इस ख़ास मन्त्र के उच्चारण से सक्षात प्रकट होते है हनुमान जी, यहाँ मिलते है हनुमान जी के प्रकट होने के सबूत !

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आप सब जानते है की कलियुग में एकमात्र हनुमान जी है जो जो धरती पर है और अगर सवाल ये उठता है की अगर वो धरती पर है तो कहा ? क्योंकि मूर्ति में तो आप हर देवता के दर्शन करते है.इसकी सच्ची बात आज आपको बताते है की हनुमान जी केवल मूर्ति में ही नहीं हकीक़त में भी धरती में विराजमान है और ऐसा माना जाता है की वो हिमालय के जंगलो में अभी भी वास करते है !

आपको पता होगा की त्रेतायुग के अंत में जब भगवान् राम बैकुंठ धाम को पधार गए थे उस समय कोई था जो कलियुग के अंत तक धरती पर भगवान् राम की भक्ति और जन कल्याण हेतु रुका वह थे हनुमान जी . कलियुग में केवल भगवान हनुमान है जिनका अस्तित्व आपको इस जमीं पर मिलेगा !

हम आपको आज जो बताने जा रहे है वह दिलचस्प ही नहीं बल्कि अविश्वसनीय भी है इसे पढने और जानने के बाद आपका भगवान् के प्रति श्रद्धा व विश्वास और बढ़ जाएगा….

आप सभी को पता होगा की हनुमान जी अमर है और इन्हे यह वरदान श्री राम ने कलियुग में धरती पर राम भक्तो के कल्याण के लिए दिया तथा बजरंग बली भी इस वरदान को पाकर खुश थे क्योकि वे इस वरदान द्वार राम भक्ति और उनके कीर्तन को सुन सकते थे. हनुमान जी के साक्षात् स्वरूप त्रेतायुग के बाद जब द्वापरयुग आया उसमे भगवान् कृष्ण के काल के दौरान भी कई स्थान हनुमान जी का प्रसंग सुनने को मिला.

कलियुग में सन 1300 में संत माधवाचार्य के आश्रम में हनुमान जी का आगमन हुआ था उसके बाद सन 1600 वो तुलसीदास जी को रामायण का हिंदी अनुवाद लिखने के लिए कहने आये थे, इनका यह सिलसिला थमा नहीं फिर यह रामदास स्वामी , राघवेन्द्र स्वामी, श्री सत्य साईं बाबा को पवनपुत्र हनुमान ने साक्षात्कार दर्शन दिए है .

धरती पर जहा पर भी हनुमान ने विचरण किया था वहा पर उनके चरण चीन्ह आज भी देखे जा सकते है . एक स्थान तो बजरंग बली के रहने के स्थान के नाम से जाना जाता है, यह स्थान तमिलनाडू राज्य के रामेश्वरम के नज़दीक गंद्मादना पर्वत पर स्थित है और इसे बजरंग बलि के निवास का स्थान मानते है!

आपको तो पता होगा की आज भी लोगो की मदद करने के लिए हनुमान जी आते है और अदृश्य रहते है, दृश्य सिर्फ एक ख़ास समुदाय के लोगो को है जो श्री लंका के जंगलो में रहते है .उनको हनुमान जी ने एक मन्त्र दिया था जिसके ज़रिये वो पवनपुत्र हनुमान का आवाहन करेंगे और उनके दर्शन उन्हें प्राप्त हो सकेंगे पर उस मन्त्र का कोई दुरूपयोग न करे इसके लिए हनुमान जी ने 2 शर्ते या कुछ नियम रखे जिसका सही अर्थ केवल इसी प्रजाति के लोग ही समझते है .

पहली ये की आपकी अंतरात्मा को ये ज्ञात हो की उसका क्या सम्बन्ध है बजरंग बली से यानी की वो एक भक्त का रिश्ता रखता है या शिष्य का या भाई बंधू सम्बन्ध का .केवल इस मन्त्र को आजमाने के लिए ही नहीं आप उच्चारण कर सकते .

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