क्या आप जानते है महाभारत के अंत में महादेव शिव ने पांडवो को दिया था पुर्नजन्म का श्राप ?

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Lord Shiva :-

महाभारत युद्ध समाप्ति की ओर था, युद्ध के अंतिम दिन दुर्योधन ने अश्वत्थामा ( lord shiva ) को कौरव सेना का सेनापति नियुक्त किया. अपनी आखरी सांसे ले रहा दुर्योधन अश्वत्थामा से बोला की तुम यह कार्य निति पूर्वक करो या अनीति पूर्वक पर मुझे पांचो पांडवो का कटा हुआ शीश देखना है.

दुर्योधन को वचन देकर अश्वत्थामा अपने बचे कुछ सेना नायकों के साथ पांडवो के मृत्यु का षड्यंत्र रचने लगा. भगवान श्री कृष्ण यह जानते थे की महाभारत के अंतिम दिन काल जरूर कुछ ना कुछ चक़्कर जरूर चलाएगा. अतः उन्होंने महादेव शिव की विशेष आराधना आरम्भ कर दी.

श्री कृष्ण ने भगवान शिव ( lord shiva ) की स्तुति करते हुए कहा हे ! आदिदेव महादेव शिव आप ही पुरे सृष्टि के सृजनकर्ता हो, विनाशकर्ता हो.
सभी पापो से मुक्ति दिलाने वाले और अपने भक्तो पर शीघ्र प्रसन्न हो जाने वाले भोलेनाथ ( lord shiva ) में आपके चरणों में अपने शीश नवाता हु. हे ! देवादिदेव पांडव मेरे शरण में है अतः उनकी हर कष्टों से रक्षा करें.

भगवान कृष्ण द्वारा स्वयं महादेव की स्तुति करने पर महादेव तुरंत नंदी में सवार होकर उनके समक्ष प्रकट हुए. तथा हाथ में त्रिशूल धारण किये पांडवो के शिविर के बाहर उनकी रक्षा करने लगे. सभी पांडव उस समय शिविर के नजदीक ही स्थित नदी में स्नान कर रहे थे.

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