जाने हमारे हिन्दू धर्म से जुड़े अनोखे ऐसे प्राचीन रहस्य जिनका सुलझना है ” असम्भव ” !

Hindu Dharma :-

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हमारे धर्म ( hindu dharma ) के पवित्र ग्रंथो में कुछ ऐसे प्रचलित रहस्य बताए गये हेै जो सदियों से एक पहेली बने हुए है तथा उनमे से भी कुछ ऐसे रहस्य जिनके बारे में जानना असम्भव है. भारत देश अपने अत्यन्त प्राचीन सभ्यताओं एवं संस्कृति के साथ ही यहाँ उपस्थित अनेको रहस्य एवं रोमांच के लिए भी जाना जाता है.

भारत ( hindu dharma ) ही वह पहला ऐसा देश था जहाँ प्रथम भाषा एवं सभी भाषाओं की जननी कहि जाने वाली संस्कृत भाषा उत्प्पन हुई थी. इसके अलावा भारत में दुनिया की सर्वप्रथम लिपि ब्राह्मी लिपि का जन्म होने के साथ दुनिया के सबसे पहले विश्वविद्यालय नालंदा और तक्षिला की स्थापना हुई. भारत में अनेको मुख्य सिद्धांतो का आविष्कार हुआ, ”शून्य” भी भारत के ही प्रसिद्ध वैज्ञानिक आर्यभट्ट की खोज थी.

परन्तु इन सब खोजो के आल्वा आज हम आपको भारत ( hindu dharma ) के कुछ ऐसे रहस्यों के बारे में बताने जा रहे है जिनके के बार में अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है तथा जो अभी तक अनसुलझे है.

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ऋषि कश्यप तथा उनकी पत्नियों से जुड़ा रहस्य :- प्रारम्भ में पृथ्वी में सिर्फ एक द्वीप था फिर धीरे पृथ्वी का यह एक द्वीप दो भागो में बटा तथा अंत में यह सात द्वीपों में बट गया. सृष्टि के निर्माण के दौरान ब्र्ह्मा जी ने पृथ्वी में समुद्र तथा धरती पर कई प्रकार के जीवो को उतपन्न करा. उसी दौरान उन्होंने अपने कई मानस पुत्र भी जन्मे जिनमे से एक थे ऋषि मारीच. ऋषि मारीच का एक बहुत ही विद्वान पुत्र था जिसका नाम उन्होंने कश्यप रखा था. ( hindu dharma )

ऋषि कश्यप को अष्टनेमि के नाम से भी जाना जाता है. रहस्य की बात यह ही की क्या कोई इसान सर्प, पशु, पक्षी आदि तरह के जातियों को जन्म दे सकता है. जिव विकासवादियों के इस तरह का शोध जरूर करना चाहिए.
भगवान विष्णु का वाहन गरुड़ है तथा गरुड़राज ऋषि कश्यप एवं उनकी पत्नी विनीता के पुत्र थे. ( hindu dharma )

ऐसे तो कश्यप ऋषि की कई पत्नियां थीं जबकि प्रमुख रूप से 17 का हम उल्लेख करना चाहेंगे- 1. अदिति, 2. दिति, 3. दनु, 4. काष्ठा, 5. अरिष्टा, 6. सुरसा, 7. इला, 8. मुनि, 9. क्रोधवशा, 10. ताम्रा, 11. सुरभि, 12. सुरसा, 13. तिमि, 14. विनीता, 15. कद्रू, 16. पतांगी और 17. यामिनी आदि पत्नियां बनीं.

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अदिति से 12 अदितियो का जन्म हुआ जो सभी देवता कहलाए तथा इनका निवास स्थान हिमालय के उत्तर दिशा में था.
दिति से कश्यप ऋषि की तीन संताने जन्मी जिनमे दो पुत्र हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष थे तथ एक पुत्री सिंहिका थी. ये दैत्य कहलाए तथा इनका स्थान हिमालय में दक्षिण की ओर था.

दनु से ऋषि कश्यप को 61 महान पुत्रों का जन्म हुआ जो दानव कहलाए.

रानी काष्ठा से घोड़े आदि के खुर वाले पुत्र उतपन्न हुए, रानी सुरसा से असुर पुत्रों की प्राप्ति हुई, रानी इला से लता अदि पृथ्वी पर उत्पन्न होने वाली वनस्पतियों का जन्म हुआ. मुनि के गर्भ से अप्सराएं जन्मीं. कश्यप की क्रोधवशा नामक रानी ने सांप, बिच्छू आदि विषैले जंतु पैदा किये.

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मणिधारी एवं इच्छाधारी सांप होते है ? :- हिन्दू धर्म ( hindu dharma ) में पशुओं में सर्वप्रथम पूजनीय गाय को माना जाता है तथा गाय के बाद दूसरे नंबर पर सर्पो की पूजा करी जाती है.

सांप एक बहुत ही रहस्मय प्राणी है तथा इसे महादेव शिव के प्रमुख गणो में से एक माना जाता है. वैकुंठ धाम में भगवान विष्णु शेषनाग के ऊपर लेटकर विश्राम करते है.

