ लोग गए तथा वहां से नागो के शत्रु गरुड़ को लेकर आये. गरुड़ को देख नाग भयभीत हो गए तथा उन्होंने राम तथा लक्ष्मण को मुक्त कर दिया तथा उनकी मूर्छा टूटी.

अगले दिन लक्ष्मण ने मेघनाद ( meghnad ) का सामना फिर से किया तथा दोनों के मध्य भयंकर युद्ध हुआ. तभी मेघनाद के शरीर में लक्ष्मण का एक तीर छू जाने से वह क्रोधित हो तथा उसने लक्ष्मण पर शक्ति बाण छोड़ दिया. शक्ति बाण लगते ही लक्ष्मण जी मूर्छित हो पड़े.

तब लक्ष्मण के प्राण को बचाने के लिए हनुमान जी लंका से वैद्य को उसके घर ही समेत उठाए लाये. वैद्य ने हनुमान को उपाय बताते हुए संजीवनी बूटी लाने के लिए कहा तब हनुमान जी सारा दोरनांचल पर्वत उखाड़ कर ले आये.

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