ऐसा कहा जाता है की जो सर्प सौ वर्षो से अधिक जीता है उसमे उड़ने की शक्ति आ जाती है. सर्प भी कई तरह के होते है जैसे इच्छाधारी, मणिधारी, एक फनी, दो फनी तथा शेषनाग दस फनी है . मणि धारण करने वाले सर्पो निल मणि धारण करने वाले सर्प को सबसे उत्तम माना गया है. तथा इच्छाधारी सर्पो के विषय में यह कहा जाता है की यह मनुष्य, पशु, पक्षी किसी का भी रूप धारण कर सकते है.

पुराणों में शेषनाग को 10 फनी बताया गया है परन्तु शेषनाग का वास्तविकता में होना यह अभी भी रहस्य है क्योकि वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी में 10 फनी नाग अभी तक नहीं पाया गया है.

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क्या पारसमणि वास्तव में अस्तित्व में है :- मणि एक प्रकार का चमकीला पत्थर होता है तथा इसे भी हिरे के श्रेणी में ही रखा जाता है . पारसमणि के बारे में बताया जाता है की यह बहुत ही अद्भत एवं रहस्यमयी मणि है जो भी यह मणि अपने पास रखता है वह अपनी मनचाही इच्छा पूर्ण कर सकता है.

मणियों के सबंध में अनेको बाते पुराणों में लिखी गई है. अश्वथामा के पास ऐसी मणि थी जिसे वह बहुत ही शक्तिशाली एवं अमर हो गया. रावण ने कुबेर से चंद्रकांत नाम की मणि छीन ली थी .

एक पौराणिक किस्से के अनुसार पारसमणि के बारे में बताया है की इसे किसी भी लोहे पर छुआने से वह सोने की बन जाती तथा कौवे को इस मणि की पहचान होती है. यह मणि हिमालय के पास पाई जाती है.

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संजीवनी बूटी का रहस्य :- एक बार युद्ध में देवताओ द्वारा मारे गए असुरो को गुरु शुक्राचार्य ने अपनी संजीवनी विद्या से पुनः जीवित कर दिया थी. इस विद्या के बारे में जान्ने के लिए बृहस्पति ने अपने शिष्य को छल से शुक्राचार्य के आश्रम में भेज था. जब इस बात का पता शुक्राचार्य को लगा तो उन्होंने उस शिष्य का वध कर दिया.

रामायण में यह उल्लेख मिलता है की जब एक मेघनाद ने लक्ष्मण पर अपने शक्ति बाण का प्रयोग किया था तो वे इससे मूर्क्षित हो गए थे. तब उन्होंने मूर्छा से उड़ाने के लिए वैद्य सुषेण के आदेश पर हनुमान जी दोणाचार्य पर्वत से संजीवनी बूटी का पूरा पर्वत ही उठा लाये थे. सुषेण ने लक्ष्मण पर चार वनस्प्तियो का प्रयोग किया था.

1 . मृत संजीवनी ( मृत व्यक्ति को जिन्दा करने के लिए ), 2 . विशालयकरणी ( तीर निकालने वाली ), 3 .सन्धानकरणी ( शरीर में रक्त की पूर्ति करने वाली ), 4 . सवंरयकरणी ( त्वचा को स्वस्थ करने वाली )

इन 4 वनस्पतियों में से मृत संजीवनी (या सिर्फ संजीवनी कहें) सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह व्यक्ति को मृत्युशैया से पुनः स्वस्थ कर सकती है. लेकिन सवाल यह है कि यह चमत्कारिक पौधा कौन-सा है! और इस बारे में कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, बेंगलुरु और वानिकी महाविद्यालय, सिरसी के डॉ. केएन गणेशैया, डॉ. आर. वासुदेव तथा डॉ. आर. उमाशंकर ने बेहद व्यवस्थित ढंग से इस पर शोध कर 2 पौधों को चिह्नित भी किया है.

इन 6 में से भी 3 प्रजातियां ऐसी थीं, जो ‘संजीवनी’ या उससे मिलते-जुलते शब्द से सर्वाधिक बार और सबसे ज्यादा एकरूपता से मेल खाती थी : क्रेसा क्रेटिका, सिलेजिनेला ब्रायोप्टेरिस और डेस्मोट्रायकम फिम्ब्रिएटम. इनके सामान्य नाम क्रमशः रुदन्ती, संजीवनी बूटी और जीवका हैं. इन्हीं में से एक का चुनाव करना था. अगला सवाल यह था कि इनमें से कौन-सी पर्वतीय इलाके में पाई जाती है, जहां हनुमान ने इसे तलाशा होगा. क्रेसा क्रेटिका नहीं हो सकती, क्योंकि यह दखन के पठार या नीची भूमि में पाई जाती है.

सिलेजिनेला ब्रायोप्टेरिस कई महीनों तक एकदम सूखी या ‘मृत’ पड़ी रहती है और एक बारिश आते ही ‘पुनर्जीवित’ हो उठती है. डॉ. एनके शाह, डॉ. शर्मिष्ठा बनर्जी और सैयद हुसैन ने इस पर कुछ प्रयोग किए हैं और पाया है कि इसमें कुछ ऐसे अणु पाए जाते हैं, जो ऑक्सीकारक क्षति व पराबैंगनी क्षति से चूहों और कीटों की कोशिकाओं की रक्षा करते हैं तथा उनकी मरम्मत में मदद करते हैं. तो क्या सिलेजिनेला ब्रायोप्टेरिस ही रामायण काल की संजीवनी बूटी है?